शिरडी।
झांसी के जाने-माने समाजसेवी वीरेंद्र राय को सर्वसम्मति ‘भारतीय कलचुरी जायसवाल समवर्गीय महासभा’ से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। शिरडी की पावन भूमि पर हुए महासभा के दो-दिवसीय महाधिवेशन के अंतिम दिन चुनाव के बाद यह घोषणा हुई तो पूरा मंगलम सभागार तालियों और बधाइयों से गूंज उठा। सीधी (म.प्र.) के राकेश जायसवाल को लगातार तीसरी बार महामंत्री चुना गया, जबकि राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के पद पर रायपुर (छत्तीसगढ़) के सूरज प्रसाद जायसवाल निर्वाचित हुए हैं।
14 नवंबर को निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न कराने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी चंद्रप्रकाश शिवहरे (मुरैना) ने वीरेंद्र राय को जीत का प्रमाण पत्र प्रदान किया। सभागार में उपस्थित समाजबंधओं ने इस पर हर्ष व्यक्त करते हुए वीरेंद्र राय को फूलमालाओं से लाद दिया। ‘वीरेंद्र राय’ औऱ ‘बुदेलखंड’ के जोशीले जयकारों से सभागार गूंज उठा। वीरेंद्र राय ने अपने प्रथम अध्यक्षीय संबोधन में निर्वाचन समिति, पदाधिकारियों, आजीवन सदस्यों और सभी उपस्थित समाजबंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए समाजहित के कार्यों में हमेशा तत्पर रहने का भरोसा दिया। अभियान चलाकर अधिक से अधिक समाजबंधुओं को आजीवन सदस्य के रूप में महासभा से जोड़ने और दिल्ली में समाज के एक भवन का निर्माण कराने को अपनी प्राथमिकताओं में शुमार बताया।
बता दें कि अध्यक्ष के रूप में वीरेंद्र राय की घोषणा महज एक औपचारिकता मात्र थी, उनकी ताजपोशी की रूपरेखा तो इस वर्ष मार्च माह में हुए महासभा के हजारीबाग अधिवेशन में ही तय हो गई थी। वर्ष 2017 में हरिद्वार अधिवेशन में नेतृत्व व अधिपत्य के विवाद को लेकर दो-फाड़ हुई संस्था ‘अखिल भारतीय जायसवाल समवर्गीय महासभा’ को बीते वर्ष ही झांसी अधिवेशन में ‘भारतीय कलचुरी जायसवाल समवर्गीय महासभा’ के नए नाम से एकीकृत किया गया था जिसमें वीरेंद्र राय की बहुत अहम और निर्णायक भूमिका रही थी। इसके बाद से ही वह इस ‘एकीकृत’ महासभा के अध्यक्ष पद के मजबूत दावेदार बनकर उभरे थे।
फिलहाल, वीरेंद्र राय के रूप में महासभा को एक लंबे अंतराल के बाद सर्वसम्मत नेतृत्व प्राप्त हुआ है। हालांकि वीरेंद्र राय के लिए यह ताज काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। और, सबसे बड़ी चुनौती दो-फाड़ होकर लगभग निष्क्रिय पड़ी संस्था को उसकी पुरानी प्रतिष्ठा दिलाने की होगी। शिरडी अधिवेशन में मौजूद ज्यादातर लोगों का मानना था कि वीरेंद्र राय के रूप में महासभा को एक कर्मठ, ईमानदार, समर्पित और अनुशासनप्रिय नेतृत्व प्राप्त हुआ है, जो न केवल महासभा को उसकी पुरानी प्रतिष्ठा दिलाएगा, बल्कि समाज और संगठन की एकजुटता व विकास के लिए ठोस कार्यक्रम तैयार कर उस पर अमल करेगा। नए अध्यक्ष के रूप में वीरेंद्र राय के नाम की घोषणा पर लोगों ने जिस जोश के साथ उनका अभिनंदन किया, उसमें कहीं न कहीं यह उम्मीद भी नजर आ रही थी।
यूं तो अधिवेशन में करीब 22 प्रांतों से प्रतिनिधि आए, जिनमें प्रमुख पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में आजीवन सदस्य भी मौजूद थे। लेकिन, झांसी समेत पूरे बुंदेलखंड औऱ ग्वालियर संभाग से इस बार बड़ी संख्या में समाजसेवी पहुंचे थे। झांसी के समाजबंधुओं ने वीरेंद्र राय के निर्वाचन को बुंदेलखंड के गौरव से जोड़ा तो ग्वालियर संभाग के समाजबंधु भी अपने निकट व्यक्ति को नेतृत्व मिलने पर जोश और उत्साह में नजर आए।
महाधिवेशन में झांसी से रामेश्वर राय एडवोकेट, श्रीराम राय, अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष विष्णु शिवहरे, उमाशंकर राय (पूर्व पार्षद), वर्षा राय, सुमन राय, आशा राय, ममता राय, बीडी राय, भरत राय, मुकेश राय (पूर्व पार्षद), देवकी नंदन शिवहरे, करण राय, गिरजाशंकर राय, बृजेंद्र राय, राजकुमार राय, जगमोहन राय, रामबाबू राय, सतीश राय, चंद्रमोहन राय, नीरज जायसवाल, अनिल जायसवाल, वेदप्रकाश जायसवाल, रामेश्वर प्रसाद जायसवाल, अशोक शिवहरे, दिनेश शिवहरे, डा. आरएन राय, बृजेश जायसवाल, शिवम राय, पुष्पेंद्र राय, मनीराम राय, अमन राय (पूर्व पार्षद), अनिल राय, विशाल राय, सुरेंद्र राय (चेयरमैन एसआर ग्रुप), अनूप शिवहरे, रवि राय, सुमित राय, शिवम राय, अतुल गुप्ता समेत खासी संख्या में समाजबंधु आए हुए थे। इसी तरह ग्वालियर से कलचुरी कलार महासभा के अध्यक्ष सुरेशचद्र शिवहरे, महासचिव रघुवीर राय, धौलपुर समाज के अध्यक्ष रवि शिवहरे, धर्मवीर राय, पवन राय, कलचुरी महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष हरिओम राय, ममता राय, अल्का राय, शिवपुरी से महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सीमा शिवहरे समेत कई समाजबंधु भी वहां मौजूद थे।
समाचार
समाज
वीरेंद्र राय को ‘चुनौतियों का ताज’; जोशीले स्वागत के पीछे कई उम्मीदें; ‘एकीकृत’ महासभा को पुरानी प्रतिष्ठा दिलाने की राह आसान नहीं
- by admin
- December 15, 2025
- 0 Comments
- Less than a minute
- 3 months ago












Leave feedback about this