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शिवसेना के प्रदीप जायसवाल का मंत्री बनना तय….निर्दलीय आशीष जायसवाल को मिल सकता है जीत का ईनाम

शिवहरे वाणी नेटवर्क
मुंबई।
महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन की नई सरकार में शिवसेना के नवनिर्वाचित विधायक प्रदीप जायसवाल को मंत्री पद मिलना लगभग तय माना जा रहा है, वहीं  शिवसेना से बगावत कर निर्दलीय चुने गए आशीष जायसवाल को भी मंत्री पद मिल जाए तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। प्रदीप जायसवाल जहां औरंगाबाद विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए हैं, वहीं आशीष जायसवाल ने नागपुर की रामटेक सीट से विजय हासिल की है। 

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औरंगाबाद से निर्वाचित प्रदीप जायसवाल को नई सरकार में मंत्री पद मिलना तय माना जा रहा है तो इसकी एक खास वजह है। औरंगाबाद को शिवसेना का गढ़ माना जाता रहा है लेकिन बीत 2014 के चुनाव में यह विधानसभा सीट उसके हाथ से छिन गई थी। एमआईएम के नासिर सिद्दीकी यहां से विधायक चुने गए थे। लेकिन, इस बार प्रदीप जायसवाल की जीत ने शिवसेना को उसका गौरव वापस दिला दिया है और इसी के ईनाम के रूप में उन्हें महाराष्ट् के कैबिनेट में जगह मिल सकती है।

58 वर्षीय प्रदीप जायसवाल औरंगाबाद के मेयर रह चुके हैं। साथ ही 2009 के चुनाव में विधायक निर्वाचित हुए थे और इससे पहले 11वीं लोकसभा में औरंगाबाद से सांसद भी चुने गए थे। फिलहा लोकप्रिय नेता प्रदीप जायसवाल के औरंगाबाद में रंगारंग गली स्थित आवास पर जश्न का माहौल है जहां वह  अपनी पत्नी सरोज जायसवाल और दो पुत्रों के साथ रहते हैं। 


दूसरी तरफ एडवोकेट आशीष नंदकिशोर जायसवाल ने नागपुर की रामटेक विधानसभा सीट से निर्दलीय निर्वाचित हुए हैं। दरअसल, 48 वर्षीय आशीष जायसवाल ने 2009 में इसी सीट से शिवसेना के टिकट पर चुनाव लड़ा था और विधायक निर्वाचित हुए थे। लेकिन बीते 2014 के चुनाव में यह सीट भाजपा के कोटे में चली गई थी।

इस बार आशीष जायसवाल लगातार प्रयास कर रहे थे कि यह सीट शिवसेना के कोटे में आए और उन्हें फिर चुनाव लड़ने का मौका मिले। लेकिन अंततः यह सीट इस बार भी भाजपा के ही कोटे में चली गई। इस पर आशीष जायसवाल ने विद्रोह कर दिया और निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया। उन्हें शिवसेना के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भरपूर साथ दिया और वह विधायक चुन लिए गए। 


चुनाव के नतीजे आने के बाद आशीष जायसवाल ने कहा कि सभी शिवसेना कार्यकर्ताओं ने मेरी मदद की। उन्होंने साफ किया कि वह  भाजपा- शिवसेना गठबंधन के साथ रहेंगे। ऐसे में राजनीतिक पंडितों को मानना है कि जीत के बाद भी रामटेक ने जिस तरह स्वयं को सच्चा शिवसैनिक बताया है, उससे लगता है कि उन्हें ईनाम के तौर पर नई सरकार में शिवसेना कोटे से कोई मंत्री पद मिल सकता है।


 

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