शिवहरे वाणी नेटवर्क
भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले दिनों आहूत ‘सहस्त्रबाहु कथा एवं महायज्ञ’ की सफलता ने कलचुरी समाज में अपनी पहचान को लेकर एक नई चेतना का संचार किया है। इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए ‘श्री सहस्त्रबाहु सेवा एवं उत्सव समिति’ ने ‘घर-घर विराजे सहस्त्रबाहु भगवान’ नाम से एक सामाजिक अभियान का श्रीगणेश किया है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक कलचुरी परिवार को अपने घर में भगवान सहस्त्रबाहु की प्रतिमा स्थापित करने और प्रत्येक माह, शुक्लपक्ष की सप्तमी को अपने घर में परिवार के बीच अथवा किसी अन्य स्थान पर सामूहिक रूप से ‘श्री सहस्त्रार्जुन जी महाराज कथा’ का आयोजन करने को प्रेरित किया जाएगा।

इससे भी खास बात यह है कि महेश्वर धाम को तीर्थस्थल के रूप मे घोषित करने की जो मांग अब तक सरकार से की जाती रही है, अब उसे मूर्त रूप देने का जिम्मा भी कलचुरी समाज ने उठा लिया है।
समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कलचुरी सेना के संस्थापकों में शामिल श्री विपिन राय ने शिवहरे वाणी को यह जानकारी दी है। समिति एवं कलचुरी सेना के कोषाध्यक्ष श्री सुधीर राय के परिवार ने विगत सप्तमी को अपने घर में सहस्त्रार्जुनजी महाराज की कथा एवं पूजन कर इसकी शुरूआत भी कर दी है। जैसा कि विपिन राय ने बताया, अब प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी को कलचुरी समाजबंधु अपने पर पारिवारिक रूप से अथवा किसी अन्य धार्मिक या सामाजिक स्थल पर सामूहिक रूप से सहसत्रार्जुनजी महाराज की कथा एवं पूजन का कार्यक्रम करेंगे।
साथ ही समिति इस दिन भोपाल के किसी भी धार्मिक स्थल पर सहस्त्रार्जुनजी महाराज की कथा एवं पूजा-अर्चना कर भंडारे का आयोजन करती रहेगी। समाज से और सभी सामाजिक संगठनों की ओर से इस पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं प्राप्त हो रही है।
शास्त्रों के जानकारों का कहना है कि कुलप्रवर्तक या कुलदेवता दरअसल हमारे सुरक्षा आवरण होते हैं जो किसी भी बाहरी बाधा एवं नकारात्मक ऊर्जा से व्यक्ति की रक्षा करते हैं। इस लिहाज से, इस पहल से कलचुरी समाज की भावी पीढ़ी को न केवल अपने कुलप्रवर्तक के बारे में जानकारी होगी, बल्कि शास्त्रों की मानें तो आध्यात्मिक और पारलौकिक शक्तियां भी उनकी रक्षा के लिए सक्रिय होंगी।
इस पहल का सबसे अहम और व्यवहारिक बिंदु यह है कि कलचुरी समाज अब अपने दम पर महेश्वर धाम को तीर्थस्थल के रूप में प्रतिष्ठापित करेगा। इसके लिए कलुचरी समाजबंधु नियमित अंतराल पर महेश्वरधाम जाकर वहां स्थित राजराजेश्वर मंदिर मे भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन के दर्शन एवं पूजा-अर्चन करेगा। इससे महेश्वर धाम पर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और वह तीर्थस्थल के रूप में विकसित हो सकेगा। श्री विपिन राय के मुताबिक, समाज के लोगों को शुक्ल पक्ष की सप्तमी पर महेश्वर धाम के दर्शन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जल्द ही इस पहल को पूरे मध्य प्रदेश और फिर पूरे देश में विस्तारित किया जाएगा।
बता दें कि भगवान श्री सहस्त्रबाहु अर्जुन का जन्म कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी को हुआ था, इसीलिए प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की सप्तमी को भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन की पूजा-अर्चना के लिए एक विशेष तिथि माना जा रहा है। ढाई हजार वर्ष पुराने महेश्वर नगर को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘पवित्र नगरी’ का दर्जा प्राप्त है।
नर्मदा नदी के किनारे बसे इस नगर में भगवान सहस्त्रबाहु ने रावण को बंधक बनाया था। पुराणों में वर्णन है की सहस्त्रार्जुन की रानियां रावण के दस शीशों पर दीपक जलाती थीं क्योंकि दीपक सहस्त्रार्जुन को बहुतप्रिय थे ! आज भी महेश्वर में स्थित श्री राजराजेश्वर मंदिर में अखंड 11 दीपक ज्योति पुरातनकाल से प्रज्जवल्लित है और मंदिर में श्रद्धालु देसी घी- प्रसाद के साथ अवश्य चढातें है !
बताते हैं कि महेश्वर में ही आदिगुरु शंकराचार्य तथा पंडित मण्डन मिश्र का प्रसिद्ध शास्त्रार्थ भी हुआ था। वैसे महेश्वर अपने सुंदर और भव्य घाट तथा महेश्वरी साड़ियों के लिये प्रसिद्ध है। घाट पर अत्यंत कलात्मक मंदिर हैं। यह नगर मध्य प्रदेश के खरगौन जिले की एक तहसील का मुख्यालय भी है।
