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काजल जायसवाल बनीं डिप्टी एसपी तो दिव्या राय सहायक संचालक प्रशासन

शिवहरे वाणी नेटवर्क
चंपारण/मंडला।
मध्य प्रदेश और बिहार की प्रांतीय प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षा में कलचुरी युवाओं ने शानदार कामयाबी हासिल की है। बिहार में जयंत जायसवाल 48वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलक्टर बन गए हैं, वहीं चंपारण की काजल जायसवाल का सलेक्शन डिप्टी एसपी पद के लिए हुआ  हैं। मध्य प्रदेश के मंडला की दिव्या राय  का चयन सहायक संचालक प्रशासन के पद पर हुआ है। खास बात यह है कि मंडला के हर्षल चौधरी ने एमपीपीएससी परीक्षा टॉप कर डिप्टी कलक्टर का ओहदा हासिल कर लिया है, जिसका विस्तृत समाचार शिवहरे वाणी पर आप पढ़े चुके हैं। 
बिहार में चंपारण जिले के कस्बा  केसरिया की काजल जायसवाल ने बीपीएससी में 313 रैंक हासिल की है। केसरिया निवासी शत्रुघ्न प्रसाद जायसवाल की पुत्री काजल ने दिल्ली में रहकर ग्रेजुएशन किया और वहीं रहते हुए बिहार प्रशासनिक सेवा परीक्षा की तैयारी की। और, पहले ही प्रयास में बीपीएससी की परीक्षा में शानदार कामयाबी हासिल की। काजल ने प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा केसरिया में ही प्राप्त की।  केसरिया को विकास और शिक्षा की दृष्टि से काफी  पिछड़ा माना जाता है, और ऐसे में काजल की सफलता ने क्षेत्र के युवाओं को प्रेरणा दी है कि कोशिशों में दम है तो बाधाएं खुद ही रास्ता छोड़ने को बाध्य हो जाती हैं।
कुछ ऐसी ही कहानी मध्य प्रदेश के छोटे से शहर मंडला में रहने वाली दिव्या राय की है।  मध्य प्रदेश लोकसेवा परीक्षा 2018 में दिव्या राय का चयन सहायक संचालक प्रशासन पद पर हुआ है और उन्हें अन्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में तैनाती मिली है। मध्य प्रदेश विद्युत विभाग में लाइनमैन श्री मोतीराय को अपनी होनहार बेटी पर गर्व है। शिवहरे वाणी से बातचीत में उन्होंने बताया कि बेटी दिव्या पढ़ाई में शुरू से ही होनहार रही है।  मोतीरायजी का कहना है कि अपनी छोटी सी नौकरी की वजह से उन्हें कभी इतना समय नहीं मिला कि बेटी की पढ़ाई पर ध्यान दे सकें, लेकिन दिव्या अपने सीमित संसाधनों व आर्थिक सीमाओं में रहते हुए लगातार तैयारी में जुटी रही। नतीजा यह कि उसे लगातार कामयाबी मिल रही है। 
श्री मोती राय ने बताया कि एमपीपीएससी की परीक्षा में दिव्या की यह तीसरी सफलता है। इससे पहले 2014 में पहली बार एमपीपीएससी परीक्षा से ही उनका चयन सहायक श्रम अधिकारी के पद पर हुआ था, 2017 में वह नायब तहसीलदार के पद पर चुनी गईं। वर्तमान में वह शहडोल में सहायक श्रम अधिकारी के पद पर हैं। दिव्या की मां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम हैं। बेटी की कामयाबी ने जैसे उनकी सारी मुश्किलों और मलालों को दूर कर दिया है। 
 

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