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दाऊजी मंदिर में होली से पहले गोवर्धन पूजा और अन्नकूट प्रसाद; भागवत कथा का आज अंतिम दिन; कल पूर्णाहुति एवं भंडारा

आगरा।
शिवहरे समाज की धरोहर दाऊजी मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन मंगलवार को ‘गोवर्धन पूजा, कंस वध एवं रुक्मणि विवाह’ प्रसंगों का वर्णन किया गया। कथा के बीच-बीच में मंडली के कलाकारों और जजमान परिवार के बच्चों की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। और, अंत में अन्नकूट के परसाद ने भक्तों को निहाल कर दिया।
आपको बता दें कि कथा का आयोजन नाई की मंडी के गुप्ता (शिवहरे) परिवार द्वारा किया जा रहा है। परिवार के श्री विकास गुप्ता अपनी धर्मपत्नी श्रीमती रेनू गुप्ता के साथ परीक्षित बने हैं। दाऊजी मंदिर के पुजारी रामू पंडितजी (डा. रामदास शास्त्री) के पुत्र पं. आकाश मुदगल व्यासपीठ से कथा कह रहे हैं। आज 20 मार्च को कथा के अंतिम दिन ‘सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष और 18 पुराणों का वर्णन’ किया जाएगा। कल 21 मार्च को ‘पूर्णाहुति एवं भंडारे’ के साथ कथा सप्ताह का समापन होगा। जजमान आकाश गुप्ता, शुभम गुप्ता एवं रजत गुप्ता एवं आयोजन प्रबंधक संतोष कुमार गुप्ता (कोषाध्यक्ष, दाऊजी मंदिर समिति) ने सभी समाजबंधुओं से आज अंतिम दिन के कथा-प्रसंगों का श्रवण-लाभ प्राप्त करने का अनुरोध किया है।
छठवें दिन श्रीमद भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए कथावाचक पं. आकाश मुदगल ने भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते कहा कि जहां सत्य एवं भक्ति का समन्वय होता है, वहां भगवान का आगमन अवश्य होता है। जब भगवान श्रीकृष्ण नंद गांव पहुंचे तो देखा कि गांव में इंद्र पूजन की तैयारी में 56 भोग बनाए जा रहे हैं। नंदबाबा ने श्रीकृष्ण को बताया कि इन्द्र वर्षा के राजा हैं और उन्हीं की कृपा से बारिश हो सकती है। इसलिए उन्हें खुश करने के लिए यह पूजन हो रहा है। इस पर श्रीकृष्ण ने इंद्र के लिए हो रहे यज्ञ को बंद करा दिया और कहा कि जो व्यक्ति जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल मिलता है। इससे इंद्र का कोई मतलब नहीं है। ऐसा होने के बाद इंद्र गुस्सा हो गए और भारी बारिश करना शुरु कर दिए। नंद गांव में इससे त्राहि-त्राहि मचने लगी तो भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को ही उठा लिया। नंद गांव के लोग सुरक्षित हो गए। इसके बाद से ही गोवर्धन पूजा का क्रम शुरु हुआ। अन्त में आरती के पश्चात सभी को छप्पन भोग का दिव्य प्रसाद वितरित कराया गया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में महिला-पुरूष पहुंचे।
कथा में दाऊजी मंदिर समिति के अध्यक्ष बिजनेश शिवहरे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेंद्र राज शिवहरे, महासचिव आशीष शिवहरे (जिज्ञासा पैलेस), सुगम शिवहरे समेत खासी संख्या में परिवारीजन एवं समाजबंधु उपस्थित रहे।

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