खंडवा।
ख्वाब एक ‘बीज’ है जो मेधा से अंकुरित होता है, और मेहनत व लगन से पल्लवित होकर कामयाबी के फल-फूल देता है। खंडवा की रूपल जायसवाल की कामयाबी की दास्तान का यही सटीक रूपक हो सकता है, जिन्होंने आईएएस बनने का सपना देखा, और 22 लाख के पैकेज की जॉब छोड़कर जुट गई इसे साकार करने में। और, आज अपनी मेहनत, लगन और हार ना मानने के जज्बे के बल पर यूपीएससी परीक्षा में 43वीं रैंक हासिल कर परिवार और समाज का नाम रोशन कर दिया।

देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली यूपीएएसी की ‘सिविल सेवा परीक्षा’ में रूपल जायसवाल का यह तीसरा प्रयास था, और दूसरी कामयाबी। पहले प्रयास की नाकामी से वह विचलित नहीं हुईं, दूसरे प्रयास में उन्होंने 512वीं रैंक हासिल की, लेकिन उनकी निगाह सिर्फ आईएएस बनने के लक्ष्य पर रही। उन्होंने फिर अपनी कमियों को जांचा-परखा, उन पर कड़ी मेहनत कर पूरी तैयारी तीसरी बार परीक्षा अटैंप्ट की। यूपीएससी द्वारा 6 मार्च, 2026 को जारी ‘सिविल सेवा परीक्षा-2025’ रिजल्ट में कामयाब अभ्यर्थियों की सूची में 43वें नंबर पर अपना नाम देख रूपल और उनके परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। रूपल जायसवाल के पिता धनंजय जायसवाल ने शिवहरेवाणी के साथ अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि बिटिया की कामयाबी पर परिवार को लगातार बधाइयां मिल रही हैं। शनिवार को जब शिवहरेवाणी से उनकी बात हो रही थी, उसी समय स्थानीय विधायक कंचन मुकेश तनवे भी उनके यहां बधाई देने आ पहुंची थीं।

रुपल जायसवाल ने बताया कि वह शुरू से ही आईएएस बनना चाहती थी। पुणे के सिंबायोसिस लॉ कॉलेज से बीए-एलएलबी (ऑनर्स) करने के दौरान भी वह इसकी तैयारी करती रहीं। एलएलबी करने के दौरान चौथे वर्ष में ही एक लॉ फर्म में 22 लाख के पैकेज पर उनकी जॉब लग गई। लेकिन, कुछ ही दिन की नौकरी में उन्हें यह लग गया कि नौकरी औऱ तैयारी साथ नहीं चल सकती। लिहाजा आईएएस बनने के सपने को प्राथमिकता देते हुए लॉ फर्म की नौकरी कुर्बान कर दी।

हालांकि रूपल को अपना सपना साकार करने में तीन साल इंतजार करना पड़ा, लेकिन इसका कोई मलाल भी नहीं। नाकामियों से मायूस होने के बजाय उन्होंने हर बार दोगुनी मेहनत के साथ तैयारी की, अपनी कमियों को पहचान कर उन्हें दूर करने पर फोकस किया, जिसका सुखद परिणाम अब आकर मिल ही गया। रूपल ने बताया कि उन्होंने तैयारी के लिए एनसीईआरटी की किताबों, टेस्ट सीरीज और उत्तर लेखन पर ध्यान केंद्रित किया। वह प्रतिदिन 8-9 घंटे पढ़ाई करती थीं, मुख्य परीक्षा के लिए पढ़ाई के समय और बढ़ा दिया।

रूपल अपनी की सफलता के पीछे परिवार का बड़ा योगदान मानती हैं। पहला श्रेय माता-पिता को देती हैं। उनके पिता धनंजय जायसवाल सिविल इंजीनियर हैं और रियल एस्टेट डेवलपर हैं। उन्होंने हर निर्णय में बेटी का साथ दिया और उसकी पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी। मम्मी श्रीमती लता जायसवाल ने भी रूपल को घर के कामों से पूरी तरह दूर रखा और निरंतर पढ़ाई में जुटे रहने के लिए प्रेरित किया। छोटा भाई हर्ष जायसवाल पढ़ाई के लिए जरूरी डॉक्युमेंट्स, किताबें औऱ फोटोकॉपी लाकर उनकी मदद करता रहा। हर्ष जायसवाल सिविल इंजीनियरिंग करने के बाद पिता के कारोबार में हाथ बंटा रहा है। रूपल की बड़ी बहन दीक्षा जायसवाल जयपुर में अपनी ससुराल में रहती हैं। छोटी बहन की सफलता से वह भी बहुत खुश है।
रूपल जायसवाल ने शिवहरेवाणी को बताया कि आईएएस बनना उनका सपना था लेकिन अंतिम लक्ष्य नहीं था। अब एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में देश की सच्ची सेवा करना चाहती हैं, खासकर महिलाओं के अधिकारों व विकास के लिए अवश्य योगदान करना चाहेंगी।












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