आगरा।
चैत्र पूर्णिमा भगवान शिव के रुद्रावतार हनुमानजी की भक्ति, शक्ति औऱ समर्पण के गुणगान का पावन दिन होता है। माता अंजनी और केसरी के लाल हनुमानजी का जन्म लगभग 85 लाख 58 हजार 112 वर्ष पूर्व त्रेता युग में चैत्र पूर्णिमा के दिन चित्रा नक्षत्र और मेष लग्न में हुआ था। इस उपलक्ष्य में 02 अप्रैल को शिवहरे समाज अपनी धरोहर राधाकृष्ण मंदिर में सुख-समृद्धि एवं अटूट साहस के स्वामी हनुमानजी का जन्म महोत्सव मनाने जा रहा है।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 2 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से हनुमान-भक्त ‘राम’ (श्री कुलभूषण गुप्ता रामभाई) अपने मधुर-कंठ से सुर-ताल में लयबद्ध सुंदरकांड की संगीमयी प्रस्तुति से रामभक्त हनुमान का गुणगान करेंगे, जिसके समापन के बाद दिव्य भोग-प्रसादी का वितरण होगा। कार्यक्रम आयोजक ‘राधाकृष्ण मंदिर प्रबंध समिति’ के अध्यक्ष श्री अऱविंद गुप्ता ने अपनी कार्यकारिणी की ओऱ से सभी शिवहरे समाजबंधुओं से कार्यक्रम में सपरिवार पधारकर सुंदरकांड का श्रवण कर बाबा की भोग-प्रसादी ग्रहण करने का आग्रह किया है।

आपको बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं राधाकृष्ण मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष श्री कुलभूषण गुप्ता रामभाई आगरा और आसपास के क्षेत्र में सुंदरकांड की प्रस्तुति के लिए विख्यात हैं। खास बात यह है कि रामभाई अपनी प्रस्तुति की लय नए लोकप्रिय गीत-संगीत के अनुसार बदलते रहते हैं, जिसके चलते उनकी प्रस्तुति में श्रद्धालु-श्रोताओं को हर बार कुछ नया रस मिलता है। वह कई बड़े मंचों पर प्रस्तुति दे चुके हैं, जिनमें कई प्रस्तुतियों का सीधा प्रसारण कुछ लोकप्रिय यूट्यूब चैनलों और धार्मिक चैनलों पर भी हुआ है।

हनुमानजी के प्रति रामभाई की आस्था उनके अंतर्मन में इतनी गहरी है कि अपनी कारोबारी व्यस्तताओं को भी दरकिनार कर सुंदरकांड के लिए समय निकाल ही लेते हैं। हर मंगलवार औऱ शनिवार को उनकी भारी डिमांड रहती है, कई बार तो एक-एक दिन में तीन-तीन जगह सुंदरकांड प्रस्तुत करना पड़ जाता है। रामभाई का कहना है कि सुंदरकांड की प्रस्तुति से उन्हें जो आत्मिक शांति औऱ संतोष मिलता है, वह इस भौतिक-जगत में अपने आपमें एक दुर्लभ अनुभव है।
सुंदरकांड दरअसल तुलसी रचित रामचरितमानस का पंचम सोपान है जो हनुमानजी की लंका यात्रा, उनके साहस, बुद्धि-चातुर्य और भगवान राम की अटूट-भक्ति का वर्णन करता है। यह महज एक मान्यता ही नहीं, बल्कि हजारों-लाखों लोगों के अनुभव की बयानी है कि सुंदरकांड के पाठ से मानसिक शांति प्राप्त होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है, जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और दरिद्रता दूर होती है। इसके चलते इसे संकटमोचन कांड भी कहा जाने लगा है। इस तरह देखें तो हनुमानजी के जन्मदिवस पर सुंदरकांड के श्रवण से बेहतर उनकी कोई और उपासना हो ही नहीं सकती। औऱ, अगर वाचन रामभाई कर रहे हों, तो जाना बनता ही है। रामभाई का कहना है कि इस बार कुछ अलग औऱ नए तरीके से सुंदरकांड की प्रस्तुति देंगे।












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