शिवहरेवाणी नेटवर्क
बुरहानपुर।
शादी कैसे हो, कैसी हो…ये केवल व्यक्तिगत और पारिवारिक सवाल नहीं है, बल्कि सामाजिक प्रश्न भी हैं। आज संपन्न और धनी वर्ग के लोग अपने बच्चों की शादी में जिस तरह बेहिसाब खर्च कर रहे हैं, उससे समाज में एक विभाजन रेखा खिंचने लगी है। एक बड़े वर्ग के लिए अपने बच्चों की शादी करना चुनौतीपूर्ण सवाल बन गया है, झूठी शान की होड़ उन्हें बच्चों की शादी कर्जदार बना देती है। और गरीब तो जैसे स्वयं को समाज की मुख्यधारा से कटा हुआ महसूस करने लगा है। समाज सादगी और समानता के लक्ष्यों से भटकता नजर आ रहा है।
ऐसे में एक मंगलकारी समाचार बुरहानपुर में कलचुरी समाज के नवनिर्मित मंगल भवन से आया है। यहां हुई एक बैठक में बुरहानपुर की कलचुरी महिलाओं ने बीड़ा उठाया है शादी के रीतिरिवाजों से जुड़ी बुराइयों को समाप्त करने और शादी समारोह में सादगी को बढ़ावा देने का। मंगलभवन में बीते दिनो हैहय क्षत्रिय कलचुरी कलार समाज महिला मंडल की बैठक में सामाजिक उत्थान के लिए अहेर प्रथा, अति भोजन व्यवस्था और दहेज प्रथा जैसी बुराइयों को दूर करने का संकल्प लिया गया, ताकि समाज के सामान्य वर्ग के लोगों की भावनाओं का सम्मान किया जा सके ।
मंडल की श्रीमती सुधा चौकसे ने शिवहरे वाणी को बताया कि शादी मे वरवधु के माता पिता अपने रिश्तेदारों कपड़ों का उपहार दिया जाता है , ऐसा करने पर ही सगा रिश्तदार होना सुनिश्चित माना जाता है। इसी को अहेर प्रथा कहा जाता है। उन्होंने कहा कि अहेर को इतना जरूरी माना जाने लगा है कि गरीब वर्ग के लोगों को कर्ज लेकर अपनी इज्जत के खातिर रिश्तेदारों को कपड़े देना पडते है।
मंडल की बैठक में इसके साथ ही दहेज प्रथा का भी पूरी तरह उन्मूलन करने का संकल्प लिया गया। साथ ही शादी समारोह में बहुत भारी भोजन व्यवस्था से दूर रहते हुए दावत में कुछ चुनींदा व्यंजन परोसे जाने और थाली में जितनी जरूरत है, उतना ही भोजन लेने पर जोर दिया गया। मंडल की सभी महिलाओं ने पूर्ण सहमति जताते हुए इस पहल को आगे बढ़़ाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर सुंदरकांड का पाठ भी किया।
बैठक में डॉ उर्मिला चौकसे, चंचल चौकसे, संध्या राय, आस्था राय ,रेखा चौकसे अभिलाषा चौकसे कविता चौकसे ,शशि चौकसे ,योगिता चौकसे ,विनीता चौकसे बबीता चौकसे ,उमा चौकसे निधि जायसवाल , सुनीता भमोरे, स्नेहलता चौकसे, सरोज चौकसे ,सविता चौकसे कल्पना चौकसे आरती चौकसे रेखा चौकसे अमृता जयसवाल समेत बड़ी संख्या मे कलचुरी समाज की महिलाओं ने भाग लिया।
ताकि बच्चों की शादी में कर्जदार न बने कोई…बुरहानपुर के मंगल भवन में गूंजे मंगलकारी संकल्प
