आगरा।
आगरा के शिवहरे युवाओं ने ‘संकीर्तन क्लब’ नाम से एक ग्रुप बनाया है जो महानगर में संभवतः पहला ‘भजन क्लबिंग’ म्यूजिकल ग्रुप है। ये युवा आधुनिक ‘बीट्स’ और ‘रिदम’ पर भजनों की प्रस्तुतियों से पब-कल्चर से प्रभावित हो रही युवा पीढ़ी को आध्यात्मिकता और पॉजीटिव इनर्जी से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। क्लब आगामी 26 फरवरी को पहली बार आगरा में शिवहरे समाज की धरोहर ‘राधाकृष्ण मंदिर’ में एक भजन-संध्या का आयोजन करने जा रहा है।

क्लब के यश गुप्ता ‘आशु’, रजत गुप्ता, श्यामजी शिवहरे और सोनू गुप्ता ने शिवहरेवाणी को बताया कि राधाकृष्ण मंदिर में आगामी गुरुवार यानी 26 फरवरी को शाम छह बजे से भजन-संध्या का शुभारंभ होगा। उन्होंने बताया कि ‘संकीर्तन क्लब आगरा’ का गठन दो महीने पहले किया था और तब से हींग की मंडी स्थित राम मंदिर और नाई की मंडी में फूल वाला तिराहा स्थित हनुमान मंदिर समेत चार मंदिरों में प्रस्तुति दे चुके हैं। अब अपने (शिवहरे) समाज की धरोहर ‘राधाकृष्ण मंदिर’ में प्रोग्राम करने का सौभाग्य मिला है, जिसे लेकर वे उत्साहित हैं। उन्होंने सभी स्वजातीय युवाओं, महिलाओं औऱ बुजुर्गों को आगामी 26 फरवरी को शाम छह बजे से राधाकृष्ण मंदिर में होने वाली भजन-संध्या में आमंत्रित किया है।

आपको बता दें कि ‘भजन क्लबिंग’ दरअसल आधुनिक संगीत (डीजे, बेस, ड्रम) के साथ पारंपरिक भजनों औऱ कीर्तनों का अनूठा मिश्रण है जो युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय होता नाइटलाइफ ट्रेंड है जहां वे शराब-मुक्त और सात्विक माहौल में आधुनिक संगीत पर आधारित भजन-कीर्तन का आनंद लेते हैं, झूमते हैं। इसे ‘सोल सर्कल’ या ‘स्प्रिचुअल रेव’ के रूप में भी जाना जाता है जो मनोरंज औऱ भक्ति का नया मिश्रण है।

‘संकीर्तन क्लब आगरा’ में फिलहाल कुल सात सदस्य हैं। नार्थ ईदगाह कालोनी निवासी यश गुप्ता ‘आशु’ (पुत्र श्री कुलभूषण गुप्ता ‘रामभाई’) क्लब के मुख्य गायक है और गिटार भी बजाते हैं। जबकि नाई की मंडी निवासी रजत गुप्ता (पुत्र श्री राजीव गुप्ता एडवोकेट) और श्यामजी शिवहरे (पुत्र स्व. श्री विजयभूषण शिवहरे) गायन के साथ ही कार्यक्रम संयोजक की भूमिका में रहते हैं। नाई की मंडी निवासी सोनू गुप्ता (पुत्र श्री धीरज गुप्ता) कोरस में गाते हैं। गुरप्रीत कौर ‘साहिबा’ भजन गाने के साथ ही हारमोनियम पर संगत भी देती है जबकि दो अन्य कोरस में गाते हैं। ढोलक, तबला, ड्रम जैसे तालवाद्यों के कलाकारों को अभी तो बाहर से बुलाना पड़ रहा है। लेकिन भविष्य में इनके कलाकारों को भी क्लब से जोड़ा जाएगा। उन्होंने शिवहरे समाज के प्रतिभाशाली युवा साथिय़ों से, जो संगीत की किसी विधा (गायन या वादन) में हुनर रखते हैं, क्लब से जुड़ने का आग्रह किया है।

क्लब के सदस्यों ने बताया कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु जैसे कॉस्मोपोलिटन सिटीज में ‘भजन क्लबिंग’ का ट्रेंड रुफटॉप तक पहुंच गया है, लेकिन ‘संकीर्तन क्लब आगरा’ ने मंदिरों, और कुछ सामाजिक व धार्मिक आयोजनों पर ही अपना फोकस रखा है। क्लब के कलाकार ‘राधिका गोरी से, ब्रज की छोरी से….’ और ‘दुख भजन मारुति नंदन..’ जैसे पुराने व लोकप्रिय भजनों को नए आधुनिक संगीत के साथ प्रस्तुति देते है। प्रोग्राम करीब सवा दो घंटे तक रहता है। हर कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया जाता है। पहली प्रस्तुति गणेश वंदना की होती है, फिर मुख्य रूप से भगवान राधा-कृष्ण और हनुमानजी के भजनों की प्रस्तुति दी जाती है, साथ ही भगवान राम और भगवान शिवजी के भजन भी गाए जाते हैं।












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