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गणेश कथा सागर-1; भगवान शिव का कंप्टीशन जीते थे गणेशा, तभी होती है सबसे पहले पूजा

by Som Sahu August 24, 2017  Uncategorizedआलेख 157

 

  • गणेश चौथ पर शिवहरे वाणी का विशेष आयोजन, प्रतिदिन पढ़िये गणेशजी के जीवन पर आधारित रोचक कथा

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश चौथ के रूप में पूरे देश में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता रहा है। हालांकि अब महाराष्ट्र में चतुर्थी के बाद 10 दिन तक मनाए जाने वाला गणेशोत्सव पूरे देश में प्रचलित हो गया है। महाराष्ट्र में गणपति उत्सव के मौजूदा स्वरूप की शुरुआत 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने की। हालांकि इससे पहले भी गणपति उत्सव बनाया जाता था पर वह सिर्फ घरों तक ही सीमित था। आज की तरह पंडाल नहीं बनाए जाते थे और ना ही सामूहिक विसर्जन होता था। गणपति की कृपा से शिवहरे वाणी भी इस गणेश चतुर्थी से एक शुभकार्य शुरू करने जा रही है। आज से लेकर आने वाले 11 दिन तक, यानी अनंत चतुर्दशी तक हम गणेशजी की महिमा और महात्म पर आधारित एक रोचक कथा प्रतिदिन प्रस्तुत करेंगे। आइये सबसे पहले हम बताते हैं कि किसी भी शुभकार्य की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जो इस प्रकार हैः-

पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार सभी देवताओं में एक विवाद पैदा हो गया कि धरती पर सबसे पहले किस की पूजा होनी चाहिए। सभी देवता अपने आपको सबसे ऊपर बताने के दावे करने लगे। जब मामला बहुत उलझ गया तो सभी देवतागण भगवान शिव के पास पहुंचे । भगवान शिव ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया। शिव ने कहा कि जो भी देवता पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर मेरे पास सबसे पहले आएगा, धरती पर उसे ही सबसे पहले पूजा जाएगा। सभी देवता अपने-अपने वाहन से ब्रह्मांड का चक्कर लगाने चले गए। लेकिन, भगवान गणेश उन के साथ नहीं निकले। वह अपने माता-पिता यानी शिव-पार्वती के चक्कर लगाकर उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।

जब सभी देवता ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर लौटे तो शिव नेमश्री गणेश को विजेता घोषित कर दिया। इसे निर्णय से सभी देवता हैरान हो गए। तब भगवान शिव ने बताया कि माता-पिता को समस्त ब्रह्माण्ड में सबसे ऊंचा दर्जा दिया गया है। सभी देवता भगवान शिव के फैसले से सहमत हुए। तभी से भगवान गणेश को समस्त देवगणों से पहले पूजे जाने लगा। भगवान गणेश को बुद्धि का देवता भी कहा जाता है। इनकी पूजा माता सरस्वती के साथ की जाती है।

 

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