February 17, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार समाज

दिल्ली में भगवान सहस्रबाहु की प्रथम मूर्ति स्थापित; सफदरजंग एन्क्लेव में पुरातन हनुमान मंदिर में अनुष्ठान; देशभऱ से पहुंचे कलचुरी समाजबंधु

आगरा।
देश की राजधानी दिल्ली में राजराजेश्वर भगवान श्री सहस्रबाहु की प्रथम मूर्ति सफदरजंग कॉंम्प्लेक्स में भीकाजी कामा के सामने स्थित पुरातन सिद्धपीठ हनुमान मंदिर परिसर में पूर्ण विधि-विधान से स्थापित कर दी गई है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के पूर्व उप-महापौर विजय कुमार भगत के मार्गदर्शन में तीन दिन चले ‘मूर्ति-स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठा समारोह’ दिल्ली ही नहीं, देशभर से कलचुरी समाज के प्रतिष्ठित जनों ने भागीदारी की।

बता दें कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कलचुरी समाज के सभी वर्गों के लोग खासी संख्या में रहते हैं जो देशभर के विभिन्न इलाकों से हैं। इनमें पूर्वांचल और बिहार से आए लोगों की संख्या सबसे अधिक है। यही नहीं, दिल्ली में कलचुरी समाज की कई संस्थाएं और संगठन सक्रिय हैं। लेकिन अब तक उनके आराध्य भगवान सहस्रबाहु अर्जुन की एक भी प्रतिमा राष्ट्रीय राजधानी में कहीं नहीं लगी थी। सहस्रबाहुजी की एक मूर्ति नरेला के पास अवश्य लगी है लेकिन वह इलाका हरियाणा में आता है। अब जिस ‘पुरातन सिद्धपीठ हनुमान मंदिर’ में भगवान सहस्रबाहु की मूर्ति स्थापित की गई है, वह सफदरजंग अस्पताल और एम्स से महज 500 मीटर की दूरी पर है।

पुरातन सिद्धपीठ हनुमान मंदिर का नव-निर्माण करीब दस वर्ष पहले पूर्व उप-महापौर विजय कुमार भगत द्वारा कराया गया था जो वर्तमान में इस मंदिर के प्रमुख ट्रस्टी हैं। तीन वर्ष पूर्व विजय कुमार भगत ने बलभद्र भगवान की मूर्ति स्थापित करवाई थी। उसी समय यह तय हो गया था कि मंदिर परिसर में भगवान सहस्रबाहु की मूर्ति भी स्थापित की जाएगी ताकि संपूर्ण कलचुरी समाज की एकजुटता की मिसाल कायम हो सके, और अब आकर भगवान सहस्रबाहु अर्जुन की मूर्ति स्थापित हुई है।

मंदिर में भगवान सहस्रबाहु की मूर्ति वृंदावन के कलचुरी संत श्री हरिहरदासजी महाराज द्वारा भेंट की गई है। पूर्व में सामाजिक कार्यकर्ता रहे संत श्री हरिहरदासजी महाराज जिनकी पूर्व पहचान श्री हरीशचंद्र धनेटवाल के रूप में रही है, जयपुर से आते हैं और राजस्थान प्रशासनिक सेवा में अधिकारी रह चुके हैं। अब वानप्रस्थी संत श्री हरिहरदासजी महाराज ने अपने जीवन में भगवान सहस्रबाहु की 11 प्रतिमाएं स्थापित कराने का संकल्प लिया है औऱ इस क्रम में यह तीसरी प्रतिमा है। इससे पूर्व जयपुर औऱ प्रयागराज में वह भगवान सहस्रबाहु की प्रतिमा स्थापित करा चुके हैं।
पुरातन मंदिर में मूर्ति स्थापना एवं प्राण-प्रतिष्ठान के लिए वैदिक रीत से पूजा-पाठ का क्रम 12 फरवरी से आरंभ हुआ। 14 फरवरी से 24 घंटे का अखंड श्री हरि कीर्तन एवं रामायण यज्ञ पाठ शुरू हुआ और मुख्य अनुष्ठान 15 फरवरी को संपन्न हुआ। मंदिर में भगवान सहस्रबाहु के अलावा लक्ष्मीनारायण भगवान (माता लक्ष्मी औऱ श्री नारायण भगवान) की मूर्तियां भी स्थापित की गई। सभी अनुष्ठान श्री विजय कुमार भगत के पुत्र श्री नीतीश कुमार भगत एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती मानसी भगत ने मुख्य जजमान के रूप में संपन्न कराए।

कार्यक्रम में पश्चिमी चंपारण (बिहार) के सांसद डा. संजय जायसवाल, राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ममता कुमारी भगत, जायसवाल समाज दिल्ली के अध्यक्ष एवं अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के राष्ट्रीय महासचिव शैलेंद्र जायसवाल एडवोकेट, महिला अध्यक्ष श्रीमती मीनाक्षी जायसवाल, वरिष्ठ समाजसेवी श्री गोविंद प्रसाद जायसवाल, भारतीय कलचुरी जायसवाल संवर्गीय महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजीव जायसवाल, राष्ट्रीय सचिव महिला श्रीमती पुष्पलता जायसवाल, श्रीमती मधुबाला शिवहरे, हैहय कलचुरी महासभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष महिला श्रीमती पूनम चौधरी, अ.भा.जा. सर्व. महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष (प्रचार) विष्णु शिवहरे (झांसी), राष्ट्रीय महासचिव आदित्य वर्धनम, आइका के राष्ट्रीय महासचिव किशोर भगत, जयभद्र फाउंडेशन के अध्यक्ष रवि जायसवाल, अ.भा.जा.सर्व.महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजू जायसवाल, रश्मि राय चौकसे एवं पवनी जायसवाल (गुरुग्राम) समेत विभिन्न संगठनों एवं संस्थाओं के महासभा के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।

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