आगरा।
आगरा में सदरभट्टी स्थित समाज की धरोहर ‘दाऊजी मंदिर’ में 6 जनवरी को सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया है। मंदिर परिसर में अपराह्न 3 बजे से होने वाले इस आयोजन में ‘हनुमानभक्त’ कुलभूषण गुप्ता ‘रामभाई’ सुंदरकांड के सभी तीन श्लोकों, साठ दोहों और 526 चौपाइयों की संगीतमयी प्रस्तुति देंगे। स्नेह-भोज के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
दाऊजी मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री बिजनेश शिवहरे ने सभी समाजबंधुओं को नए साल में ‘सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि’ की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित किया है। उन्होंने शिवहरेवाणी को बताया कि इस धार्मिक आयोजन का उद्देश्य वर्ष 2026 में समाज में आपसी प्रेम, एकता और सदभाव को बढ़ावा देने की मंगल-कामना के साथ किया जा रहा है। सुंदरकांड पाठ के उपरांत प्रसाद वितरण होगा, स्वजनों हेतु स्नेह-भोज की व्यवस्था रहेगी। उन्होंने समाजबंधुओं से अपनी सपरिवार उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने का अनुरोध किया है।
सुंदरकांड ही क्यों
हनुमानजी, माता सीता की खोज में लंका गए थे जो त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकुटाचल पर्वत दरअसल तीन पर्वत थे, पहला सुबैल पर्वत था जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दूसरा था नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे और तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका थी। इसी वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी जो इस कांड की सबसे प्रमुख घटना थी। इसलिए इसका नाम सुंदरकांड रखा गया है।
शुभ है सुंदरकांड का श्रवण
शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड के पाठ का विशेष महत्व है। माना जाता है कि जीवन में ज्यादा परेशानियां हो, कोई काम नहीं बन पा रहा हो या फिर आत्मविश्वास की कमी हो या कोई और समस्या हो तो सुंदरकांड के पाठ से शुभ फल प्राप्त होने लग जाते हैं।
सफलता का मंत्र है सुंदरकांड
माना जाता है कि सुंदरकांड के पाठ में बजरंगबली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है। जो लोग नियमित रूप से सुंदरकांड का पाठ करते हैं, उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं। इसमें हनुमानजी ने अपनी बुद्धि और बल से सीता की खोज की है। इसी वजह से सुंदरकांड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता है।
देता है आत्मविश्वास
वास्तव में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। संपूर्ण श्रीरामचरितमानस भगवान श्रीराम के गुणों और उनके पुरुषार्थ को दर्शाती हैं। सुंदरकांड एकमात्र ऐसा अध्याय है जो श्रीराम के भक्त हनुमान की विजय का है। मनोवैज्ञानिक नजरिए से देखा जाए तो यह आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति बढ़ाने वाला कांड है। सुंदरकांड के पाठ से व्यक्ति को मानसिक शक्ति प्राप्त होती है, किसी भी कार्य को पूर्ण करने के लिए आत्मविश्वास मिलता है।
समाचार
2026 के पहले मंगलवार को हनुमानजी की बल-बुद्धि का गान करेंगे ‘राम’; दाऊजी मंदिर में शाम 3 बजे से सुंदरकांड पाठ और स्नेहभोज
- by admin
- January 5, 2026
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- 3 weeks ago









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