वुमन पॉवर

आगे आईं कलार समाज की बेटियां..बंद करके रहेंगे मृत्युभोज

शिवहरे वाणी नेटवर्क
नागपुर/आगरा
हिन्दू समाज में जब किसी परिजन की मौत होती है, तो कई रस्में की हैं। और, सबसे आखिरी रस्म होती है त्रयोदशी संस्कार। इसमें गंगाजली पूजन और ब्राह्मण भोजन कराया जाता है। यह हिंदू समाज में वैदिक काल से होता आ रहा है, लेकिन संभवतः मध्ययुग से त्रयोदशी संस्कार के साथ मृत्युभोज की परंपरा चल निकली है। प्रगतिशील लोग मृत्युभोज का विरोध करते रहे हैं, और लगभग हर जाति में इस प्रथा के विरोध की धारा समानान्तर चल रही है। लेकिन, कलचुरी समाज में मृत्युभोज की प्रथा को समाप्त करने का अभियान अन्य समाजों में चल रहे ऐसे अभियानों के मुकाबले अधिक सफल होने की संभावना नजर आती है। वजह यह है कि इस अभियान में अब कलचुरी महिलाएं तेजी से आगे आ रही हैं। 
कहते हैं कि वैज्ञानिक प्रगति के साथ दृष्टिकोण का वैज्ञानिक होते रहना ही सही मायनों में आधुनिकता है।  कलचुरी समाज की महिलाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है और इसके माध्यम से वे समाज को लेकर अपने सुधारवादी विचारो को आगे रख रही हैं। 'कलार समाज की बेटियां' नाम से इस व्हाट्सएप ग्रुप में घरेलू हिसा और कन्या भ्रूण हत्या जैसे कई मसलों पर विचारों का आदान-प्रदान होता है। कुछ समय से मृत्युभोज की प्रथा के उन्मूलन पर भी गंभीर मंथन भी इस पर हो रहा है। तमाम चिंतन के बाद अब वे एक्शन में हैं। ग्रुप की उन सदस्यों से सहमति मांगी गई है जो मृत्युभोज को कुरुति समझती हैं, उनकी सूची तैयार की जा रही है। अभियान के अगले चरण में सदस्यों से मृत्युभोज त्यागने का संकल्प लेने को कहा जाएगा, और मृत्युभोज त्यागने वालों को सूचीबद्ध किया जाएगा। तीसरे चरण में मृत्युभोज त्यागने वालों की फोटो समेत एक होर्डिंग उनके शहर में लगाया जाएगा और सोशल मीडिया माध्यमों के अलावा अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में उनके फोटो के बड़े-बड़े फ्लेक्स लगाए जाएंगे। ताकि लोगों में इसे लेकर जागरूकता आए।
व्हाट्सएप ग्रुप 'कलार समाज की बेटियां' की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती स्नेहा राय ने इस बारे में शिवहरे वाणी को बताया कि मृत्युभोज के खिलाफ कलचुरी समाज की मुहीम कोई नई नहीं है। राष्ट्रीय कलचुरी एकता महासंघ और विभिन्न संगठन भी इस दिशा में शुरू से ही प्रयासरत हैं।  मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के तेंदुखेड़ा में वर्ष 2003 से मृत्युभोज पूरी तरह बंद है। नागपुर में जायसवाल वर्ग के कई परिवारों ने मृत्युभोज को त्याग दिया है। नागपुर में रहनेवालीं स्नेहा राय राष्ट्रीय कलचुरी एकता महासंघ की नागपुर जिला महिला अध्यक्ष हैं। वह बताती हैं कि नागपुर में कलचुरी समाज में मृत्युभोज पर मीठा बनवाना बंद हो गया है। उन्होंने बताया कि ग्रुप की कोई भी सदस्य किसी कार्यक्रम में जाती है तो मृत्युभोज को समाप्त करने पर उसकी स्पीच जरूर होती है। समाज से अपील की जाती है कि वे मृत्युभोज को त्याग दें, त्रयोदशी संस्कार में कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि यह वैदिक संस्कार है। इसका आदर्श रूप यही है कि गंगाजली पूजन किया जाए, ब्राह्मणों को सादा भोजन कराया जाए। त्रयोदशी संस्कार में आने वाले लोग मृतक को श्रद्धांजलि प्रदान करें, और गंगाजली पूजन का प्रसाद देकर उन्हें विदा किया जाए।
स्नेह राय ने बताया कि मृत्युभोज की प्रथा को समाप्त करने के लिए महिलाओं का सामने आना एक शुभ संकेत है। ऐसा अनुभव किया गया है कि इस तरह की प्रथाओं के प्रति पुरुषों का रवैया बहुत कट्टर नहीं होता, लेकिन महिलाएं चूंकि अधिक धार्मिक होने के साथ ही धर्मभीरू भी होती हैं, लिहाजा वे प्रथाओं को लेकर अधिक दृढ़ नजर आती हैं। सुश्री राय ने बताया कि श्रीमती कृष्णा उज्जवनै इस व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन हैं, बालाघाट के सुनील शिवहरे का इसमें पूरा सहयोग है जिसकी वजह से अधिक से अधिक कलचुरी महिलाएं इस ग्रुप से जुड़ रही हैं। 
 

Exit mobile version