आगरा।
कैसे होती है शब की सहर.., देखते
काश हम भी कभी जाग कर देखते
सोना और जागना तो उनकी भी रोज की चर्या है, लेकिन ‘जाग कर देखना’ एक ऐसा ख्वाब है जिसे उन्होंने अपनी पलकों पर सजा रखा है। इस रंग-बिरंगी दुनिया को वे देख भले नहीं सकते लेकिन अपनी आंखों की बेनूरी पर रोने के बजाय अहसास को मंजर बनाकर, लम्स को आंखें बनाकर, वे जी रहे हैं एक सामान्य जीवन, हमारी और आपकी तरह।
कीठम स्थित सूरकुटी अंध विद्यालय के ये दृष्टिहीन बच्चे किसी की दया या कृपा के मोहताज नहीं है, बल्कि सच तो यह है कि यहां आने वाले लोग इनसे जिंदगी का हौसला और सबक लेकर ही लौटते हैं, अपने हालात से बेजार कोई शख्स आए तो आंखों में उम्मीद की चमक लेकर लौटेगा। इन स्पेशल बच्चों के साथ बाल दिवस मनाने सूरकुटी अंध विद्यालय पहुंची शिवहरे सशक्त महिला मंडल की महिलाएं भी ‘आशावाद’ का रिटर्न गिफ्ट लेकर लौटीं हैं। शिवहरे महिलाओं ने सूरकुटी के दृष्टिहीन बच्चों के साथ करीब दो घंटे बिताए। उनसे खूब बात की, सवाल किए, उनकी जिंदगी और परेशानियों के बारे में जाना। पता चला कि बे-नजर ये बच्चे बेखबर तो बिल्कुल नहीं हैं। इन्हें सब पता है, और हर वह जानकारी रखते हैं, जिसकी अपेक्षा किसी सामान्य बच्चे से की जा सकती है।
महिलाओं ने ‘ब्रेल लिपि’ की पाठ्य-पुस्तकों के बारे में जानकारी ली, और जाना कि किस प्रकार ये बच्चे अपनी उंगली के लम्स (स्पर्श) से ब्रेललिपि के अक्षरों, शब्दों और वाक्यों को पहचान करते हैं, या कहें कि पढ़ते हैं। शुरु-शुरू में झिझक रहे बच्चे मिनट-दर-मिनट खुलते गए और फिर महिलाओं से खुलकर ‘मन की बात’ की। सबके अपने-अपने सपने थे, कोई बड़े होकर अधिकारी बनना चाहता था, तो कोई म्यूजिशियन..। किसी को गाने का शौक, तो कोई गीत-गजलों का शौकीन। हर बच्चे की अपनी-अपनी अभिरुचि थी, लेकिन सबने अपना एक ही लक्ष्य बताया- आत्मनिर्भर बनना है।
महिलाओं ने प्रधानाचार्य से बात कर विद्यालय की मौजूदा सुविधाओं के बारे में औऱ कमियों की जानकारी ली। इस दौरान टी-टाइम होने पर महिलाओं ने विद्यालय की कैंटीन में बच्चों को नाश्ते के पैकेट भी दिए। शिष्टमंडल में शिवहरे सशक्त महिला मंडल की अध्यक्ष कविता रवि गुप्ता, कंचन गुप्ता, भावना गुप्ता, शैलजा गुप्ता, शिल्पी शिवहरे, सुनीता शिवहरे, मणि अंकित शिवहरे, प्रिया गुप्ता शामिल रहीं। कविता गुप्ता ने इस उपयोगी और प्रेरणादायी कार्यक्रम में सहयोग के लिए श्री सरजू गुप्ता ‘काकेभाई’ का विशेष आभार व्यक्त किया।
ये बेनजर हैं मगर बेखबर नहीं; शिवहरे सशक्त महिला मंडल ने सूरकुटी अंध विद्यालय के स्पेशल बच्चों संग सेलिब्रेट किया बाल-दिवस
