August 25, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
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सामूहिकता का पर्व है अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा…इसलिये मंदिर आना जरूरी

शिवहरे वाणी नेटवर्क
आगरा।
पंचोत्सव या दीपोत्सव के तीसरे दिन दीपावली पर सभी ने अपने घर और प्रतिष्ठानो में लक्ष्मी पूजन किया, दीप जलाए। आज गुरुवार  को दीपोत्सव के चौथे दिन बारी है अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा की जो सामूहिकता की परंपरा से जुड़ी पूजा  है। घर-परिवार, कुल और समाज, तीनों स्तरों पर यह पर्व मनाने की परंपरा रही है। इसीलिए अन्नकूट और गोवर्धन पूजा के सामाजिक आयोजनों की अनदेखी कर इसके पूर्ण लाभों से वंचित न हों। 

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आगरा में शिवहरे समाज की दोनों धरोहरों मे गुरुवार को अन्नकूट एवं गोवर्धन पूजा का आयोजन किया गया है। सदरभट्टी चौराहा स्थित मंदिर श्री दाऊजी महाराज में सायं 6 बजे से गोवर्धन पूजा होगी, जिसके बाद अन्नकूट का प्रसाद वितरण किया जाएगा। मंदिर श्री दाऊजी महाराज प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री भगवान स्वरूप शिवहरे एवं उनकी कार्यकारिणी ने सभी समाजबंधुओं से समारोह में शामिल होकर धर्मलाभ लेने और स्वादिष्ट अन्नकूट ग्रहण करने का अनुरोध किया है।

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वहीं लोहामंडी में आलमगंज स्थित मंदिर श्री राधाकृष्ण में यह आयोजन सायं 7 बजे से होगा, जिसके उपरांत अन्नकूट प्रसाद वितरित किया जाएगा। मंदिर श्री राधाकृष्ण प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री अरविंद गुप्ता समेत संपूर्ण समिति ने समाजबंधुओं को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट समारोह में भाग लेने की अपील की है। 

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गोवर्धन पूजा की परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है। इससे पहले ब्रज में इंद्र की पूजा की जाती थी। मगर भगवान कृष्ण ने लोगों से कहा कि इंद्र से हमें कोई लाभ नहीं प्राप्त होता। वर्षा करना उनका कार्य है और वह सिर्फ अपना कार्य करते हैं जबकि गोवर्धन पर्वत गौ-धन का संवर्धन एवं संरक्षण करता है, जिससे पर्यावरण भी शुद्ध होता है। इसलिए इंद्र की नहीं गोवर्धन की पूजा की जानी चाहिए।

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इसकी जानकारी होने इंद्र ने भारी वर्षा कर ब्रजवासियों को डराने का प्रयास किया,  लेकिन श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों को उनके कोप से बचा लिया। इसके बाद से ही इंद्र भगवान की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का विधान शुरू हो गया है। 

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सब ब्रजवासी सात दिन गोवर्धन पर्वत की शरण मे रहे। इन सातों दिनों ब्रजवासियों ने गोवर्धन पर्वत के नीचे मिलजुल कर भोजन तैयार किया और सामूहिक रूप से ग्रहण किया। माना जाता है कि भगवान कृष्ण का इंद्र के मान-मर्दन के पीछे उद्देश्य था कि ब्रजवासी गौ-धन एवं पर्यावरण के महत्व को समझें और एकजुट होकर उनकी रक्षा करें। 

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वहीं अन्नकूट शब्द का अर्थ होता है अन्न का समूह। विभिन्न प्रकार के अन्न को समर्पित और वितरित करने के कारण ही इस उत्सव या पर्व को नाम अन्नकूट पड़ा है। अन्नकूट में अन्न और शाक-पक्वानों को भगवान को अर्पित किये जाते है और वह सर्वसाधारण में वितरण किया जाता है। 

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गोवर्धन पूजा घर, परिवार और कुल में तो अनिवार्य रूप से की जाती है, लेकिन इस पूजा का परम उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब हम सामूहिक आयोजनों में भाग लेंगे, पूजा करें और अन्नकूट का प्रसाद का ग्रहण करेंगे। आगरा के शिवहरे समाज का सौभाग्य है कि यहां उसकी दो ऐसी धरोहरें हैं जहां गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट का आयोजन होता है। ऐसे में समाज के सभी बंधुओं के लिए मौका होता है कि इस पूजा में भाग लेकर इसके पुण्य को प्राप्त करें। 

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