शिवहरे वाणी नेटवर्क
पश्चिमी चंपारण।
प्रतिभाएं छिपाए नहीं छिपतीं। और, मौका मिलते ही उस मुकाम पर पहुंच ही जाती हैं, जिसके वे योग्य होती हैं। बिहार में पश्चिमी चंपारण के गौनाहा विकासखंड के कुंदन जायसवाल को ही लीजिये। इस कसबे से निकलकर उन्होंने आईआईटी कानपुर की राह तय की, वहां बीटेक और एमटेक में गोल्ड मैडल हासिल किया। और, अब विश्व की बड़ी कंपनियों में शुमार कैटर पीलर के लिए सलेक्ट हुए है।

गौनाहा के एक साधारण कलचुरी परिवार के कुंदन जायसवाल का चयन आईआईटी कानपुर में हुए कैंपस सलेक्शन के जरिये हुआ है। एक बड़ी अमेरिकी कंपनी में चयन की खबर से कुंदन के पिता विजय जायसवाल और मां प्रभावती देवी समेत पूरे परिवार की खुशियो का ठिकाना नहीं है। कुंदन जायसवाल को जॉब के लिए अमेरिका जाना होगा, और वहां कुंदन को अमेरिकन यूनिवर्सिटी में एयरो स्पेस में पीएचडी करने के सपने को पूरा करने मौका भी मिलेगा।

कुंदन जायसवाल अपनी सफलता का श्रेय अपने स्वर्गीय दादा सुरेन्द्र जायसवाल एवं चाचा उदय जायसवाल, संतोष जायसवाल देते हैं। साथ ही दादी, माता-पिता, रूस में डॉक्टर की पढ़ाई करने वाले चाचा डॉ. संजय जायसवाल के मार्ग-दर्शन को भी अपनी कामयाबी का आधार बताया।

कुंदन अपनी प्रोफेसर डॉ अभिजीत कुमारी का आभार जताने से भी नहीं चूकते। वह कहते है कि प्रोफेसर डा. अभिजीत कुमारी ने दोर्णाचार्य की भांति उन्हें हमेशा लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित किया।

हालांकि कुंदन के सपनों की मंजिल यहीं खत्म नहीं होती। वह कहते हैं कि अभी भी मुझे और मंजिल तय करना है एवं अपने अधूरे सपने को पूरा करना है। वे अधूरे सपने क्या हैं, कुंदन यह तो नहीं बताते लेकिन फिलहाल चंपारण को अमेरिका में पहचान दिलाना उनका सहम सपना है।

गौनाहा के साधारण व्यवसायी के पुत्र कुंदन जायसवाल की प्रारंभिक शिक्षा राजकीय प्राथमिक विद्यालय, मंगुराहां में हुई। मैट्रिक की परीक्षा राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल, बैंगलोर, इंटरमीडिएट मितल इंटरनेशनल स्कूल कोटा, राजस्थान से किया।

2013 में उनका चयन आईआईटी कानपुर के लिए हुआ। वहां एयरोस्पेस इंजीनियरिंग को चुना। 2018 में आईआईटी से बीटेक एवं एमटेक में 98 प्रतिशत अंक से उत्तीर्ण हुए, और गोल्ड मैडल हासिल किया।
(दैनिक जागरण में प्रकाशित समाचार से इनपुट)









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