August 6, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
धरोहर

मंदिर श्री दाऊजी महाराज में इसलिए हनुमान जन्मोत्सव पर जुटेगा शिवहरे समाज

शिवहरे वाणी नेटवर्क
आगरा।
परम रामभक्त, परमवीर, विजितेंद्रीय, सर्वरोगहरा, अंजनिसुत, कपीश्वर, हनूमत, 108 नामधारी हनुमान जी का जन्मोत्सव इस बार 31 मार्च को मनाया जा रहा है। इस अवसर पर आगरा में शिवहरे समाज अपनी प्रमुख धरोहर मंदिर श्री दाऊजी महाराज के ‘सबसे प्राचीन देव’ का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाएगा। केसरीनंदन नए चोले में दर्शन देंगे, सुंदरकांड की लयबद्ध प्रस्तुति वातावरण को भक्तिमय कर देगी।
मंदिर श्री दाऊजी महाराज प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री भगवान स्वरूप शिवहरे ने बताया कि समिति के लिए हनुमान जन्मोत्सव का विशेष महत्व है, इसलिए कि मंदिर के हनुमानजी इसके निर्माण के पहले से यहां विराजमान हैं। सदरभट्टी चौराहे पर मंदिर का निर्माण वर्ष 1893 (तार्किक अनुमान के आधार पर) में हुआ था। इससे पहले इस जगह अखाड़ा हुआ करता था, और मंदिर के हनुमानजी उस अखाड़े में उसी जगह विराजमान थे, जिस जगह आज विराजमान हैं। बीते वर्ष मंदिर में 125वीं जन्माष्टमी मनाई गई थी, और लिहाज से देखें तो हनुमानजी की प्रतिमा कम से कम 150 वर्ष पुरानी ही रही होगी। कुछ लोगों का दावा है कि वह अखाड़ा भी करीब सौ साल पुराना था लेकिन इसका कोई साक्ष्य नहीं है।
अब यदि हम मंदिर के हनुमानजी की प्राण-प्रतिष्ठा को 150 वर्ष पुराना भी मान लें (जो कि कम से कम का अनुमान है), तो भी इस बार इन हनुमानजी के समक्ष 150वां जन्मोत्सव समारोह होगा और यह संख्या विशेष है। लिहाजा आयोजन भी विशेष ही होगा। समिति के अध्यक्ष श्री भगवान स्वरूप शिवहरे ने सभी समाजबंधुओं से अधिक से अधिक भागीदारी से इस समारोह की गरिमा को बढ़ाने का आह्वान किया है।
इस बार हनुमान जन्मोत्सव वैसे भी खास है। वैसे तो हनुमान जन्मोत्सव चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है लेकिन नौ वर्ष बाद यह मार्च में पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस बार आपके पास विशेष अवसर है शुभ मुहूर्त में संकटमोचक की उपासना कर उन्हें खुश करने का। इस बार पूर्णिमा तिथि 30 मार्च  शाम 7 बजकर 35 मिनट से 31 मार्च को शाम 6 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष के मुताबिक, सुंदरकांड का पाठ शाम चार बजे इसी शुभ मुहूर्त में कराया जाएगा जिसके बाद महाआरती और प्रसाद वितरण होगा। 
बता दें कि हनुमान जन्मोत्सव साल में दो तिथियों को मनाया जाता है। पहला चैत्र माह की पूर्णिमा को और दूसरा कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को। चैत्र की पूर्णिमा हनुमानजी की जन्मतिथि के रूप में मनाया जाती है, जबकि दूसरी तिथि विजय अभिनंदन महोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
पौराणिक मान्यता है कि जब हनुमान जी माता अंजनि के पेट से पैदा हुए, तब उन्हें जोर की भूख लग गई थी। वह सूर्य को फल समझ कर खाने के लिए दौड़े। उसी दिन राहू भी सूर्य को अपना ग्रास बनाने के लिए आया हुआ था मगर हनुमान जी को देखकर उन्होंने इसे दूसरा राहु समझ लिया। इस दिन चैत्र माह की पूर्णिमा होने से इस तिथि को हनुमान जयंती के रुप में मनाया जाता है।
वहीं दूसरी तिथि को लेकर मान्यता है कि माता सीता ने हनुमान जी की भक्ति और समर्पण को देखकर उनको अमरता का वरदान दिया। माना जाता है कि वह दीपावली का दिन था।

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क्या दाऊजी मंदिर पुनरुद्धार में योगदान करना चाहते हैं….स्वागत