April 18, 2026
शिवहरे वाणी, D-30, न्यू आगरा, आगरा-282005 [भारत]
समाचार

Archive: राधाकृष्ण मंदिर के लिए हमेशा खास रहेगी अक्षय तृतीया; 14 वर्ष पूर्व इसी दिन स्थापित हुई थी कृष्ण और राधारानी की नयनाभिराम प्रतिमा

आगरा
आज अक्षय तृतीया का दिन लोहामंडी स्थित शिवहरे समाज की धरोहर राधाकृष्ण मंदिर के लिए बहुत ही खास है। 14 वर्ष पहले 2012 में अक्षय-तृतीया (तब 24 अप्रैल) के पावन दिन इस धरोहर में पुनर्निर्माण की लंबी प्रक्रिया के बाद भगवान कृष्ण और राधारानी की नयनाभिराम प्रतिमा स्थापित की गई थी। इस भव्य आयोजन की कवरेज त्रैमासिक पत्रिका ‘शिवहरेवाणी’ में विस्तार से प्रकाशित हुई थी। सात पृष्ठों में सचित्र समाहित कवरेज हम पृष्ठवार प्रकाशित कर रहे हैं, ताकि पुराने लोगों के जेहन में उस शानदार समारोह की स्मृतियां ताजा हो जाएं, और नई पीढ़ी के लोग इस उपलब्धि के गौरव से वाकिफ हों।

शिवहरेवाणी (अप्रैल-जून, 2011, अंक-4)
पृष्ठ-6
मंदिर श्री राधाकृष्ण में मूर्ति स्थापना
संकल्प का एक चरण
(शिवहरेवाणी नेटवर्क)
तमाम मुश्किलों और परीक्षाओं से गुजरने के बाद ईश्वर ने वो शुभ घड़ी ला ही दी, जिसका इंतजार समाज के लोगों को पिछले तीन सालों से बड़ी बेसब्री के साथ था। अवसर लोहामंडी स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर में प्रभु की मूर्ति स्थापना का। श्री राधाकृष्ण मंदिर प्रबंध समिति की ओर से सात दिवसीय मूर्ति स्थापना समारोह एवं भागवत सप्ताह कार्यक्रम का एक विशिष्ट और भव्य आयोजन।
कहते हैं कि आगाज अच्छा हो तो अंजाम भी अच्छा होता है। इस आयोजन के संदर्भ में यह बात सौ फीसदी सत्य बैठती है। 26 अप्रैल को भागवत सप्ताह का प्रारंभ हुआ भव्य कलश यात्रा से। शिवहरे समाज की महिलाओ ने बड़े उत्साह और श्रद्धा से इसमें भागीदारी की। सुबह सात-आठ बजे से हवन प्रारंभ हुआ, जिसमें समाज के सभी वर्गों के महिलाओं-पुरुषों ने भागीदारी की। कार्यक्रम को लेकर उत्साह इस कदर था कि नौ बजे ही मंदिर परिसर में पांव रखने तक की जगह नहीं रही।

सुबह नौ बजे मंदिर से कलशयात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा मदिया कटरा, न्यू राजामंडी, तेलीपाड़ा, लोहामंडी बाजार और लोहामंडी चौराहा होती हुई दोपहर एक बजे मंदिर पहुंची। बमुश्किल तीन किलोमीटर के मार्ग में चार जगह कलशयात्रा का जोरदार स्वागत हुआ।
पृष्ठ-7
कलशयात्रा में सबसे आगे बैंडबाजो के साथ घोड़ों पर सवार थे राधाकृष्ण के सुंदर स्वरूप। और पीछे थे परीक्षित बने मंदिर अध्यक्ष श्री विनय गुप्ता और उनकी पत्नी श्रीमती ममता गुप्ता। साथ में पीत वस्त्रों में शिवहरे समाज की सैकड़ों कलशधारी महिलाएं और पुरुष। कलशयात्रा अभी न्यू राजामंडी ही पहुंची थी कि वहां अशोक शिवहरे अस्सो औऱ मुकुंद शिवहरे की ओर से कलशयात्रियों का स्वादिष्ट शीतल मिल्क रोज से स्वागत किया गया।
न्यू राजामंडी से कलशयात्रा आगे बढ़कर रेल लाइन किनारे तेलीपाड़ा होते हुए लोहामंडी पहुंची जहां बाजार के व्यापारियों की ओर से रूह आफजा शर्बत पिलाया गया। यहां यह कलशयात्रा न केवल शिवहरे समाज बल्कि संपूर्ण समाज की प्रतीत हुई। स्वागत करने वालों में वैश्य व्यापारी ही नहीं, पंजाबी और सिंधी व्यापारी भी शामिल थे। इसके आगे शिवहरे समाज के प्रमुख हार्डवेयर व्यवसायी अवधेश गुप्ता पुत्र श्री रामभरोसी गुप्ताजी की ओऱ से कलशयात्रा का स्वागत ठंडी फ्रूटी से किया गया।
श्रद्धा और आस्था से सराबोर कलशयात्रा पर कई जगह बाजार की दुकानों और ऊपर छतों से पुष्पवर्षा की गई। यात्रा जहां-जहां से गुजरी, वहां का वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। यात्रा के साथ शिवहरे समाज के युवा नाचते-गाते जा रहे थे। महिलाएं भी नाचते हुए चल रही थीं। करीब तीन घंटे बाद यात्रा वापस मंदिर पहुंची जहां मंदिर के मुख्य गेट पर शिवहरे महासभा के अध्यक्ष श्री मनोज शिवहरे द्वारा ठंडी फ्रूटी से यात्रा से स्वागत किया गया।
यात्रा में श्रीमती नीलम गुप्ता पत्नी मनोज शिवहरे, श्रीमती सोनिया शिवहरे पत्नी मुकुंद शिवहरे, श्रीमती अंजु शिवहरे पत्नी राजकुमार शिवहरे, श्रीमती मंजू गुप्ता पत्नी सुधीर गुप्ता, श्रीमती स्वीटी गुप्ता पत्नी प्रभात गुप्ता, श्रीमती रजनी गुप्ता पत्नी अवधेश गुप्ता, श्रीमती रचना शिवहरे पत्नी वीरेंद्र गुप्ता एडवोकेट, श्रीमती मिथलेश गुप्ता पत्नी भगवान दास, श्रीमती रजनी गुप्ता पत्नी राजेंद्र गुप्ता, श्रीमती गुंजन शिवहरे पत्नी मनोज शिवहरे, श्रीमती सोमलता गुप्ता पत्नी स्व. सुरेशचंद्र गुप्ता, श्रीमती मनीषा गुप्ता पत्नी गिरधर गोपाल गुप्ता, श्रीमती सीमा पत्नी डा. अजय गुप्ता,
(अगले पृष्ठ पर जारी)

पृष्ठ-8
श्रीमती नीमा पत्नी लक्ष्मीनारायण, श्रीमतीसीमा पत्नी लवकेश गुप्ता, श्रीमती मधु पत्नी टीटू, श्रीमती पुष्पा पत्नी ऋषि शिवहरे, श्रीमती विमला कुमारी पत्नी स्व. गिरधरगोपाल शिवहरे, श्रीमती उर्मिला पत्नी राकेश शिवहरे, श्रीमती रजनी पत्नी चंदन शिवहरे, श्रीमती रेणु शिवहरे पत्नी गोपाल शिवहरे, श्रीमती कलका शिवहरे पत्नी पदम शिवहरे, श्रीमती संध्या गुप्ता पत्नी स्व. देवानंद गुप्ता, श्रीमती ऊषा शिवहरे पत्नी गोपाल शिवहरे, श्रीमती अंजलि गुप्ता पत्नी नीरज शिवहरे, श्रीमती साधना शिवहरे पत्नी संजीव शिवहरे, श्रीमती मधु शिवहरे पत्नी कन्हैया लाल, श्रीमती पूनम पत्नी राकेश गुप्ता, श्रीमती माला गुप्ता पत्नी दीनदयाल गुप्ता, श्रीमती सुधा शिवहरे पत्नी रामजीलाल, श्रीमती मिथलेश पत्नी विनोद गुप्ता, श्रीमती शिवाली पत्नी राधेलाल, श्रीमती मीनू पत्नी राजकुमार, श्रीमती सीमा पत्नी प्रमोद गुप्ता, श्रीमती उर्मिला पत्नी मुकेश गुप्ता, श्रीमती ममता पत्नी किशन शिवहरे, श्रीमती हीरा पत्नी स्व. मदनगोपाल, श्रीमती सुनीता पत्नी सुनील गुप्ता, श्रीमती सुनंदा पत्नी अश्वनी गुप्ता, श्रीमती गीता पत्नी राधाकृष्ण, श्रीमती संध्या शिवहरे पत्नी विमल शिवहरे, श्रीमती रेखा शिवहरे पत्नी शांति गुप्ता, श्रीमती अलका पत्नी अशिवहरे, श्रीमती शिखा पत्नी विशाल गुप्ता, श्रीमती रीमा पत्नी नीरज गुप्ता, श्रीमती अन्नू पत्नी राहुल गुप्ता,
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श्रीमती राज पत्नी सुरेश गुप्ता, श्रीमती स्वप्निल गुप्ता पत्नी तुषार गुप्ता समेत कई महिलाएं शामिल हुईं। इसके अलावा आगरा के बाहर ग्वालियर में लश्कर निवासी स्व. सुरेशचंद्र गुप्ताजी की पत्नी श्रीमती उर्मिला शिवहरे औऱ स्व. श्री जगदीश गुप्ता की पत्नी श्रीमती रागिनी, ग्वालियर के ही प्रदीप शिवहरे पुत्र श्री चिरौजीलाल शिवहरेजी अपनी धर्मपत्नी श्रीमती पूनम गुप्ता के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। इनके अलावा फिरोजाबाद, टूंडला, शिकोहाबाद और सिरसागंज से भी कई समाजसेवी व महिलाएं कलशयात्र के कार्यक्रम में शामिल हुईं।
कार्यक्रम का कुशल संचालन शिवहरे महासभा के अध्यक्ष मनोज शिवहरे, अऱविंद गुप्ता, मुकुंद शिवहरे वीरेंद्र गुप्ता (शिवहरे) एडवोकेट, कांग्रेस नेता केके शिवहरे, भूपेंद्र शिवहरे, अवधेश गुप्ता आदि ने किया। यह संपूर्ण कार्यक्रम श्री रामभरोसीलाल गुप्ताजी, भगवान स्वरूप शिवहरे, सुरेशचंद्र शिवहरे (ईदगाह), चंद्रशेखर शिवहरे (चंदू कप्तना) के निर्देशन मे सफल हुआ। इसके बाद दोपहर 3 बजे से भागवत सप्ताह का आय़ोजन हुआ जो अगले सात दिनों तक सुबह सात बजे से पूर्वाह्न 11 बजे तक और दोपहर 3 बजे से शाम सात बजे तक दो सत्रों में चली। हाथरस के अंतरराष्ट्रीय कथावाचक डा. राम वशिष्ट ने वक्तव्य कला क साथ बड़े मनोरंजक तरीके से सारगर्भित कथाका वाचन किया।
इस दौरान विभिन्न प्रसंगों को अधिक रोचक औऱ संप्रेषणीय बनाने के लिए प्रभुकथा के पात्रों के स्वरूप धारण कर बड़ी शानदार अभिव्यक्ति दी. बच्चों ने ही नहीं, बड़ों ने भी। श्री वीरेंद्र गुप्ता (शिवहरे) एडवोकेट ने वासुदेव की भूमिका अदा की और यशोदा बनीं श्रीमती ममता को शिशु कृष्ण सौंपा। इसी प्रकार विनय गुप्ता की पुत्री कु. पंखुरी ने साधा और मुकुंद शिवहरे की पुत्री श्रेया ने कृष्ण के स्वरूप धरे। दयालबाग निवासी विष्णु गुप्ता ने कृष्ण औऱ उनकी पत्नी ने सुभद्रा का रूप धरा।
कथा के सातों दिन विभिन्न भक्तों की ओऱ से भोग-प्रसाद लगाए और भक्तों को वितरित कराए। छीपीटोला निवासी अशोक शिवहरे नेपेठे का प्साद वितरण कराया। एक दिन परीक्षित विनय गुप्ता ने अंगूर का भोग लगाया। इसी तरह प्रभात गुप्ता ने रबड़ी का भोग वितरित किया। एक दिन गोल्डी एवं अवनींद्र गुप्ता पुत्र स्व. मदनगोपाल गुप्ता ने मठरी बर्फी और मक्खन मिस्री का प्रसाद वितरित कराया। भागवत सप्ताह के दौरान ही एक दिन खाटू श्याम जी की भजन संध्या का भी आय़ोजन हुआ जिसमें मुकुंद शिवहरे ने अन्नकूट औऱ पूड़ी का प्रसाद वितरित कराया।

पृष्ठ-10
समापन के अगले दिन यानी कार्यक्रम के अंति मदिन मंदिर प्रांगण में हवन-पूजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में आगरा ही नहीं, बाहर के भीसमाजबंधुओं ने भागीदारी की। खासकर टूंडला, फिरोजाबाद और ग्वालियर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। हवन-पूजन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें भक्तों को पंगत में बिठाकर प्रसाद खिलाया गया। यह दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक चला। इस संपूर्ण कार्यक्रम में जिस प्रकार समाज बंधुओं ने भागीदारी की, वह सराहनीय है।
आयोजन में श्री रामभरोसीलाल गुप्ता, सीताराम शिवहरे, एडवोकेट विनोद्चंद्र गुप्ता, भगवान स्वरूप शिवहरे, सुरेशचंद्र शिवहरे, शिवशंकर शिवहरे मानू, मुन्नालाल शिवहरे, चंद्रशेखर शिवहरे (चंदू कप्तान), केके शिवहरे, भूपेंद्र शिवहरे, अशोक शिवहरे शांतिस्वरूप गुप्ता, रामलखन शिवहरे, सुधीर गुप्ता, प्रदीप गुप्ता, प्रभात गुप्ता, अवधेश गुप्ता, पप्पन भाई, कुलभूषण गुप्ता (रामभाई), अरविंद गुप्ता, विष्णु शिवहरे, सियाराम शिवहरे एडवोकेट, रामदयाल शिवहरे, सतीश शिवहरे, मुन्नालाल शिवहरे (सिकंदरा), विष्णु शिवहरे, श्रीरंजन गुप्ता, राधेलाल शिवहरे, मुरारीलाल गुप्ता, महेश शिवहरे, विमल शिवहरे, ऋषि शिवहरे, रामगोपाल गुप्ता, शंकरलाल गुप्ता, सुनील गुप्ता, सचिन गुप्ता, सुगम शिवहरे आदि ने व्यवस्था प्रबंधन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बॉक्स (पृष्ठ-7)
जिसने भी देखी प्रतिमा, नजरें ठहर गईं
मंदिर श्री राधाकृष्ण ती मूर्ति स्थापना का कार्यक्रम कोई सहज नहीं था। सबसे बड़ी मुश्किल मूर्ति के चयन को लेकर थी। हर कोई चाहता था कि ठाकुरजी की प्रतिमा इतनी सुंदर और सजीव हो कि उसके दर्शन करते ही लोगों का चित्त शांत हो जाए और स्वतः भक्तिमार्ग की ओर प्रेरित हो जाए। प्रतिमा चयन समिति के सदस्यगण विनय गुप्ता, मुकुंद शिवहरे, वीरेंद्र गुप्ता एडवोकेट के साथ अग्रणी समाजसेवी युवा श्री अरविंद गुप्ता व शिवहरे महासभा के अध्यक्ष मनोज शिवहरे को कई बार जयपुर जाना पड़ा। वहां ठाकुरजी और राधारानी का एक प्रतिरूप सर्वसम्मति से चयन किया गया और तीन लाख रुपये की न्यौछावर देकर इसके निर्माण का ऑर्डर निर्गत कर दिया। पांच फुट ऊंची प्रतिमा को अंतिम रूप देने के लिए समिति के उक्त सदस्यों को दो दिन तक जयपुर मे ही रुकना पड़ा। प्रतिमा के पूर्ण होने पर उसे बड़ी सावधानी के साथ पैकिंग कर आगरा के लिए रवाना किया गया। खासे वजन की यह प्रतिमा स्थापित करने के लिए एक मजबूत प्लेटफार्म बहुत कम समय में तैयार किया गया और मूर्ति को विराजमान कराया गया। समीति के वरिष्ठतम सदस्य सुरेशचंद्र शिवहरे ने भी प्रतिमा के प्रभाव को सराहा औऱ चयन की भूरि-भूरि सराहना की। प्रतिमा स्थापना के साथ ही वृंदावन से ठाकुरजी और राधारानी की पोशाकें बी बहुत कम समय में तैयार कराई गई। कार्यक्रम के प्रथम दिवस जब मंदिर के पट खोले गए तो वहां मौजूद भक्त आकर्षक प्रतिमा से अपनी आंखें नहीं डिगा सके औऱ वहां हर व्यक्ति इस बात से सुकून में था कि ठाकुरजी के इस प्रतिरूप से मंदिर की प्रतिष्ठा को स्वतः चार चांद लग जाएंगे।
बॉकेस (पृष्ठ-10)
प्याऊ का शुभारंभ
मंदिर में आने वाले प्रभु भक्तों और अन्य राहगीरों को गर्मी में राहत के लिए आयोजन के पहले ही दिन प्याऊ का शुभारंभ किया गया। शिवहरे महासभा की ओर से स्थापित की गई इस प्याऊ में प्रतिदिन तीन ब र पानी भरने औऱ बर्फ लगाने का कार्य नियमित रूप से चल रहा है। कार्यक्रम के दौरान उस समय हर्ष की लहर दौड़ गई जब शिवहरे महासभा के अध्यक्ष मनोज शिवहरे ने मंदिर प्रांगण में आगामी राधाष्टमी के दिन शिवहरे महासभा की ओर से 56 भोग, फूलबंगला, खाटूश्यामजी की भजन संध्या के आयोजन की घोषणा की।

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