फिरोजाबाद।
इसे प्रशासन की हठधर्मिता कहें, नकारापन कहें या फिर लापरवाही! शिवहरे समाज को लंबे समय से ओबीसी सर्टिफिकेट के उसके वाजिब हक से वंचित किया जा रहा है। यहां तक कि, विधायक (एमएलसी) श्री विजय शिवहरे के कड़े हस्तक्षेप के भी अब तक सकारात्मक परिणाम नहीं आए हैं। इस दिशा में अब तक हुए तमाम प्रयासों में बीते रोज एक कड़ी और जुड़ गई, जब शिवहरे समाज के एक शिष्टमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने मौके पर ही सभी उपजिलाधिकारियों को लाइन पर लेकर उन्हें समस्या के त्वरित निस्तारण की ताकीद की। जिलाधिकारी का अंदाज बेशक काफी सख्त लग रहा था, लेकिन यह कितना असरदार साबित होगा, फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता। कारण यह है, कि बीती 9 अप्रैल को विधायक श्री विजय शिवहरे ने भी समाज के शिष्टमंडल को साथ लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी रमेश रंजन से मुलाकात की थी। और, तब भी डीएम ने समस्या के जल्द निराकरण का भरोसा विधायक को दिलाया था। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद ही रमेश रंजन का तबादला हो गया।
ऐसे में समाज के शिष्टमंडल ने मौजूदा जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा से मिलकर उन्हें समस्या से अवगत कराया। शिष्टमंडल ने डीएम से साफ कहा कि जब आगरा जनपद में शिवहरे समाज के ओबीसी सर्टिफिकेट बनाए जा रहे हैं, तो फिरोजाबाद में यह प्रक्रिया क्यों रोक दी गई है? जिलाधिकारी ने गंभीरता दिखाते हुए उसी समय एसडीएम को लाइन पर लेकर मामले के निस्तारण के आदेश दिए।
शिष्टमंडल में भाजपा के जिला मंत्री विपिन शिवहरे, शिवहरे समाज समिति के अध्यक्ष कमल गुप्ता एडवोकेट, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य सुगम शिवहरे ‘लल्लू’ (आगरा), सुगम शिवहरे ‘लवली’, उत्तर प्रदेश व्यापार सभा के अध्यक्ष नवीन शिवहरे, रामजीलाल शिवहरे, अरुण गुप्ता, विनोद शिवहरे, अंकित शिवहरे, प्रमोद शिवहरे, कवि शिवहरे (आगरा), आकाश शिवहरे (आगरा), एडवोकेट वरुण गुप्ता जी समेत समाज के कई लोग शामिल रहे।
मौजूदा डीएम चल रही है बातः सौरभ शिवहरे
उधर, विधायक श्री विजय शिवहरे के फिरोजाबाद प्रतिनिधि एवं भाजपा के महानगर मंत्री सौरभ शिवहरे ने शिवहरेवाणी से बातचीत में दावा किया है कि उन्होंने नवागत डीएम संतोष कुमार शर्मा से इस संबंध में पहले बात हो चुकी है। अभी एक हफ्ते पहले ही सौरभ शिवहरे की इस मसले पर शिवहरे समाज के अध्यक्ष कमल गुप्ता एडवोकेट के साथ बैठक हुई थी। बैठक में भाजपा के जिला मंत्री विपिन शिवहरे (सिरसागंज) भी मौजूद थे।














