आगरा।
सिकंदरा स्थित नीरव निकुंज में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथा मर्मज्ञ स्वामी श्री अरविंद जी महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का अदभुत वर्णन किया। पंडाल में उपस्थित भागवत प्रेमी भगवान के जन्म की खुशी में झूम उठे, ऐसा प्रतीत हुआ कि मानो पंडाल के अंदर हजारों बरस पहले का ब्रज एक बार फिर जीवंत हो गया हो।
श्री अरविंद महाराज ने आज की कथा का प्रारंभ प्रहलाद चरित्र से किया. उन्होंने कहा कि प्रहलाद का प्रसंग इस बात को सिद्ध करता है कि राक्षस कुल में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी परमात्मा को प्राप्त कर सकता है। आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के लिए ईश्वर को छोड़कर सारे संबंध मिथ्या हैं। यह भी सही है कि भगवान अपने भक्त के लिए कोई भी रूप कहीं भी धारण करने को तैयार रहते हैं। नरसिंह अवतार के प्रसंग से यह बात सिद्ध होती है।
इस दौरान गजेंद्र मोक्ष, वामनवतार चरित्र और समुद्र मंथन के प्रसंगों का वर्णन करते हुए श्री अरविंदजी महारा ने राम के चरित्र का भी मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या मे अवतरित होकर भगवान राम ने सत्य का पालन करते हुए समाज को पितृ भक्ति, भ्रातृ प्रेम और प्रजा के कल्याण के संदेश दिए हैं। कथा के अंत में भगवान श्रीकृष्ण की प्राकट्य कथा के वर्णन लोगों को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण प्रकट होते हैं देवकी के गर्भ से और वासुदेव के द्वारा गोकुल पधारते हैं। सभी ब्रजवासी उनके आगमन की खुशियां मनाते हैं। धन्य है यशोदा का वात्सल्य, जिसकी गोद में त्रिलोकीनाथ स्वयं पधारे हैं। पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद देखते ही बन रहा था। महिलाएं भक्ति मे विलीन होकर परम-आनंद के भाव से झूम रही थीं।
मुख्य जजमान श्री सुरेशचंद्र शिवहरे एवं रवि शिवहरे ने बताया कि रविवार को श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा का वर्णन होगा। इस दौरान छप्पन भोग के दर्शन भी होंगे। उन्होंने सभी भागवत प्रेमियों से भागवत कक्षा का आनंद लाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।