—पवन नयन जायसवाल—
ऊपर चित्र में श्री राजराजेश्वर मंदिर, पुण्य सलिला माँ नर्मदा के तट पर बसी माहिष्मती नगरी, मंडला (मध्यप्रदेश) में स्थापित श्री अर्जुन कार्तवीर्य, सहस्रार्जुन, सहस्रबाहु की पुरातन, सुंदर प्रतिमा है।
03×02 फीट पाषाण खंड में भगवान श्री सहस्रार्जुन कमलदल पर पद्मासन में बैठे आसनारुढ़, शीश में किरीट (मुकुट), कंठ में अलंकार है। सिर के ऊपर क्षत्र (छत्र) विराजित है। प्रतिमा के दाएं उर्द्ध भाग में नृत्य की मुद्रा में परिचारिका तथा बाएं अधोभाग में सहायक बैठा है। सिंहासन के स्तम्भों एवं शीर्ष भाग में कुछ प्रतिमाएं है। यह प्रतिमा मंडला में हुई खुदाई के समय सनातन हिंदू धर्म के अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं के साथ प्राप्त हुई थी जो 500 वर्ष से ज्यादा पुरानी मानी जाती है और करीब 02 सदी से मंदिर में स्थापित है। मंडला का किला भी हजार वर्ष से भी ज्यादा पहले का माना जाता है।
मेरे पास देश भर से जितनी मूर्तियों और प्रतिमाओं के चित्र उपलब्ध है उन सभी में यह प्रतिमा आज तक उपलब्ध और स्थापित प्रतिमाओं में एकमेव पुरातन प्रतिमा है। यही कारण है कि हर वर्ष कई समाचार पत्रों में भगवान श्री सहस्रार्जुन जयंती ‘सहस्रार्जुन सप्तमी’ पर पिछले 10-12 वर्ष से प्रकाशित मेरे लेख में यह चित्र और इसका उल्लेख मुख्य रूप से प्रकाशित होता रहा है।
इस पुरातन प्रतिमा का पूजन, दर्शन, माँ नर्मदा की संध्या आरती और मंडला निवासी श्री ओम प्रकाश चौकसे जी के साथ चर्चा, कुछ स्थलों के भ्रमण का एक कार्यक्रम अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) निवासी स्व. श्री कौंतेय जायसवाल जी के साथ बना भी था लेकिन एक अपघात के कारण एक हाथ पलस्तर में बंधा होने के कारण मैं जा नहीं सका और स्व. श्री कौंतेय जायसवाल जी ने अकेले ही मंडला की अपनी खोज यात्रा संपन्न की थी।
जबसे श्री ओमप्रकाश चौकसे से परिचय हुआ तबसे हर बार फोन पर हुए संवाद में उनका मंडला आने का आग्रह होता रहा है। उनकी यह शिकायत और दर्द भी है कि समाजजनों को मंडला आकर स्वयं इस जगह को देखना चाहिए। वह हमेशा ही उपलब्ध साक्ष्यों, जनश्रुति और सनातन हिंदू धर्म के धर्मगुरु पूज्यनीय शंकराचार्य जी का संदर्भ देकर मंडला को माहिष्मती होने का दावा करते रहे हैं।
मेरी दृष्टि में सनातन हिंदू धर्म ग्रंथों, हैहयवंश, क्षत्रिय वर्ण, भगवान श्री सहस्रार्जुन, कलचुरि राजवंश, कलाल, कलार, कलवार जाति और समाज के महापुरुषों के विषय में मेरी जिनसे भेंट या फोन पर संवाद हुआ है और होता रहा है, उनके इन विषयों का ज्ञान और जानकारी रखने वालों में इंदौर निवासी, भगवान श्री सहस्रार्जुन पर आरती के रचयिता आदरणीय भरतलाल बाबूलाल जी जायसवाल, मंडला निवासी श्री ओमप्रकाश जी चौकसे, जिनकी बहुत बड़ी प्रदर्शनी मैंने गोंदिया, महाराष्ट्र के समाज सम्मेलन में देखी और उनसे मिला वह भोपाल निवासी श्री ओम जी मालवीय, प्रयागराज निवासी श्री रामलखन जी जायसवाल, जोरहाट (असम) निवासी श्री राममनोहर जी जायसवाल और कलचुरि राजवंश पर खोज करने वाले अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) निवासी स्व. श्री कौंतेय जी जायसवाल जिन्होंने पिछले वर्ष कटघोरा (छत्तीसगढ़) में इसी विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी और कलचुरियों की छत्तीसगढ़ में प्रथम राजधानी तुमान भ्रमण का आयोजन किया था और इस आयोजन में मुझे भी आमंत्रित किया था, ऐसे समाज बंधु ही प्रमुख रहे हैं।
-पवन नयन जायसवाल
राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष- अखिल भारतीय जायसवाल (सर्ववर्गीय) महासभा
संयोजक- भगवान श्री सहस्रार्जुन जन्मोत्सव जागरुकता अभियान
साहित्यकार
सुसंवाद, संदेश- 94217 88630*
अमरावती , विदर्भ, महाराष्ट्र*
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साहित्य/सृजन
मंडला में हुई खुदाई में निकली थी भगवान श्री सहस्रार्जुन की पुरातन प्रतिमा
- by admin
- November 3, 2026
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