प्रयागराज।
वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से ।
वो और थे जो हार गए आसमान से।।
एक-दो नहीं, लगातार पांच बार की नाकामी भी शिवानी जायसवाल के इरादों को डिगा नहीं सकीं, और अंततः छठवें प्रयास में उन्होंने भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) अधिकारी बनने का अपना लक्ष्य हासिल कर ही लिया। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओऱ से बीते दिनों ‘आईएसएस’ परीक्षा का परिमाण घोषित किया गया तो शिवानी की खुशी का ठिकाना न रहा। इस कठिन परीक्षा में देशभर से मात्र 35 अभ्यर्थियों का चयन हुआ जिसमे शिवानी 19वें स्थान पर रहीं।

प्रयागराज में कीडगंज निवासी श्री विजय कुमार जायसवाल एवं श्रीमती रश्मि जायसवाल की होनहार पुत्री सुश्री शिवानी जायसवाल इन दिनों राजस्थान मे सहायक-सांख्यिकी अधिकारी के पद पर काम कर रही है, जिस पर उनका चयन राजस्थान लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से 2020 में हुआ था। शिवानी की ताजा सफलता की पूरे प्रयागराज में चर्चा है। महापौर गणेश केसरवानी ने शिवानी के घर जाकर उन्हें और उनके परिवारीजनों को बधाई दी।

जाशिवानी जायसवाल की पढ़ाई-लिखाई प्रयागराज से ही हुई है। वर्ष 2010 में क्रास्थवेट गर्ल्स कॉलेज से 79.4 प्रतिशत अंकों के साथ इंटरमीडियेट किया, एविंग क्रिश्चियन कॉलज से बीएससी और 2015 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से सांख्यिकी में एमएससी किया जिसके बाद सांख्यिकी सेवा को अपना लक्ष्य बनाते हुए तैयारी शुरू कर दी। इस दौरान उन्होंने कई अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं भी दीं, इनमें से कई में वह इंटरव्यू तक पहुंचीं लेकिन कामयाबी नहीं मिली। 2020 में पहली सफलता मिली जब राजस्थान लोक सेवा आयोग की परीक्षा के माध्यम से उनका चयन सहायक सांख्यिकी अधिकारी के पद पर हुआ। शिवानी ने ये जॉब तो ज्वाइन कर ली लेकिन आईएसएस की परीक्षा की तैयारी जारी रखी।

शिवानी ने आईएसएस परीक्षा के पहले पांच प्रयासों में सफलता नहीं मिली। हालांकि इनमें से चार प्रयासों में वह इंटरव्यू तक पहुंचीं। लेकिन शिवानी ने हिम्मत नहीं हारी और अंततः छठवें प्रयास में कामयाबी मिल ही गई। शिवानी जायसवाल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को धैर्य औऱ हिम्मत कमजोर नहीं पड़ने देने की सलाह देती हैं। वह कहती हैं कि असफलता से हताश होने की जरूरत नहीं, बल्कि अपनी गलती को पहचानना और सबक लेना चाहिए। उनका कहना है कि यूपीएसई की आईएएस या आईएसएस जैसी परीक्षाओं में पूरा सिलेबस तैयार करना होता है, ऐसे में शॉर्टकट से बचना चाहिए।
बता दें कि यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तरह आईएसएस परीक्षा भी तीन चरणों वाली प्रक्रिया है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा औऱ साक्षात्कार के चरण होते हैं। अंतिम चयन मुख्य परीक्षा औऱ साक्षात्कार में अभ्यर्थियों के कुल अंकों के आधार पर होता है। भारतीय सांख्यिकी सेवा भी दरअसल भारत सरकार की ग्रुप ‘ए’ सिविल सेवा है। इन अधिकारियों का मुख्य काम विभिन्न सरकारी विभागों औऱ मंत्रालयों केलिए सांख्यिकीय सर्वेक्षणों और डेटा विश्लेषण को तैयार करना, संचालित करना और उनकी व्याख्या करना होता है। आर्थिक नीतियों के मूल्यांकन और राष्ट्रीय सांख्यिकीय तंत्र को बनाए रखने में इनकी अहम भूमिका निभाते हैं। आईएसएस अधिकारी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन काम करते हैं और लगभग सभी प्रमुख मंत्रालयों औऱ विभागों में इनकी तैनाती होती है।












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