आगरा।
सूरज था तो जल गया
रश्मि थीं, सो बिखर गईं
वक्त था तो गुजर गया
स्मृति थी, सो रह गई
वक्त गुजर जाता है, व्यक्ति चला जाता है…बस, स्मृतियां रह जाती हैं। आज दिनांक 19 दिसंबर, 2025 को स्व. श्री कमलकांत शिवहरे की छठवीं पुण्यतिथि है। स्व. श्री कमलकांत शिवहरे ने शिवहरे-जायसवाल महासभा का गठन कर अखिल भारतीय स्तर पर समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाने की एक बड़ी पहल की थी। उन्हें आगरा में पहली बार शिवहरे समाज का परिचय सम्मेलन और सामूहिक विवाह कराने का श्रेय जाता है, जिसकी सफलता ने पूरे देश में स्वजातीय समाज के बीच आगरा के शिवहरे समाज को सशक्त पहचान दी।
स्व. श्री कमलकांत शिवहरे की पहल पर और उनके नेतृत्व में आगरा में हुए दो परिचय सम्मेलनों और दो सामूहिक विवाहों के आयोजनों की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि आगरा ही नहीं, सुदूर समाज में भी लोग इन आयोजनों को आज तक याद करते हैं। आगरा से बाहर की कई सामाजिक शख्सियतें विभिन्न संदर्भों में आगरा में हुए उन आयोजनों का जिक्र शिवहरेवाणी से कर चुकी हैं। स्व. श्री कमलकांत शिवहरे ने 4 जुलाई 1997 को शिवहरे जायसवाल (वैश्य) महासभा का गठन कर आगरा में पहला परिचय सम्मेलन 15 अगस्त, 1997 को पंचकुइयां स्थित माथुर वैश्य भवन में कराया था जिससे विवाहयोग्य 68 युवतियों और 125 युवकों का परिचय समाज से हुआ। कई रिश्ते तय हुए। इस कार्यक्रम में आगरा मंडल के तत्कालीन अपर आयुक्त श्री शंकरलाल जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में अखिल भारतीय जायसवाल महासभा के तत्कालीन महामंत्री स्व. श्री वेदकुमार जायसवाल दिल्ली से आए थे। अध्यक्षता आगरा छावनी परिषद के तत्कालीन पार्षद स्व. श्री गोपाल नारायण शिवहरे ने की थी। इस पहले आयोजन की सफलता से उत्साहित शिवहरे जायसवाल (वैश्य) महासभा ने 3 फरवरी, 1998 को आगरा में सदर स्थित गोपीचंद शिवहरे सनातन धर्म कन्या इंटर कालेज में सामूहिक विवाह का भव्य आयोजन कर पांच जोड़ों की शादी कराई। इस सामूहिक विवाह में आगरा के शिवहरे समाज ने नवविवाहित जोड़ों पर मानों उपहारों की झड़ी लगा दी थी। समाज का उत्साह देखते ही बन रहा था। उस कार्यक्रम के साक्षी बने लोग उस मंजर को आज भी भूले नहीं होंगे।
इसके बाद 16 मई 1999 को दूसरा परिचय सम्मेलन सूरसदन प्रेक्षागृह किया गया जिसमें आगरा-फिरोजाबाद समेत देशभर से 180 युवकों और 145 युवतियों के परिचय महासभा को प्राप्त हुए थे। इस आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में तत्कालीन यूपी सरकार के सांस्कृतिक मंत्री श्री जितेंद्र कुमार जायसवाल मौजूद थे। खास बात यह है कि उन्होंने पहली बार इसी सम्मेलन में जायसवाल, शिवहरे समाज को पिछड़ा वर्ग में शामिल किए जाने को लेकर सरकार की तरफ से आश्वस्त किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता यूपीएलडीएमसी के पूर्व चेयरमैन श्री प्रकाशचंद्र शिवहरे ने की थी। विशिष्ट अतिथि के रूप में शिवहरे जायसवाल (सर्ववर्गीय) महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष स्व. श्री वेदकुमार जायसवाल मंचासीन थे। मंच पर दाऊजी मंदिर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष कीर्तिशेष श्री चंद्रशेखर शिवहरे ‘चंदू कप्तान’, श्री किशन शिवहरे (जो बाद में दाऊजी मंदिर के अध्यक्ष रहे), श्री भगवान स्वरूप शिवहरे (यह भी बाद में दाऊजी मंदिर के अध्यक्ष बने), समाजसेवी श्री सतीश शिवहरे ‘ठेकेदार’, कानपुर के पूर्व मेयर श्री जयप्रकाश जायसवाल और जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के संरक्षक श्री अजय जायसवाल (लखनऊ) जैसी शख्सियतों की मौजूदगी में यह कार्यक्रम भी पहले परिचय सम्मेलन की तरह ही बहुत सफल रहा। इसके बाद दूसरा सामूहिक विवाह 10 फरवरी 2000 को एमडीजैन इंटर कालेज में भव्य इंतजामों के बीच संपन्न हुआ जिसमें एक दर्जन जोड़ों का विवाह कराया गया था। आगरा और फिरोजाबाद के शिवहरे समाज ने बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में शामिल होकर नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। लगातार सफल कार्यक्रमों से लग रहा था कि अब यह सिलसिला चल निकला है, और शिवहरे समाज आगरा के हर साल होने वाले उत्सव का रूप ले लेगा। लेकिन, फिर कुछ ऐसा हुआ कि इस सिलसिले पर ब्रेक लग गया।
इसमें दो राय नहीं कि स्व. श्री कमलकांत शिवहरे ने व्यापक पैमाने पर समाज के सभी वर्गों को जोड़कर परिचय सम्मेलनों और सामूहिक विवाहों के अद्भुत आयोजन कर आने वालों के लिए एक बड़ी लाइन खीच दी थी जो आज भी अमिट है, उनकी स्मृतियों की तरह।
समाचार
छठवीं पुण्यतिथि पर प्रेरक स्मृतियां: स्व. श्री कमलकांत शिवहरे जिन्होंने आगरा में शिवहरे समाजको एकजुट कर कराए परिचय सम्मेलन और सामूहिक विवाह के चार सफल आयोजन
- by admin
- December 18, 2025
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- 1 month ago








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