पूर्णाहुति आज…भोपाल के कलचुरी समाज ने लिखी सहयोग और सहकार की कथा
शिवहरे वाणी नेटवर्क
भोपाल।
प्रत्येक व्यक्ति का एक परिवार होता है, परिवार का एक कुल और समाज होता है। हर समाज का एक परमपुरुष होता है। इस तरह हर व्यक्ति, कुल और समाज के इतिहास की जड़ें उस दौर में मिलती हैं, जब इतिहास लेखन की परंपरा नहीं थी। महान लोगों की गौरव गाथाएं पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती गईं और हजारों साल बाद लिपिबद्ध हुईं। हम इन्हीं पौराणिक कहानियों में अपने इतिहास की तलाश करते हैं। पुराण अर्थगर्भित कहानियों के संग्रह हैं, जिनमें हमें अपने उदभव, इतिहास, संस्कृति, धर्म और चिंतन के सूत्र मिलते हैं। इन्हीं गौरव-गाथाओं में एक कहानी भगवान श्री सहस्त्रबाहु अर्जुन की भी है, जिसका वाचन इन दिनों भोपाल में करौंद स्थित सिमरन मैरिज गार्डन में संतों की श्रीवाणी से हो रहा है।

गुरुवार 22 नवंबर को पूर्णाहुति के साथ इस तीन दिवसीय श्री सहस्त्रबाहू कथा एवं नौकुण्डीय महायज्ञ का समापन हो जाएगा। कथा के उपरांत 501 दीपक प्रज्वलित कर श्री सहस्त्रार्जुन महाराज का जन्मोत्सव मनाया जायेगा। साथ ही भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

इससे पूर्व कथा के पहले दिन पौराणिक नगरी और आराध्य श्री की राजधानी महिष्मति की महिमा और भगवान श्री सहस्त्रार्जुन की महिमा का विस्तारपूर्वक वर्णल किया गया। दूसरे दिन चंद्रवंश से हैह्यकुल का विस्तार से वर्णन के साथ भगवान श्री सहस्त्रार्जुन जी के जन्म और प्रारब्ध की कथा सुनाई गई। राष्ट्रीय बालसंत श्री शैलेन्द्रकृष्ण शास्त्री महाराज का कथा-वाचन इतना प्रभावपूर्ण और रोचक है कि सिमरन मैरिज गार्डन में शाम 5 बजे से 7 बजे के बीच के दो घंटे कब बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता।

इससे पहले प्रतिदिन सुबह 9 बजे से लेकर अपराह्न 3 बजे तक महायज्ञ चल रहा है जिसमें देशभर से आए कलचुरी बंधु आहुति देकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह महायज्ञ स्वजातीय संत श्री हरिहर दास जी (वृँदावन), श्री विमलांद जी(महोवा), श्री विनोद शास्त्री (हाथरस) और श्री अविनाशानंद जी, (छिंदवाणा) के साथ ही स्वजातीय संत श्री श्री 1008 महामण्डलेश्वर श्री संतोष आनंद जी अवधूत आश्रम हरिद्वार की उपस्थिति में चल रहा है।

आयोजक श्री सहस्त्रबाहू सेवा एवम् उत्सव समिति की ओर से बाहर से आने वाले कलचुरी बंधुओं के रहने की व्यवस्था यहीं पंडालों में की गई है, कुछ अन्य जगहों पर भी लोगों को ठहराया गया है। कुछ लोगों की ठहरने की अपनी व्यवस्था है। पंडाल में प्रसादी एवं भोजन की व्यवस्था 24 घंटे उपलब्ध है।

स्थानीय कलचुरी बंधु आयोजन समिति के साथ जुड़कर तन-मन-धन से व्यवस्थाओं सहयोग कर रहे हैं। कथा सुनकर लौटे कुछ कलचुरी समाजबंधुओं ने शिवहरे वाणी को बताया कि भगवान सहस्त्रबाहु जन्मोत्सव के पावन अवसर पर भोपाल में ऐसा अनोखा कार्यक्रम पहली बार हुआ है, और हम चाहते हैं कि यह परंपरा बन जाए।

इससे पूर्व 17 नवंबर को भोपाल से 70 कलचुरी 12 वाहनों में सवार होकर अखंड ज्योति लेने के लिए महेश्वर धाम गए। 18 नवंबर को वापसी में जगह-जगह समाजबंधुओं ने “अखण्ड ज्योतिदर्शन यात्रा” का स्वागत करने के साथ ही ज्योतिदर्शन कर पूजा अर्चना की।

“अखण्ड ज्योतिदर्शन यात्रा” धामनोद, दौर,देवास,सोनकच्छ,आष्ठा,सीहोर,रातीबण होती हुई भोपाल पहुंची, जहां बसंतकुज स्थित सहस्त्रबाहु मंदिर में बड़ी संख्या में समाजजनों ने धर्मयात्रीयों का भव्य स्वागत किया।













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