आगरा।
जालौन के योगेशचंद्र शिवहरे उर्फ भानु महाजन को आज 966 दिन हुए घर से निकले, तब से लगातार पैदल चल रहे हैं। अब तक 27 हजार किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर 4 धाम, 7 पवित्र नगरी, 12 ज्योतिर्लिंग और 42 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुके हैं। भानु महाजन इन दिनों आगरा में हैं, बीते रोज उन्होंने विधायक श्री विजय शिवहरे से भेंटकर भारत-यात्रा के अनुभव साझा किए। भानु महाजन की संकल्प शक्ति से अभिभूत श्री विजय शिवहरे ने उन्हें चांदी का मुकुट पहनाकर सम्मानित किया।


भानु महाजन ने धाकरान स्थित ‘ होटल मोती पैलास’ में विधायक श्री विजय शिवहरे से भेंट की। इस दौरान शिवहरेवाणी के संपादक सोम साहू, सुनील शिवहरे ‘पप्पू भाई’ और भानु के आगरा निवासी निकट रिश्तेदार सौरभ गुप्ता भी मौजूद रहे। भानु महाजन ने बताया कि 51 शक्तिपीठों में से वह भारत में 40 और नेपाल में 2 शक्तिपीठ समेत कुल 44 शक्तिपीठों के दर्शन कर चुके हैं। वह आगरा से सीधे लद्दाख के लिए पैदल रवाना होंगे जहां श्रीपर्वत शक्तिपीठ के दर्शन करेंगे, लद्दाख से वह अमरनाथ जाएंगे जहां महामाया शक्तिपीठ के दर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि महामाया शक्तिपीठ के दर्शन के बाद वह गया (बिहार) जाएंगे। अक्टूबर-नवंबर में गया पहुंचकर भारत में अपनी ‘अखंड संपूर्ण भारत अकेले पैदल तीर्थयात्रा’ का विधिवत समापन करेंगे। विधायक श्री विजय शिवहरे ने उन्हें यात्रा में हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है।


यात्रा पूरी करके ही घर लौटंगे
खास बात यह है कि 8 अगस्त, 2022 को घर से पैदल निकले भानु महाजन तब से एक बार भी अपने घर नहीं गए हैं। अभी प्रयागराज से आगरा आए हैं तो रास्ते में औरैया से गुजरे तब भी जालौन नहीं गए। बल्कि, परिवारीजन उनसे मिलने औरैया ही आ गए। घर की स्थिति यह है कि उनका गायत्री मिष्ठान्न भंडार अब बंद हो चुका है। तीनों पुत्र पढ़ाई कर रहे हैं। पत्नी सुमन घर के बाहर ही कई वर्षों से ब्यूटी पार्लर चला रही थीं, जो अब उनके परिवार की आजीविका का आधार बन चुका है। वह न केवल बेटों का पढ़ा रही हैं, बल्कि जरूरत होने पर उन्हें आर्थिक सहायता भी भेजती हैं। उन्होंने कहा कि गया में यात्रा के भारत संस्करण के समापन के बाद घर लौट सकते हैं। क्योंकि भारत से बाहर पाकिस्तान, बांग्लादेश, तिब्बत और श्रीलंका स्थित शक्तिपीठों के लिए उन्हें सरकार से अनुमति लेनी होगी।


परिवार की प्रेरणा और सहयोग से ही हुआ संभव
इतनी लंबी यात्रा के पीछे क्या प्रेरणा रही? इस पर भानु महाजन ने बताया कि उनके मन में अचानक यह भाव उठे थे, लंबे मंथन करने के बाद उन्होंने यात्रा पर निकलने का निर्णय किया। परिवार के लोगों ने पहले तो आपत्ति की लेकिन उन्हें राजी कर ही लिया। एक सवाल पर उन्होंने बताया कि अब तक की यात्रा में वह 30 जोड़ी से अधिक जूते बदल चुके हैं। कई जोड़ी चप्पलें भी बदली हैं। यात्रा में उनके साथ एक पिट्टू बैग होता है जिसमें अंगोछा, अंडर-गारमेंट्स, लोअर, धोती, टी-शर्ट और पानी की बोतल रहती है।


धर्म धंधा बन गया है, मंदिर दुकानें
भानु महाजन ने बताया कि वह जहां भी गए, वहां स्थानीय लोगों ने उन्हें बहुत प्यार और सहयोग दिया। कई ऐसे लोगों से मिले जो आज भी उन्हें फोन कर कुशलक्षेम पूछते हैं। केवल तमिलनाडु में उन्हें हिंदीभाषी होने के चलते कहीं-कहीं परेशानी हुई मगर ऐसे में कुछ तमिलभाषियों ने उनका सहयोग भी किया। आखिरी सवाल, भारत में इतनी लंबी पैदल तीर्थ-यात्रा के अनुभव का निचोड़ क्या रहा, इस सवाल पर भानु महाजन का कहना है कि सनातन को लोगों ने धंधा बना लिया है, मंदिर भी दुकान बन गए हैं।
ऊर्जा भरती है विजय शिवहरे से हर मुलाकात
भानु महाजन ने बताया कि 8 अगस्त, 2022 को वह जालौन से पैदल चले थे और दो दिन बाद आगरा पहुंचे, जहां समाज के मंदिर दाऊजी मंदिर और राधाकृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव में उनका सम्मान किया गया। यह इत्तेफाक है कि दाऊजी मंदिर में उनकी पहली भेंट विधायक श्री विजय शिवहरे से हुई थी, अब यात्रा लगभग पूरी होने वाली तो फिर विधायक श्री विजय शिवहरे से हुई। उन्होंने कहा श्री विजय शिवहरे से हर मुलाकात में उन्हें नई ऊर्जा मिलती है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और तिब्बत भी जाएंगे
भानु महाजन ने बताया कि अमरनाथ की महामाया शक्तिपीठ के बाद उनके सामने बांग्लादेश की 4, पाकिस्तान, तिब्बत और श्रीलंका स्थित एक-एक शक्तिपीठ के दर्शन का लक्ष्य रह जाएगा जो सरकार के सहयोग के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास होगा कि भारतवर्ष की भू-सीमा से जुड़े बांग्लादेश, पाकिस्तान और तिब्बत स्थित शक्तिपीठों के दर्शन भी वह पैदल ही करें, लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिली तो उपलब्ध साधन से ही जाएंगे। चारों ओर समुद्र से घिरे श्रीलंका तक तो पैदल पहुंचा ही नहीं जा सकता। भानु महाजन ने बताया कि उनकी कुल यात्रा लगभग 51 हजार किलोमीटर की रहेगी, जिनमें से 27 हजार किमी से अधिक की दूरी तय कर चुके हैं। उनका टारगेट 5 वर्ष में यात्रा पूरी करने का था, लेकिन यदि उन्हें भारत के बाहर स्थित शक्तिपीठों के दर्शन के लिए सरकार से जल्द अनुमति मिल जो तो आगामी डेढ़ वर्ष में ही यात्रा पूरी कर लेंगे।
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