इंदौर।
कलचुरी समाज की जानी-मानी शख्सियत श्री शंकरलाल राय नहीं रहे। वह 79 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार चल रहे थे। इन दिनों इंदौर में अपने पुत्र के यहां थे जहां बुधवार (एक अप्रैल, 2026) की सुबह 9 बजे हार्टअटैक पड़ने से उनका निधन हो गया। जानकारी के मुताबिक, श्री शंकरलाल राय के पार्थिक शरीर को आज शाम भोपाल में हर्षवर्धन नगर स्थित उनके निवास पर लाया जाएगा। गुरुवार सुबह 9 बजे उनकी अंतिम यात्रा भदभदा विश्रामघाट के लिए प्रस्थान करेगी जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
श्री शंकरलाल राय के निधन के समाचार से कलचुरी समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया समूहों और मंचों पर शोक संदेश का तांता लगा है, जो सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान और लोकप्रियता को दर्शाता है। श्री शंकरलाल राय ने बीस वर्ष पूर्व भारतीय स्टेट बैंक से रिटायर होने के बाद अपने आप को सामाजिक सेवा में पूरी तरह समर्पित कर दिया था। और, अंतिम सांस तक कलचुरी समाज की एकता और उत्थान के लिए काम करते रहे। समाज के लिए उनकी भावना को इसी से समझा जा सकता है कि गत माह बहुत बीमार हालत में भी वह भोपाल के रविंद्र भवन में भगवान सहस्रबाहु की महिमा पर आधारित फिल्म ‘जय महिष्मती’ के प्रीमियर शो में पहुंचे थे। तब उनका स्वागत करने वाले वरिष्ठ समाजसेवियों ने सोचा भी नहीं था कि सामाजिक मंच पर यह उनकी अंतिम उपस्थिति साबित होगी। श्री शंकरलाल राय बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह प्रखर वक्ता, लेखक और विचारक थे। साहित्य, कला और खेल में उनकी विशेष अभिरुचि थी। छात्रजीवन में राष्ट्रीय स्तर पर कई वाद-विवाद प्रतियोगिताओं के विजेता रहे। नाट्यमंच के मझे हुए कलाकार थे जिसके लिए कई पुरस्कार भी जीते। क्रिकेट और कबड्डी की प्रदेश स्तरीय स्पर्धाओं में भागीदारी की। एनसीसी में उन्हें सी सर्टिफिकेट हासिल थे औऱ अंडर ऑफीसर के पद का निर्वाह किया। स्नातकोत्तर के दौरान कॉलेज में छात्रसंघ के अध्यक्ष भी।
छात्र-जीवन की इन उपलब्धियों, प्रतिभाओं और अभिरुचियों को उन्होंने अंतिम समय तक अपने अंदर न केवल सहेजे रखा, बल्कि उन्हें संवर्धित भी करते रहे। फिल्म ‘जय महिष्मती’ के निर्माण के दौरान भी वह अपनी बीमार हालत को दरकिनार कर समय-समय पर फिल्म निर्माता एलएन मालवीय औऱ निर्देशक रामशंकर शिवहरे से बात करते, फिल्म निर्माण में प्रगति की जानकारी लेते और अपने सुझाव भी देते थे। फिल्म के ओपनिंग क्रेडिट्स में उनका नाम प्रोडक्शन टीम द्वारा उनकी फिक्र, सुझावों और मार्गदर्शन के लिए उनके प्रति कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है। श्री शंकरलाल राय कलचुरी समाज के कई संगठनों से जुड़े थे। खासतौर पर अखिल भारतीय हैहय कलचुरी महासभा के वह राष्ट्रीय सलाहकार थे और इसके कार्यक्रमों में मंच संचालन की जिम्मेदारी उन्हीं पर रहती थी। महासभा के अध्यक्ष श्री जयनारायण चौकसे ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए इसे समाज के लिए अपूर्णनीय क्षति बताया। उन्होंने कहा कि आज हमने एक सच्चे समाजसेवी औऱ अपने मार्गदर्शक को खो दिया है।
14 सितंबर, 1947 को रायसेन के बरखेड़ा गांव में जन्मे श्री सीएल राय एवं श्रीमती पनिया देवी के पुत्र श्री शंकरलाल राय ने एमए, एलएलबी तक शिक्षा ग्रहण की। भारतीय स्टेट बैंक की सेवा के दौरान वह मध्य प्रदेश के कई जिलों में रहे । वह बैंक की क्रेडिट कमेटी के अध्यक्ष पद तक पहुंचे, जिसका कार्यक्षेत्र संपूर्ण मध्य प्रदेश औऱ छत्तीसगढ़ था। बैंक से रिटायरमेंट के बाद कलचुरी समाज के कई संगठनों और संस्थाओं से जुड़कर समाज के उत्थान के लिए प्रयासरत रहे। इस दौरान उन्होंने भगवान सहस्रबाहु को लेकर पौराणिक उल्लेखों औऱ मान्यताओं के साथ ही कलचुरी समाज के इतिहास पर गहन अध्ययन किया, और अपने लेखों के माध्यम से इस ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया। भगवान सहस्रबाहु को लेकर उनकी प्रश्नोत्तरी इस दिशा में उनके बहुमूल्य योगदान का दस्तावेज है।
श्री शंकरलाल राय ने जीवन के अंतिम वर्षों में एमपी, यूपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कई नगरों में जाकर वहां के कलचुरी समाज संगठनों से संपर्क कर समाज के उत्थान के प्रयासों पर चर्चा की। अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के राष्ट्रीय संरक्षक श्री अशोक जायसवाल, अखिल भारतीय कलचुरी जायसवाल समवर्गीय महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री वीरेंद्र राय, कलचुरी महासंघ की राष्ट्रीय संरक्षक श्रीमती अर्चना जायसवाल, मध्य प्रदेस के कार्यकारी अध्यक्ष श्री किशोर राय, युवा अध्यक्ष श्री पंकज चौकसे समेत तमाम सामाजिक संगठनों औऱ समाजसेवियों ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
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वरिष्ठ समाजसेवी श्री शंकरलाल राय नहीं रहे; कलचुरी समाज में शोक की लहर; भोपाल में 2 अप्रैल को होगा अंतिम संस्कार
- by admin
- April 1, 2026
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- 11 hours ago












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