जल्द ही बटेश्वर जाएंगे सिरसागंज नगर पालिका के चेयरमैन सोनी शिवहरे…आगरा से भी जाएगे समाज के प्रतिनिधि
शिवहरे वाणी नेटवर्क
आगरा।
शिवालयों की नगरी, तीर्थों का भांजा कहे जाने वाले बटेश्वर में भगवान सहस्त्रबाहु मंदिर और धर्मशाला की स्थापना को लेकर एक पहल आगरा से हुई है। मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह में विलंब से पहुंचे सिरसागंज नगर पालिका के चेयरमैन श्री संतकुमार (सोनी) शिवहरे की समाजबंधुओं से बातचीत में यह मुद्दा सामने आया। एक प्रारंभिक सहमति बनी कि बटेश्वर स्थित कलारों वाली धर्मशाला का पुनरुद्धार कर वहां सहस्त्रबाहु मंदिर एवं धर्मशाला का निर्माण किया जाए।

शिवहरे समाज एकता परिषद और शिवहरे वाणी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में आए सोनी शिवहरे दरअसल काफी विलंब से पहुंचे थे। तब तक कार्यक्रम भी संपन्न हो चुका था। परिषद के अध्यक्ष श्री अंशुल शिवहरे समेत सभी पदाधिकारियों ने सोनी शिवहरे का स्वागत किया। इस दौरान श्री राधाकृष्ण कमेटी के अध्यक्ष श्री अरविंद शिवहरे, महासचिव श्री मुकुंद शिवहरे, कोषाध्यक्ष श्री कुलभूषण गुप्ता रामभाई, उ.प्र. जायसवाल सर्ववर्गीय महासभा के कोषाध्यक्ष श्री धर्मेंद्र राज शिवहरे, शिवहरे समाज एकता समिति फिरोजाबाद के अध्यक्ष एडवोकेट कमल गुप्ता भी मौजूद थे।

इस दौरान परिषद के संगठन मंत्री श्री सुगम शिवहरे ने सोनी शिवहरे से बातचीत में बटेश्वर में कलारों वाली धर्मशाला के पुनरुद्धार का बात रखी। वहां मौजूद श्री अविरल गुप्ता ने चेयरमैन को जानकारी दी कि बटेश्वर मुख्य बाजार में स्टेट बैंक शाखा के ठीक सामने स्थित 275 वर्ग गज क्षेत्रफल का यह भूखंड उनकी पैतृक संपत्ति है, जिस पर कब्जे के प्रयास किए जा रहे हैं, और वह अपने पूर्वजों की इच्छा का सम्मान रखते हुए इस जगह को समाज की धर्मशाला के लिए समर्पित करना चाहते हैं।
श्री सोनी शिवहरे ने कहा कि वह स्वयं बटेश्वर जाकर पूरी स्थिति का संज्ञान लेंगे और फिर वहां सहस्त्रबाहु मंदिर और धर्मशाला के निर्माण के लिए अभियान चलाया जाएगा। वहां मौजूद श्री अरविंद शिवहरे और मुकुंद शिवहरे ने भी तय किया कि वह भी समाज के सम्मानित लोगों के साथ बटेश्वर जाकर इस प्रस्ताव की संभावनाओं पर विचार करेंगे।

कहां है बटेश्वर…क्यों कहते हैं भांजा तीर्थ
बता दें कि धार्मिक पर्यटन के लिहाज एक बहुत महत्वपूर्ण स्थल है। आगरा से 75 किलोमीटर दूर और सिरसागंज व शिकोहाबाद से 30 किलोमीटर दूर बटेश्वर दरअसल इटावा और भिंड से भी लगभग इतना ही निकट है। भागवत पुराण के अनुसार वासुदेव की बारात यहां से मथुरा गई थी । बटेश्वर में भगवान कृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न और पौत्र अनिरुद्ध के नामों पर आज भी पदमनखेड़ा व औधखेड़ा नामक दो मोहल्ले है। महाभारत युद्ध के समय जब बलभद्र ने किसी का साथ न देकर तटस्थ रहने का निश्चय किया था। तब वे एकांत बास हेतु इसी पावन स्थल पर आये थे। कहते है कंस का शव यमुना में प्रवाहित हुआ था। तब बटेश्वर में आकर अटका था। तभी यहां कंस करार टीला प्रसिद्ध हुआ था, जो आज भी है। तीर्थ स्थल बटेश्वर बृज मंडल का एक भाग है। 84 कोस की परिक्रमा के अंर्तगत इसका समावेश होता है। इसी कारण बटेश्वर को सभी तीर्थो का भांजा कहा जाता है। यहां भगवान शंकर जी की पूजा का बड़ा महत्व है। काशी की तरह बटेश्वर के घाट दर्शनीय है। उन पर बने 101 मंदिर शिव भक्तों के आकर्षण के मुख्य केन्द्र बन जाते है।
समाजबंधुओं के लिए बड़ी सहूलियत
बटेश्वर में हर साल नवंबर माह में यहां राष्ट्रीय स्तर का पशु मेला लगता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्मस्थली बटेश्वर अब आगरा-इटाला रेल लाइन से भी जुड़ चुका है। सरकार की योजना बटेश्वर को उसके महत्व के अनुसार ही एक अहम धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की है। इस पर तेजी से काम चल रहा है। ऐसे में यदि इस जगह शिवहरे समाज की एक धर्मशाला विकसित हुई तो आगरा, फिरोजाबाद, इटावा ही नहीं, बल्कि दूरदराज के शिवहरे बंधुओं के लिए भी बड़ी सहूलियत होगी।

कलारों की धर्मशाला का इतिहास
श्री अविरल गुप्ता ने बताया कि यह जगह स्व. श्री मुरलीधर गुप्ता ने वर्ष 1910 में खरीदी थी, जिसका बैनामा आज भी श्री अविरल गुप्ता के पास है जो उस समय सरकारी दस्तावेजों के लिए प्रचलित फारसी भाषा में हैं। स्व. श्री मुरलीधर गुप्ता ने उस समय यह भूखंड अपने कारोबार के लिहाज से खरीदी थी। लेकिन बाद में उनके उत्तराधिकारी स्व. श्री रामस्वरूप गुप्ता ने इसे धर्मशाला के रूप मे विकसित करने की इच्छा से अपने कारोबार को वहां से हटा लिया। कुछ समय तक तो इस जगह का प्रयोग धर्मशाला के रूप में ही हुआ, जिससे यह जगह कलारों की धर्मशाला के रूप में जानी जाने लगी। नाई की मंडी मंडी निवासी स्व. श्री रामस्वरूप गुप्ता चाहते थे कि इसे एक बड़ी धर्मशाला के रूप में विकसित किया जाए।
फिलहाल इस जगह की देखभाल बटेश्वर के कपड़ा व्यापारी श्री श्री दयाशंकर शिवहरे उर्फ दयालु कर रहे हैं। श्री अविरल गुप्ता ने बताया कि उनके स्वर्गीय पिता श्री आनंद गुप्ता ने 2013 में यहां धर्मशाला के लिहाज से कुछ निर्माण कराया था। इसके तहत एक बड़ा गेट लगाया, उनकी योजना इसका मौजूदा ढांचा तुड़वा कर नई संरचना खड़ी करने की थी, कि दुर्भाग्य से उनका आकस्मिक निधन हो गया। अब वह चाहते हैं कि यहां भगवान सहस्त्रबाहु का मंदिर बने और समाज के लिए एक धर्मशाला का निर्माण करा दिया जाए।












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