इंदौर/खरगौन।
एक सड़क हादसे का शिकार हुए विजय जायसवाल का दिल उनकी मौत के बाद भी धड़क रहा है, किसी और के सीने में। लीवर और किडनी भी तीन अलग-अलग लोगों को प्रत्यारोपित कर दी गई हैं। इस तरह विजय जायसवाल के परिवार के एक साहसिक निर्णय ने चार लोगों को नई जिंदगी देकर उनके परिवारों में खुशियां बिखेर दी हैं।। विजय के परिवार के इस निर्णय की सभी लोग सराहना कर रहे हैं। प्रशासन की ओर से विजय जायसवाल को शासकीय सम्मान में ‘ गार्ड ऑफ ऑनर’ के साथ अंतिम विदाई दी गई।
खरगोन की गोविंद शिंदे कालोनी निवासी विजय जायसवाल (49 वर्ष) नगर में ही ‘राजा का होटल’ नाम से एक रेस्टोरेंट चलाते थे। बीती 17 फरवरी को विजय बड़वानी से खरगोन आ रहे थे, रास्ते में पीछे से आ रही एक इको गाड़ी ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। हादसे में विजय बुरी तरह घायल हो गए। परिवारीजन उन्हें गंभीर हालत में इंदौर के ‘विशेष ज्यूपिटर हॉस्पिटल’ ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। अस्पताल के चिकित्सकों ने विजय के ब्रेन डेड होने की जानकारी सामाजिक संस्था ‘मुस्कान ग्रुप’ को दी जो अंगदान के क्षेत्र में काम करती है। मुस्कान ग्रुप के पदाधिकारियों ने तत्काल विजय के परिवारीजनों से संपर्क कर उनके अंगदान कराने का प्रस्ताव दिया।

विजय जायसवाल के बड़े भाई विनोद जायसवाल ने शिवहरेवाणी को बताया कि मुस्कान ग्रुप के प्रस्ताव पर हम परिवारीजनों ने विमर्श किया। परिवार का यही सोचना था कि विजय ब्रेनडेड है औऱ डाक्टर जवाब दे चुके हैं। हम विजय को बचा तो नहीं सकते लेकिन उनके अंगदान कराकर किसी की जिंदगी दे सकते हैं। विजय की पत्नी श्रीमती आराधना जायसवाल, पुत्र प्रथमेश जायसवाल और पुत्री सुश्री प्रिया के लिए यह सबसे मुश्किल फैसला था लेकिन उन्होंने हिम्मत जुटाकर इसके लिए अपनी स्वीकृति दे दी।

‘मुस्कान ग्रुप’ के पास जरूरतमंदों की प्राथमिकता सूची तैयार थी, जिसके आधार पर विजय का हार्ट अहमदाबाद के ‘मरेन्गो सिम्स अस्पताल’ में भर्ती एक महिला को दिया जाना था, इंदौर के ही ‘चोइथराम अस्पताल’ में उपचार करा रहे एक मरीज को किडनी देनी थी, जबकि लीवर और एक किडनी विशेष ज्यूपिटर अस्पताल में ही भर्ती दो मरीजों को प्रत्यारोपित किए जाने थे। विजय के शरीर से अंग निकालने और बिना समय गंवाए उन्हें भेजने की प्रक्रिया ‘राज्य अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन’ (SOTTO) देखरेख और समन्वय में शुरू हुई।

इसके लिए पुलिस और प्रशासन के सहयोग से दो विशेष ग्रीन कोरिडोर बनाए गए। पहला ग्रीन कॉरीडोर रात 10:15 बजे बनाया गया जिससे विजय के हार्ट को ज्यूपिटर अस्पताल से अहिल्याबाई एयरपोर्ट ले जाया गया जहां एक विशेष विमान अहमदाबाद के लिए उड़ाने भरने को तैयार खड़ा था। पुलिस की मुस्तैदी के चलते यह दूरी महज 15 मिनट में कवर हो गई, और विशेष विमान विजय का हार्ट लेकर तत्काल अहमदाबाद के लिए रवाना हो गया। इसके बाद रात 10:45 बजे एक और ग्रीन कॉरिडोर बनाकर विजय की एक किडनी को चोइथराम अस्पताल पहुंचाया गया। विजय का लीवर और एक किडनी का प्रत्यारोपण इंदौर के ही ज्यूपिटर अस्पताल में ही उपचार करा रहे दो अलग-अलग मरीजों को किया गया।

अगले दिन शासकीय सम्मान के साथ विजय जायसवाल को अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार से पूर्व पुलिसकर्मियों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान जिले के प्रमुख पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। विजय के भाई विनोद जायसवाल और विशाल जायसवाल ने शिवहरेवाणी से बातचीत में कहा कि हमारा भाई हमारे परिवार और समाज का नाम रोशन करके गया है। उन्होंने बताया कि विजय के हार्ट, किडनी और लीवर निर्धारित व्यक्तियों को प्रत्यारोपित कर दिए गए हैं और ये सभी प्रत्यारोपण पूरी तरह सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि परिवार इन सभी लोगों से मिलना चाहेगा, जिन्हें उनके भाई विजय के अंगों से नया जीवन मिला है। विजय की पत्नी श्रीमती आराधना का कहना है कि “मेरे पति के ऑर्गन डोनेशन से चार परिवारों के गंभीर रूप से बीमार सदस्यों की जान बच जाएगी, इसी भावना के साथ हमने उनके ऑर्गन डोनेट करने का फैसला किया।‘ विजय जायसवाल के पुत्र प्रथमेश जायसवाल ग्रेजुएशन की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षओं की तैयारी कर रहे हैं, वहीं प्रिया अभी 12वीं कक्षा में है।












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