March 10, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार समाज

जबलपुर में शीघ्र बनेगा भगवान सहस्त्रबाहु जी का भव्य मंदिर; जयपुर से मूर्ति पहुंची; बाबा पगलानंद महाराज की भावना से जुड़े कलचुरी समाजबंधु

जबलपुर।
जबलपुर के जिलेहरी घाट (ग्वारीघाट) मार्ग स्थित बाबा पगलानंद जी के सिद्ध-आश्रम में शीघ्र ही कलचुरी समाज के आराध्य भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन के भव्य मंदिर का निर्माण होगा। खास बात यह है कि मंदिर के लिए भगवान सहस्रबाहु की मनमोहक मूर्ति जयपुर से जबलपुर पहुंच चुकी है।

कलचुरी एकता महासंघ के श्री किशोर राय (नरसिंहपुर) ने शिवहरेवाणी को बताया है कि सिद्ध-आश्रम में बाबाजी के बताए स्थान पर जल्द से जल्द भव्य मंदिर एवं सभागृह के निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। विगत दिनों बाबा पगलानंद जी महाराज, कलचुरी एकता महासंघ की राष्ट्रीय संयोजिका श्रीमती अर्चना जायसवाल, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री शिवचरण हाडा (जयपुर) एवं प्रदेश अध्यक्ष श्री राकेश राय (सीहोर) के मार्गदर्शन में मंदिर निर्माण हेतु एक समिति गठित की गई है, जिसमे जबलपुर सहित मध्य प्रदेश की अन्य जगहों से भी प्रतिष्ठित सामाजिकजनों को शामिल किया जाना प्रस्तावित है।

वरिष्ठ समाजसेवी किशोर ने जानकारी देते हुए बताया कि इसे बाबाजी श्री श्री 1008 पगलानंद महाराज का अपनी जन्मस्थली से प्रेम ही कहा जाएगा जो उन्होंने नर्मदा के तट पर गौरीघाट एवं जिलहरी घाट के मध्य सिद्धपीठ आश्रम की स्थापना की। एक कलचुरी परिवार में जन्म लेने वाले पगलानंद महाराज का ‘पूर्वाश्रम’ नाम पुरुषोत्तम राय है। उनके पिता चरणलाल राय एवं माता श्री जयबाई, दोनों ही ‘दादा धूनी वाले’ के परमभक्त थे। पुरुषोत्तम राय जो अब बाबा पगलानंद महाराज के नाम से जाने जाते हैं, अपने माता-पिता के सातवें पुत्र हैं। उनकी शिक्षा-दीक्षा साईंखेड़ा एवं पिपरिया में हुई।

बाबा पगलानंद महाराज जिस प्रकार जबलपुर को अपनी पहचान का हिस्सा मानते हैं, उसी तरह कलचुरी वंश में जन्म लेने को अपने गौरव से जोड़ते हैं। बाबा बगलानंदजी महाराज स्वयं कहते भी हैं कि उन्होंने कलचुरी वंश में जन्म लिया है जिसके आराध्य ने सातद्वीपो पर वर्षो राज्य किया है। ऐसे महान प्रतापी राजराजेश्वर भगवान सहस्त्रबाहु जी का एक मंदिर जबलपुर में भी बने, ऐसी उनकी भावना सदैव से रही है। उनके मुताबिक, चूंकि भगवान सहस्त्रबाहु जी का नर्मदा जी से बहुत गहरा रिश्ता है, तथा कलचुरी वंश का ऐतिहासिक महत्त्व भी जबलपुर के आसपास रहा है और वह स्वयं भी मैया नर्मदा जी के किनारे आश्रम बनाकर रह रहे हैं, लिहाजा उनकी आत्म-प्रेरणा ऐसे स्थान पर भगवान का मंदिर बनने की रही है। वह आश्रम में आगंतुक समाजसनों से अपनी यह इच्छा व्यक्त भी कर चुके हैं।

श्री किशोर राय ने शिवहरेवाणी को बताया कि बीते दिनों कलचुरी एकता महासंघ की राष्ट्रीय संयोजिका श्रीमती अर्चना जायसवाल से भी उन्होंने अपनी यह इच्छा साझा की थी, जिस पर उन्होंने सहर्ष सहमति जताई थी। श्रीमती जायसवाल की पहल पर समाजजनों विशेष रूप से जबलपुर के वरिष्ठ समाजबंधुओं का सहयोग लेते हुए मंदिर सह सभागार का संकल्प लिया गया है और यह कार्य जल्दी सम्पन्न होगा।

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