शिवहरे वाणी नेटवर्क
ऊना।
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के गांव सरोह में बीते रोज वह दृश्य अत्यंत भावुक कर देने वाला था, जब शहीद अनिल कुमार जायसवाल की पार्थिव देह को उनके 5 माह के अबोध बेटे वरुण से नमन कराया गया। अबोध वरुण अपने चाचा संदीप जायसवाल की गोद में था, जन्म के बाद से अब तक उसने पिता की गोद मे चंद घंटे ही बिताए होंगे। शहीद अनिल की दिली इच्छा थी कि वह लंबी छुट्टी लेकर आए और बेटे के साथ जी भरकर खेले। लेकिन, होनी को कुछ और मंजूर था।
सेना के राइफलमैन अनिल कुमार जायसवाल 18 जून को अनंतनाग जिले के मरहामा गांव में मुठभेड़ के दौरान आतंकियों की गोली लगने से घायल हुए थे। सेना के 92 बेस अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सेना की ओर से अनिल के पूर्व सैनिक पिता अशोक जायसवाल को इसकी जानकारी दी गई थी। घर की महिलाओं को इस बारे में कुछ नहीं बताया गया। उन्हें तो बस अनिल के घायल होने का पता था। और, तब से अनिल की पत्नी सविता, मां अनीता कुमारी और शादीशुदा बहन सपना उसके ठीक होने की दुआ मांग रहे थे। बुधवार दोपहर बाद तिरंगे में लिपटी शहीद की पार्थिव देह सरोह गांव पहुंची तो कोहराम मच गया।
अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए पूरा गांव उमड़ पड़ा। पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। चचेरे भाई संदीप जायसवाल ने शहीद की पार्थिव देह को मुखाग्नि दी। इस दौरान भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे गूंज उठे। हिमाचल प्रदेश सरकार ने शहीद के परिवार को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि शहीद के परिवार को राज्य सरकार की ओर से 20 लाख रुपये की सहायता प्रदान करने के साथ ही उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी भी दी जाएगी।
शहीद अनिल जायसवाल के दादा स्व. श्री प्रभुदयाल जायसवाल स्वतंत्रता सेनानी थे। 16 जून 1992 को जन्मे शहीद अनिल जायसवाल 15 जुलाई 2013 को सेना में भर्ती हुए थे। करीब 2 साल पहले ही वे सविता से परिणय सूत्र में बंधे थे। शहीद अनिल ने 7 जून को ही घर से वापसी की थी। वादा किया था कि जल्द ही दोबारा लौटकर अपने मासूम बेटे के साथ जमकर समय बिताएंगे। लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था।
जब शहीद अनिल जायसवाल को अबोध बेटे वरुण ने किया नमन..हर आंख हो गई नम
