February 16, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार समाज

मां की ‘अमर-स्मृति’ है शिव-शक्ति मंदिर; महाशिवरात्रि पर विधि-विधान से हुआ लोकार्पण; दर्शन को उमड़े शिवहरे समाजबंधु; विनय गुप्ता ने माना आभार

आगरा।
राधाकृष्ण मंदिर के पूर्व अध्यक्ष श्री विनय गुप्ता ने महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर अपनी पूज्यनीय माताजी स्व. श्रीमती राजकुमारी गुप्ता (पत्नी स्व. श्री कैलाशचंद्र गुप्ता) की स्मृति में बनवाए ‘शिव-शक्ति मंदिर’ का पूर्ण विधि-विधान से लोकार्पण किया।

श्री विनय गुप्ता ने यह मंदिर सिकंदरा स्थित नीरव निकुंज फेस-1 में अपनी फैक्ट्री के बाहरी हिस्से में बनवाया है, जो मां के सम्मान और पारिवारिक मूल्यों की प्रेरणादायी मिसाल है। कार्यक्रम में श्री विनय गुप्ता के परिवारीजनों, संबंधियों और शिवहरे समाजजनों के साथ ही आसपास की कालोनियों एवं अपार्टमेंट्स में रहने वाले श्रद्धालु भी खासी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने मंदिर में नवस्थापित शिव-दरबार एवं शीतला माता के दर्शन कर फलहारी ग्रहण की। श्री विनय शिवहरे के पुत्र श्री सक्षम गुप्ता एवं पुत्री श्रीमती पंखुड़ी शाह ने आगंतुकों का स्वागत किया।

महाशिवरात्रि के महापर्व पर सुबह से ही मंदिर में शिव-दरबार, शीतला माता और शिव-पार्वती की मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए पूजा-पाठ शुरू हो गया था, जिसे श्री विनय गुप्ता संग उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ममता गुप्ता ने संपूर्ण विधि-विधान से संपन्न कराया, जिसके पश्चात हवन-यज्ञ के साथ मंदिर का विधिवत लोकार्पण किया गया।

लोकार्पण के पश्चात सभी ने मंदिर में विराजमान शिव-दरबार, शीतला माता औऱ शिव-पार्वती के दर्शन किए। सफेत संगरमर से तैयार स्वरूपों की सुंदरता से सभी अभिभूत नजर आए। मंदिर में शिवलिग को अमरकंटक में नर्मदा नदी से मंगवाया गया है, लिहाजा इनका नामकरण नर्मदेश्वर महादेव के रूप में किया। शिवदरबार की अन्य मूर्तियां जयपुर से तैयार कराई गई हैं। मंदिर के ठीक बाहर श्री विनय गुप्ता ने पितृ-स्थान के रूप में संगमरमर का एक सुंदर चबूतरे का निर्माण कराया गया है।

श्री विनय गुप्ता ने शिव-परिवार की प्राण-प्रतिष्ठा एवं मंदिर लोकार्पण समारोह में पधारे सभी शिवहरे समाजबंधुओं का हार्दिक आभार व्यक्त किया है जो महाशिवरात्रि महापर्व के उपवासी होने पर भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को उनके लिए अविस्मरणीय बना दिया। उन्होंने कहा कि ये मेरे जीवन के सबसे भावनात्मक पल थे, क्योंकि मुझे उस मंदिर का लोकार्पण करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसकी नींव मां ने रखी थी। यह मां का सपना था जो उनके आशीर्वाद और प्रभु की कृपा से अब आकर साकार हो गया।

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