शिवहरे वाणी नेटवर्क
प्रयागराज।
प्रयागराज की श्रद्धा गुप्ता (शिवहरे) पीसीएस परीक्षा में कामयाबी हासिल कर खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) बन गई हैं। खास बात यह है कि जूलॉजी से एमएससी कर चुकीं श्रद्धा ने पीसीएस में हिंदी विषय को चुना और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। हालांकि, उनका सपना आईएएस बनने का है, जिसे साकार करने के लिए वह पूरी शिद्दत से तैयारी में जुटी हुई है।
बीते रोज पीसीएस-2018 का रिजल्ट घोषित हुआ तो श्रद्धा और पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना न रहा। आज शनिवार को श्रद्धा ने अपने पिता श्री भोलाराम गुप्ता और माताजी श्रीमती प्रवेश गुप्ता के साथ प्रयागराज के प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर जाकर ईश्वर का आभार व्यक्त किया। श्रद्धा ने कानपुर यूनीवर्सिटी से बीएससी (जूलॉजी) करने के बाद इलाहाबाद यूनीवर्सिटी से इसी विषय से एमएससी किया। इस दौरान पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन के चलते भारत सरकार के विज्ञान विभाग की ओर से छात्रवृत्ति के तौर पर उन्हें हर साल 80 हजार रुपये भी दिए जाते रहे। लेकिन, जब सिविल सर्विस की बात आई तो उन्होंने हिंदी को अपना विषय चुना।

शिवहरेवाणी से बातचीत में श्रद्धा ने बताया, ‘सिविल सेवा की तैयारी के लिए एक ठोस रणनीति बेहद जरुरी होती है। मैं जूलॉजी को चुन सकती थीं लेकिन गुरुजनों से विचार-विमर्श के बाद मैंने हिंदी साहित्य को चुना। इसकी एक वजह तो यह है कि हिंदी साहित्य में मेरा शुरू से रुझान रहा, जिसके चलते हाईस्कूल और इंटरमीडियेट में जिन कवियों और साहित्यकारों और उनकी रचनाओं को मैंने कोर्स में पढ़ा, वह मुझे एमएससी के बाद भी अच्छी तरह याद थीं। दूसरी वजह यह कि हिंदी साहित्य को सिविल सेवा में स्कोरिंग सब्जेक्ट माना जाता है। मुझे लगता है कि मेरी रणनीति कामयाब रही।’
24 साल की श्रद्धा अपने परिवार में पहली पीसीएस अधिकारी नहीं है। उनके चाचा श्री राजीव गुप्ता 1994 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में अमेठी में तैनात है। वहीं छोटे चाचा श्री नीरज गुप्ता भी पीसीएस परीक्षा में कामयाब होकर समीक्षा अधिकारी बने। श्रद्धा ने अपने चाचा को अपनी प्रेरणा बताया जिन्होंने पीसीएस की तैयारी में उसका मार्गदर्शन भी किया। 1996 को जन्मीं श्रद्धा के छोटे भाई आय़ुष ने कंप्यूटर साइंस से एमएससी किया है और हाल ही में एक कालेज में प्रवक्ता पद पर उसकी नियुक्ति हुई है।
श्रद्धा का परिवार मूल रूप से बांदा जिले में जसपुर ब्लॉक के गांव गौरीकलां का रहने वाला है। पिता श्री भोलाराम गुप्ता करीब चालीस वर्ष पहले प्रयागराज आए। वह यहां सेल्समैन का काम करते हैं। वहीं, श्रद्धा की मम्मी श्रीमती प्रवेश गुप्ता कानपुर की रहने वाली हैं। हालांकि श्रीमती प्रवेश गुप्ता का आगरा से भी करीबी रिश्ता है। उनके पिता स्व. श्री सुनहरीलाल शिवहरे आगरा के रहने वाले थे और रेलवे में नौकरी के चलते कानपुर शिफ्ट हो गए थे।












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