January 30, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार

आगराः शालिग्राम की हुई संजीव शिवहरे की तुलसी; बारात लेकर पहुंचे वीरेंद्र गुप्ता एडवोकेट; मंत्रोच्चार से हुई विवाह की रस्में

आगरा।
लोहामंडी में आलमगंज निवासी श्री संजीव शिवहरे (पिंटू) परिवार ने मंगलवार को विष्णुप्रिया तुलसी का विवाह शालिग्राम के साथ पूर्ण श्रद्धाभाव से संपन्न कराया। लोहामंडी के ही श्री वीरेंद्र गुप्ता एडवोकेट का परिवार शालिग्रामजी की बारात लेकर उनके द्वार पर आए। सांसारिक विवाह की तर्ज पर मंत्रोच्चार के साथ विवाह की सभी रस्मों के पश्चात परिवार ने अश्रुपूरित नेत्रों से अपनी तुलसी को शालिग्राम के साथ विदा किया।
बता दें कि तुलसी विवाह कार्तिक एकादशी के अगले दिन मनाया जाता है। माना जाता है कि इससे पहले सभी देवी देवता सोए होते हैं और देवउठनी पर उठते हैं, जिसके बाद ही सारे मुहूर्त खुलते हैं और तुलसी विवाह होता है। मान्यता है कि अगर किसी को अपने मन की बात भगवान तक पहुंचानी हो तो वो तुलसी के जरिये पहुंचा सकता है। भगवान तुलसी मां की बात कभी नहीं टालते। तुलसी विवाह के लिए श्री संजीव शिवहरे (पिंटू) ने अपने घर (राधाकृष्ण मंदिर के बगल में) के आंगन में फूलों की आकर्षक सजावट से मंडप बनवाया था। श्री संजीव गुप्ता के साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना गुप्ता ने तुलसी के माता-पिता की भांति विवाह की सभी रस्मों का निर्वहन किया।
श्री वीरेंद्र गुप्ता शिवहरे एडवोकेट और उनकी धर्मपत्नी श्रीमती रचना शिवहरे, खुशी गुप्ता, प्रियंका शिवहरे, विजयलक्ष्मी शिवहरे, प्रीती शिवहरे, रेनू शिवहरे, भावना गुप्ता, मोहिनी गुप्ता, डॉली, रोमा शिवहरे अन्य परिवारीजन व मित्रों के साथ शालिग्राम की बारात लेकर पहुंचे तो शिवहरे परिवार ने दरवाजे पर बारात का स्वागत किया। द्वाराचार की रस्मों के बाद शालिग्राम महाराज को घर के अंदर लाया गया जहां तुलसी का मंडप सजा था। मंडप में पंडितजी ने मंत्रोच्चार के साथ विवाह की सभी रस्में पूर्ण कराईं। सर्वप्रथम श्री संजीव शिवहरे और श्रीमती साधना शिवहरे ने कन्यादान किया। इसके पश्चात उनके संबंधियों, रिश्तेदारों व मित्रों ने भी तुलसी का कन्यादान लेकर स्वयं को कृतार्थ किया। इसके पश्चात शालिग्राम के साथ तुलसी ने पवित्र अग्नि-फेरे लिए। बारातियों और घरातियों के प्रीतिभोज के पश्चात परिवार ने तुलसी को भेंट-उपहार देकर शालिग्राम के साथ विदा किया। विदाई में पूरा परिवार भावुक नजर आया। तुलसी पक्ष की ओर से अंजु गुप्ता, क्षमा गुप्ता, नीमा शिवहरे, रितु शिवहरे, पूनम गुप्ता, रिंकी शिवहरे, रजनी गुप्ता, सुनीता राजेंद्र गुप्ता, वंदना गुप्ता, लवी गुप्ता, रिया गुप्ता, मणि गुप्ता समेत उनके कई रिश्तेदार व मित्रगण शामिल हुए।
तुलसी विवाह के पीछे क्या है मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान विष्णु को दैत्यराज जालंधर से युद्ध करना पड़ा। काफी दिन युद्ध के बाद भी दैत्यराज परास्त न हुआ। श्री हरि ने विचार किया तो पता चला कि दैत्यराज की रूपवंती पत्नी वृंदा का तप-बल ही उसकी मृत्यु में बाधा बना हुआ है। जब तक वृंदा के तप-बल का क्षय नहीं होगा, तब तक दैत्यराज को हरा पाना नामुमकिन होगा। तब श्री हरि ने दैत्यराज जालंधर का रूप धारण किया और वृंदा के तप-बल के साथ उसके सतीत्व को भी भंग कर दिया। इस तरह प्रभु ने जालंधर का वध कर युद्ध में सफलता प्राप्त की। जब वृंदा को प्रभु के इस छल का पता चला तो उसने उन्हें श्राप दे दिया कि तुम पत्थर के हो जाओ। प्रभु को वृंदा से अनुराग हो चुका था। उन्होंने श्राप को स्वीकार करते हुए वृंदा से कहा कि तुम वृक्ष बनकर मुझ पत्थर को अपनी छाया प्रदान करना। इसके बाद भगवान श्रीहरि शालिग्राम बन गए और वृंदा तुलसी के रूप में पृथ्वी पर उत्पन्न हुईं। इस प्रकार कार्तिक शुक्ल एकादशी को तुलसी-शालिग्राम का प्रादुर्भाव हुआ। देवउठनी एकादशी से छह महीने तक देवताओं के दिन प्रारंभ होते हैं। अतः श्रद्धालु तुलसी का विवाह शालिग्राम के स्वरूप में भगवान श्रीहरि के साथ कर उन्हेबैकुंठ के लिए विदा करते हैं।

Leave feedback about this

  • Quality
  • Price
  • Service

PROS

+
Add Field

CONS

+
Add Field
Choose Image
Choose Video