आगरा।
दाऊजी मंदिर में 5 अक्टूबर को होने जा रहे मेधावी छात्र-छात्रा समारोह एवं शिवहरे रत्न सम्मान समारोह में बडोदरा की श्रुति गुप्ता (शिवहरे) को स्व. सुश्री प्रियंका गुप्ता स्मृति ‘शिवहरे प्रतिभा सम्मान’ प्रदान किया जाएगा। अभिनेता-निर्देशक आमिर खान की हालिया रिलीज फिल्म ‘सितारे जमीं पर’ में एक छोटी भूमिका निभाने वाली श्रुति गुप्ता की कहानी साबित है कि संवेदनशीलता के साथ अच्छी ट्रेनिंग से न्यूरो डायवर्जेंट बच्चों के जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। श्रुति को ‘प्रतिभा सम्मान’ दरअसल न्यूरो डायवर्जेंट बच्चों के प्रति समाज का नजरिया बदलने की एक पहल है, औऱ उसका जीवन संवारने वाली उसकी मां श्रीमती संचिता गुप्ता को समाज की ओर से सलामी भी।
समझने की बात यह है कि हर इंसान में कुछ खासियतें होती हॆ, तो कुछ खामियां भी होती हैं। संसार में परफेक्ट कोई नहीं है, और कोई एब्नॉर्मल नहीं है। ‘सबके अपने-अपने नॉर्मल हैं।‘ आमिर खान की फिल्म ‘सितारे जमीं पर’ भी यही संदेश देती है, जिसे फिल्म में काम करने वाले न्यूरो डायवर्जेंट बच्चों ने शानदार अभिनय कर साबित भी किया है। वडोदरा की श्रुति गुप्ता (शिवहरे) ने भी इसमें अभिनय किया जो डाउन सिंड्रोम से पीड़ित हैं।
श्रुति के पिता नीरज गुप्ता इमीटेशन ज्वैलरी का बिजनेस करते हैं, मूल रूप से यूपी में टूंडला (फिरोजाबाद) के निकट ‘हट्टा का नगला’ गांव के रहने वाले हैं। जबकि, मम्मी संचिता गुप्ता आगरा में पीपलमंडी निवासी श्री रामबाबू गुप्ता की पुत्री हैं। संचिता गुप्ता कहती हैं कि उन्हें खुशी है कि उनकी बच्ची ने कैमरे के सामने आमिर खान के साथ सहजता से अभिनय किया। उन्होंने बताया कि श्रुति डाउन सिंड्रोम से पीड़ित है लेकिन व्यवहार औऱ बौद्धिक क्षमता के मामले में वह किसी सामान्य बच्चे से ज्यादा पीछे नहीं है। उन्होंने श्रुति को पहले एक साल स्पेशल स्कूल में भर्ती कराया था लेकिन एक साल बाद ही सामान्य स्कूल में उसका दाखिला करा दिया। आज वह इतना कुछ सीख चुकी है कि पिता के बिजनेस में हाथ बंटाती है, कंप्यूटर पर बिल बना लेती है और घर के काम में हाथ भी बंटाती है।
डाउन सिंड्रोम या किसी अन्य कारण से न्यूरो डायवर्जेंट बच्चों के बारे में समाज में गलत धारणाएं हैं, लोग इन बच्चों को ‘पागल’ या ‘मेंटल’ तक कहने में नहीं हिचकते, उनकी क्षमताओं को नजरअंदाज करते हैं। जबकि हकीकत यह है कि न्यूरो डायवर्जेंट बच्चे भी सीख सकते हैं, यह अलग बात है कि उनके सीखने गति कुछ धीमी होती है। संचिता ने बड़े धैर्य से श्रुति की ट्रेनिंग की और धीरे-धीरे इतना कुछ सिखा दिया कि आज वह आत्मनिर्भर जीवन जी रही है। फिल्म की कहानी में न्यूरो डायवर्जेंट बच्चों के जीवन में जो भूमिका उनके कोच आमिर खान की है, श्रुति के असल जीवन में वही भूमिका संचिता ने निभाई है। श्रुति जैसी बच्ची को और संचिता जैसी मां को एक सलाम तो बनता ही है। और, यही वजह है कि शिवहरे समाज एकता परिषद और शिवहरेवाणी ने श्रुति गुप्ता को स्व. सुश्री प्रियंका गुप्ता स्मृति प्रतिभा सम्मान प्रदान करने का निर्णय लिया है।
बता दें कि सुश्री प्रियंका गुप्ता आगरा के शिवहरे समाज की एक उभरती हुई प्रतिभा थीं जो टीवी रियलिटी शो ‘इंडियाज गॉट टेलेंट’ के फाइनल तक पहुंची थीं। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी श्री कुलभूषण गुप्ता ‘रामभाई’ की इस होनहार पुत्री को इस उपलब्धि के लिए मेधावी छात्र-छात्रा समारोह में प्रथम प्रतिभा सम्मान प्रदान किया गया था। लेकिन, 4 नवंबर, 2022 को एक भीषण सड़क हादसे में उनका निधन हो गया, जिसके बाद परिषद की ओर से ‘प्रतिभा सम्मान’ स्व. सुश्री प्रियंका गुप्ता की स्मृति में समर्पित करने का निर्णय लिया था।
क्या होता है डाउन सिंड्रोमः- डाउन सिंड्रोम एक सामान्य आनुवांशिक स्थिति है जो तब होती है जब बच्चे में गुणसूत्र-21 की एक अतिरिक्त प्रति होती है। यानी उसके पास 46 के बजाय 47 गुणसूत्र होते हैं। गुणसूत्र हर मानव कोशिका के अंदर की सरचना है जिसमें डीएनए होता है। ऐसे बच्चों के शरीर और मस्तिष्क का विकास अलग तरह से होता है।
लक्षणः इससे पीड़ित बच्चे शारीरिक रूप से कुछ अलग नजर आते हैं। इनमें ज्यादातर बहच्चों का सिर छोटा, चेहरा चपटा और गर्दन छोटी होती है, आंखों में ढेड़ापन नजर आता है। इन बच्चों में बौद्धिक विकलांगता होती है जो हल्के से लेकर मध्यम तक हो सकती है, इनमें सीखने की क्षमता धीमी होती है। इन बच्चों में थॉयराइड, मोटापा, हृदय दोष, दृष्टि-दोष, श्रवण हानि जैसी शारीरिक समस्याओं का खतरा हमेशा बना रहता है।
उपचारः– डाउन सिंड्रोम का कोई इलाज नहीं है। लेकिन यही शुरुआत में ही समस्या को पहचानकर चिकित्सकीय देखभाल के साथ उपयुक्त ट्रेनिंग दी जाए तो ऐसे बच्चे स्वस्थ और सामान्य तरीके से पूर्ण जीवन जी सकते हैं।
वड़ोदरा की श्रुति गुप्ता को दिया जाएगा स्व. सुश्री प्रियंका गुप्ता स्मृति ‘प्रतिभा सम्मान’; ताकि न्यूरो डायवर्जेंट बच्चों के प्रति बदले समाज का नजरिया; मां ने संवारी बेटी की जिंदगी
