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चीरा न कट…डा. अवधेश जायसवाल की टीम ने ऐसे निकाला आंख से ट्यूमर

शिवहरे वाणी नेटवर्क
लखनऊ।
आंख में ट्यूमर एक ऐसी घातक बीमारी है जो आंखों की रोशनी छीन सकती है, और यहां तक कि जान भी ले सकती है। यह एक तरह का कैंसर है जिसका उपचार काफी जटिल और महंगा होता है। लेकिन लखनऊ पीजीआई में न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डा. अवधेश  जायसवाल के नेतृत्व में एक पीड़ित की अनोखी सर्जरी की गई जिसके तहत बिना चीरा लगाए नाक के रास्ते से आंख का ट्यूमर निकाल लिया गया। दावा किया जा रहा है  कि उत्तर प्रदेश में संभवतः पहली बार यह सर्जरी की गई और यह बहुत महंगी भी नहीं है। 

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लखीमपुर  की एक महिला के आंख में ट्यूमर था। परिजन उसे 12 फरवरी को पीजीआई लाए जहां न्यूरो सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने उसे देखा । प्रोफेसर डा. अवधेश जायसवाल और टीम के अन्य चिकित्सकों के सामने दो विकल्प थे, एक तो परंपरागत तरीके से माथे की हड्डी काटकर आंख के ट्यूमर को निकाला जाए. जो महंगा होने के साथ ही काफी जटिल भी है। दूसरा विकल्प एक नई इंडोस्कोपी विधि थी, जिसमें नाक के रास्ते से ट्यूमर निकाला जा सकता है। चूंकि ट्यूमर करीब डेढ़ इंच का था, लिहाजा उसे सहजता से नाक के रास्ते से निकाला जा सकता था। जोखिम केवल इतना था कि यह बहुत लेटेस्ट टैक्नीक है और पीजीआई के चिकित्सकों ने कभी आंख के ट्यूमर पर इसे आजमाया नहीं था। 


फिर भी चिकित्सकों ने दूसरी विधि से ट्यूमर निकालने का फैसला किया। 15 फरवरी को इंडोस्कोपी के जरिए बिना चीरा लगाए नाक के रास्ते करीब डेढ़ इंच का ट्यूमर निकाल दिया गया। करीब डेढ़ घंटे आपरेशन चला जिसमें डॉ. अवधेश जायसवाल के अलावा पीजीआई के ही डॉ. अनंत मल्होत्रा, डॉ. कुमुदिनी शर्मा, डॉ. कुतंल दास, डॉ. शशि, डॉ. देवेंद्र भी शामिल रहे। तब से मरीज लगातार डाक्टरों की देखरेख में है। आज उसकी स्थिति काफी बेहतर है। 


डॉ. अवधेश जायसवाल बताते हैं पहले आंख के ट्यूमर को दिमाग को ओपन करके निकाला जाता था। इसमें 15 इंच का चीरा लगाकर माथे की हड्डी को काटकर आंख के ट्यूकर को निकाला जाता था। लेकिन नई इडोस्कोपी विधि ने इसे आसान बना दिया है। फिलहाल पहले सफल आपरेशन से सभी चिकित्सक आत्मविश्वास से लबरेज हैं। ऑपरेशन में करीब 42 हजार रुपये का खर्च आया है।
 

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