February 18, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
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झांसी के अशोक राय को उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी; अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा के यू.पी. इकाई का गठन

भोपाल/झांसी।
झांसी के प्रतिष्ठित समाजसेवी श्री अशोक रायको को ‘अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा’ की उत्तर प्रदेश इकाई का अध्यक्ष बनाया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जयनारायण चौकसे ने भरोसा जताया है कि श्री अशोक राय के ऊर्जावान नेतृत्व से महासभा ‘सामाजिक एकीकरण’ के अपने एजेंडे को उत्तर प्रदेश में कुशलता के साथ क्रियान्वित करेगी।
महासभा के राष्ट्रीय महासचिव श्री एमएल राय ने शिवहरेवाणी को यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मिर्जापुर के श्री आशीष जायसवाल उत्तर प्रदेश इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष होंगे, वहीं प्रयागराज के युवा सामाजिक कार्यकर्ता श्री सुधीर कुमार जायसवाल को प्रदेश महासचिव (कार्यकारी) नियुक्त किया गया है। झांसी के युवा श्री सुमित राय को प्रदेश कोषाध्यक्ष बनाया गया है, अमेठी के श्री रामरतन जायसवाल को प्रदेश महासचिव (संगठन) नियुक्त किया है। आगरा के सोम साहू को महासचिव (प्रचार) की जिम्मेदारी दी गई है।

कौन हैं अशोक राय
अखिल भारतवर्षीय हैहय कलचुरी महासभा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्री अशोक राय को झांसी के सामाजिक और कारोबारी जगत में विशेष प्रतिष्ठा प्राप्त है। वह दतिया में जन्मे, पढ़े-लिखे और 1992 से झांसी में बस गए। यहां अपना कारोबार शुरू करने के साथ ही कलचुरी समाज में भी सेवा-भाव से सक्रिय हो गए। उन्होंने प्रतिवर्ष होली मिलन एवं दशहरा मिलन जैसे समारोहों का आयोजन प्रारंभ किया। वर्ष 2008 में झांसी में 51 स्वजातीय कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह की सफलता में कोषाध्यक्ष के रूप में उनकी निर्णायक भूमिका रही। उन्होंने मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह जैसे आयोजन भी कराए। वर्ष 2015 में अशोक राय को कलचुरी समाज झांसी का जिलाध्यक्ष नियुक्ति किया गया। अफने कार्यकाल में उन्होने समाज को एकजुट करने का सतत प्रयास किया। इसी दौरान भगवान सहस्राबाहु अर्जुन जन्मोत्सव पर भव्य शोभायात्रा की शुरुआत कराई। शंकर सिंह बगीचा स्थित सहस्रबाहु मंदिर की स्थापना में उनकी अहम भूमिका रही।

महासभा के लक्ष्य व एजेंडा
अगस्त, 2024 में भोपाल में महासभा का राष्ट्रीय अधिवेशन में ‘कलचुरी समाज के एकीकरण’ का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। यह भी तय हुआ था कि तमाम वर्गों-उपवर्गों और असंख्य उपनामों में विभाजित करोड़ों की आबादी वाले कलार, कलाल, कलवार समाज को ‘कलचुरी’ शब्द की एक-समान पहचान दी जाए ताकि उनमें एकजुटता का भाव उत्पन्न हो। शुरुआत इस तरह हो कि सभी वर्गों-उपवर्गों के सामाजिक संगठनों को अपने बैनरों में सबसे ऊपर कलचुरी समाज लिखने के लिए प्रेरित किया जाए। भोपाल अधिवेशन में निर्धारित नए एजेंडे में समाज के हर बच्चे की शिक्षा सुनिश्चित करना भी शामिल है। साथ ही समाज की आर्थिक मजबूती के लिए समाजबंधुओं को स्थानीय स्तर पर स्वजातीय व्यापारियों के साथ व्यवहार करने को प्रेरित किया जाना भी शामिल है।

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