फतेहपुर।
फतेहपुर जिले के अमौली कस्बे में रहने वाले श्री गोविंदलाल गुप्ता (शिवहरे) के घर इन दिनों बधाई देने औऱ मिठाई खिलाने वालों का तांता लगा है। एक खबर ने उनकी जिंदगी बदल दी, और उनकी पहचान भी। दो दिन पहले तक वह एक साधारण किसान के रूप में जाने जाते थे, और आज पूरे कस्बे में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) वरदान गुप्ता के पिता के तौर पर उनकी चर्चा है। पीसीएस परीक्षा-2024 के रविवार रात को धोषित रिजल्ट में वरदान गुप्ता ने 338वीं रैंक के साथ बीडीओ का पद हासिल किया।
वरदान गुप्ता इन दिनों लखनऊ में यूपीएससी की मेन्स परीक्षा के पेपर दे रहे हैं। दो दिन बाद अंतिम पेपर देकर घर लौटेंगे। वरदान ने रविवार की रात करीब 12.30 बजे लखनऊ से पिता गोविंदलाल गुप्ता को फोन कर पीसीएस परीक्षा में अपनी कामयाबी का समाचार सुनाया, तो खुशी से उनकी आंखें छलक पड़ी। गोविंदलाल गुप्ता ने शिवहरेवाणी से बातचीत में कहा कि वरदान हमारे जीवन ‘प्रभु का वरदान’ बनकर आया है जिसने हमें सबसे बड़ी खुशी दी है।

28 वर्षीय वरदान गुप्ता की शुरुआती शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई। छठवी कक्षा में उसका दाखिला नवोदय विद्यालय में हो गया। बिंदकी के निकट सरकंडी स्थित नवोदय विद्यालय में रहकर उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की। फिर बीएचयू (वाराणसी) से बीटेक किया। बीटेक के बाद वरदान के पास कई अच्छे जॉब ऑफर आए लेकिन उन्होंने आईएएस बनने की ठान रखी थी। लिहाजा ऑफर्स ठुकराकर परीक्षा की तैयारी में जुट गए। पहले सेल्फ स्टडी करते हुए अपना बेस तैयार किया, और फिर यूपीएससी व पीसीएस के सिलेबस के आधार पर पढ़ाई की। अपनी तैयारी पर भरोसा होने के बाद ही उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ‘सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा (पीसीएस)-2024’ का फार्म भरा।

वरदान गुप्ता की तैयारी इतनी अच्छी थी कि पहले ही प्रयास में उन्होंने प्रारंभिक परीक्षा क्वालीफाई कर ली। अब मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक कोचिंग की मदद ली। दिन-रात एक कर पूरी तैयारी के साथ मेन्स परीक्षा दी और फिर इंटरव्यू में भी शानदार प्रदर्शन कर अंतिम परिणाम में अपनी जगह पक्की कर ली। इस दरम्यान वरदान गुप्ता ने यूपीएससी की लोक सेवा परीक्षा के लिए भी आवेदन कर दिया। वरदान ने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा क्वालीफाई कर ली, और इन दिनों मेन्स की परीक्षाएं दे रहे हैं।

28 वर्षीय वरदान गुप्ता की पहली कामयाबी ने पूरे परिवार में खुशियां बिखेर दी हैं। पिता गोविंदलाल गुप्ता का कहना है कि वरदान बचपन से ही पढाई को लेकर बहुत संजीदा और अनुशासित रहे है। आत्मविश्वास से लबरेज रहते हैं, वरना बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से बीटेक करने के बाद लाखों के जॉब ऑफर्स ठुकराना हर किसी के लिए सहज नहीं होता। वरदान की मां श्रीमती रेखा गुप्ता को बेटे का बेसब्री से इंतजार है, उसे गले लगाने को लालायित हैं। मां को पूरा भरोसा है कि उनका होनहार लाल एक दिन आईएएस बनने का सपना भी पूरा करेगा। वरदान के अमौली पहुंचने पर उसकी दोनों बड़ी बहनें भी उससे मिलने ससुराल से आएंगीं। सबसे बड़ी बहन पूजा गुप्ता का विवाह कानपुर के किराना व्यवसायी मनीष गुप्ता से हुआ है, जबकि दूसरी बहन निशा गुप्ता झींझक में हैं जहां उनके पति श्याम गुप्ता रेडीमेड की दुकान करते हैं। वरदान परिवार में सबसे छोटे हैं।













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