लखनऊ।
अखिल भारतीय जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष एवं योग सोशल सोसायटी के राष्ट्रीय संचालक श्री हरिराम जायसवाल की बिटिया की शादी इन दिनों खूब चर्चा में है। लखनऊ में इस विवाह समारोह का हिस्सा बने लोगों के कहना है कि ‘सेहत, संस्कार औऱ सेवा’ का ऐसा अदभुद् संगम पहले किसी शादी में उन्होंने नहीं देखा।
तो चलिये बात शुरू करते हैं ‘स्वाद’ से। समारोह में शुद्ध पारंपरिक व्यंजनों के साथ मेहमानों को ऐसे-ऐसे ‘सुपरफूड’ आइटम भी परोसे गए, जो आपने पहले किसी शादी समारोह में कभी देखे-सुने नहीं होंगे। मसलन, आपने शायद किसी शादी में ‘सी-बक्थॉर्न’ का जूस नहीं देखा होगा। एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर इस शक्तिशाली औषधि के जूस को गुलाब की पत्तियों के साथ तैयार किया गया था, जिसका खट्ट-मीठा स्वाद लोगों को खूब लुभा रहा था। इसी तरह एक स्टॉल ‘गिलोय, सहजन, लौकी और अश्वगंधा’ के हर्बल जूस का भी था। इसी के बगल में एक और ‘शक्तिमान’ हर्बल जूस के स्टॉल पर खासी भीड़भाड़ उमड़ रही थी। यहां मिल रहा था ‘आंवला, एलोवेरा, कोकम’ का मिक्स जूस जो अपने अदभुत स्वाद से लोगों आकर्षित कर रहा था। नारियल पानी और उसकी गिरी से तैयार नारियल कोको समेत कुछ और हर्बल जूस और शेक भी अलग-अलग स्टॉलों पर उपलब्ध थे जो अतिथियों के लिए कौतुहुल का विषय बन गए।

जिज्ञासा और कौतुहुल का ऐसा ही नजारा मिठाइयों के सेक्शन में भी था। यहां पारंपरिक डिशेज तो तमाम थीं लेकिन इनके बीच स्वास्थ्यवर्धक ‘आंवले के लड्डू’, ‘आंवले की बर्फी’ औऱ ‘आंवले की कैंडी’ जैसे मिष्ठान्न मेहमानों को आकर्षित कर रहे थे। हरिराम जायसवाल ने शिवहरेवाणी को बताया कि इन आइटम्स के लिए प्रतापगढ़ के आंवले मंगवाए गए थे। मेन-कोर्स यानी भोजन में लगभग सभी व्यंजन थे तो पारपंरिक ही, लेकिन इन्हें बड़ी शुद्धता और सात्विक तरीके से तैयार किया गया था। हरिराम जायसवाल ने बताया कि भोजन तैयार करने के लिए हमने खुद सरसों खरीदकर उसका तेल निकलवाया था। इली तरह गाय के शुद्ध दूध से अपने सामने घी निकलवाया। पनीर, छैना, खोया जैसी चीजें भी शुद्ध दूध से आंखों के सामने तैयार कराई थीं।

श्री हरिराम जायसवाल एवं श्रीमती मंजू जायसवाल की पुत्री सौ. सिद्धी जायसवाल का विवाह रांची के चि.विशाल संग बीती 20 फरवरी को लखनऊ के डायमंड मैरिज होम में हुआ था। इस भव्य विवाह समारोह के विशाल पंडाल में हर तरफ ‘सनातनी औऱ वैदिक संस्कृति-परंपराओं’ के नजारे थे। चाहे पंडाल की सजावट की बात करें या रीति-रस्मों के तोर-तरीकों की। वरमाला की रस्म आजकल जहां एक महंगा इवेंट बनती जा रही है, वहीं इस शादी में मानो सादगी ही शान बन गई हो। वरमाला के दौरान स्वजातीय संत महामंडलेश्वर श्री संतोषानंदजी महाराज समेत छह महामंडलेश्वरों ने 50 बटुकों यानी बाल-संतों के साथ मंच पर आकर एकसाथ वैदिक मंत्रोंच्चारण कर पूरे वातावरण में पवित्रता बिखेर दी। समारोह के दौरान ही जायसवाल दंपति ने जरूरतमंदों को भोजन एवं वस्त्र वितरण कर सेवाभाव की अनुकरणीय मिसाल भी प्रस्तुत की।

समारोह में पधारे योग सोशल सोसायटी के राष्ट्रीय संरक्षक श्री प्रहलाद दामोदर दास मोदी शादी के इन इंतजामों से अभिभूत नजर आए और इसके लिए श्री हरिराम जायसवाल की भूरि-भूरि सराहना की। बता दें कि श्री प्रहलाद दामोदार दास मोदी देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के भाई हैं, जो इस विवाह समारोह में अपनी पुत्री सोनल बेन मोदी, विराज मोदी एवं अन्य परिजनों के साथ आए थे। समारोह में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित लोगों की भी उपस्थिति रही और वे सभी सात्विक एवं नेचुरल भोजन की व्यवस्थाऔं और उसमे परिलक्षित हो रहे सामाजिक सेवा, भारतीय परपंपरा और आध्यात्मिकता से परिपूर्ण इंतजामों से खासे प्रभावित नजर आए। श्री हरिराम जायसवाल की इस पहल को जिस प्रकार सराहा जा रहा है, उसे देखते हुए उम्मीद जगती है कि इससे लोग प्रेरित होंगे औऱ महंगी शादियों की होड़ में शामिल न होकर अपने बच्चों की शादी में सादगी अपनाते हुए ‘स्वास्थ्य, संस्कार और सेवा’ को प्रमोट करेंगे।













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