टीकमगढ़/भोपाल/अहमदाबाद।
भारत ने बीते दिनों पेरिस में हुए पैरालंपिक खेलों में 29 पदक जीतकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया जिसमें अभूतपूर्व सात स्वर्ण, नौ रजत और 13 कांस्य पदक शामिल हैं। रायफल शूटिंग कोच जीवन राय की सिखाईं दो महिला शूटर्स ने इस पैरालंपिक में दो पदक हासिल किया, अवनि लेखरा ने गोल्ड जीता तो मोना अग्रवाल ब्रॉंज लेकर लौटी हैं।
पेरिस में इतिहास रचकर भारत का 84 सदस्यीय पैरालंपियन दल अपने कोच के साथ स्वदेश लौटा तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे मुलाकात की। अवनि लेखरा ने पीएम मोदी के साथ फोटो खिंचवाई और अपनी सफलता का श्रेय कोच जीवन राय को दिया। शिवहरेवाणी से बातचीत में जीवन राय ने कहा कि पेरिस पैरालंपिक में अवनि के गोल्ड और मोना को ब्रांज को वह अपने अब तक के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में करेरा ब्लॉक के ग्राम खरो में एक कलचुरी परिवार में जन्मे और पले-बढ़े जीवन राय वर्तमान में अहमदाबाद की एक प्राइवेट एकेडमी ‘गन फॉर ग्लोरी’ में रायफल शूटिंग के कोच हैं। उनके ट्रेंड किए शूटर्स पहले भी पैरालंपिक और पैरा एशियन गेम्स में हिस्सा ले चुके हैं।
जीवन राय रायफल शूटिंग में आने को संयोग ही मानते हैं। पिता श्री राजबहादुर राय पेशे से किसान हैं और गांव में ही खेती करते हैं। बड़े भाई पवन राय की गांव में मेडिकल शॉप है। जीवन राय की प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा गांव में ही हुई, और इसके बाद 2006 में उन्होंने बुंदेलखंड यूनीवर्सिटी झांसी में ग्रेजुएशन में दाखिला लिया। वैसे तो जीवन राय हॉकी के खिलाड़ी रहे लेकिन झांसी में बीपीएड करने के दौरान पहली बार उन्होंने इंटर-यूनीवर्सिटी गेम्स में रायफल शूटिंग में पार्टिसिपेट किया, और ऑलइंडिया 43वीं रैंक हासिल की। इसके बाद जीवन राय ने रायफल शूटिंग स्पर्धाओं में पार्टिसिपेट करना शुरू किया। जीवन में पोस्ट ग्रेजुएट (एम.पीएड) की पढ़ाई के लिए ग्वालियर की जीवाजी यूनीवर्सिटी में दाखिला लिया। यहां से उनका सलेक्शन एमपी एकेडमी भोपाल में हो गया। इस दौरान वह रायफल शूटिंग की नेशनल स्पर्धाओं में भाग लेते रहे और कामयाबी हासिल करते रहे।
2016 में उनका सलेक्शन राजकोट (गुजरात) की एक स्पोर्ट्स एकेडमी में कोच के रूप में हो गया और एक साल बाद अहमदाबाद की स्पोर्ट्स एकेडमी गन फॉर ग्लोरी में कोच बन गए। यहां उन्हें राष्ट्रीय स्तर के पैरा खिलाड़ियों को ट्रेंड करने का मौका मिला। जीवन राय बताते हैं कि पैरा-प्लेयर्स को कोच करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण काम होता है। उनके साथ मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और तकनीकी तौर पर कहीं अधिक प्रयास करने होते हैं और उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके कई पैरा शूटर्स राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कामयाबी हासिल कर चुके हैं। 2023 में एशियाई पैरा गेम्स में अवनि लेखरा और सिद्धार्थ बाबू ने गोल्ड जीता था, अब 2024 के पैरालंपिक गेम्स में भी अवनि ने अपनी कामयाबी को दोहराया। जीवन राय कहते हैं कि वह कोच के रूप में अपने काम को एंजॉय करते हैं और आगे भी इंटरनेशनल गेम्स में गोल्ड जीतकर देश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को तैयार करते रहेंगे।
36 वर्षीय जीवन राय का विवाह गत वर्ष भोपाल की प्रियंका राय से हुआ है जो खुद भी बॉस्केटबॉल की खिलाड़ी रही हैं और वर्तमान में मध्य प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर पद पर हैं। वह भोपाल के जहांगीराबाद थाने में पोस्टेड हैं।
रायफल कोच जीवन राय ने पेरिस पैरालंपिक में देश को दिलाए गोल्ड और ब्रॉंज; मैडल विनर तैयार कर रहा टीकमगढ़ के गांव से निकला निशानेबाज
