शिवहरेवाणी नेटवर्क
बंगलुरू।
डिजिटल इंडिया की परिकल्पना के साकार होने में भाषा एक बड़ी बाधा साबित हो रही है। दरअसर भारत में हर कोई तो अंग्रेजी जानता नहीं है, लिहाजा ऐसे लोगों को डिजिटल लेनदेन में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, यहां तक कि बेसिक ऑनलाइन आर्डर करना भी उनके लिए चुनौती बन जाता है।
लेकिन, कोलकाता के सचिन जायसवाल ने Niki नाम से एक ऐसा एप तैयार किया है जो क्षेत्रीय भाषा जानने वाले (यानी अंग्रेजी न जानने वाले) लोगों के लिए ऑनलाइन खरीददारी और डिजिटल लेनदेन की प्रक्रिया को आसान कर रहा है। देशभर में इसके यूजर्स की संख्या 20 लाख से अधिक हो चुकी है, और लॉकडाउन लागू होने के बाद यह संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है।
सचिन जायसवाल ने आईआईटी खड़गपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया है और वर्तमान में बेंगलुरू में अपनी धर्मपत्नी कीर्थना वय्यैसी के साथ रहते हैं। मूल रूप से हैदराबाद निवासी कीर्थना स्वयं भी आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए हैं और वर्तमान में सेल एनालिटिक्स में सीईओ हैं।
सचिन बताते हैं कि यह एप तैयार करने की प्रेरणा उन्हें अपने घर से ही मिली है। उन्होंने देखा कि खुद उनकी मां और परिवार के अन्य सदस्यों को ऑनलाइन लेनदेन करने में बहुत दिक्कत होती थी, बेसिक प्रोडक्ट्स के आर्डर नहीं कर पाते थे। हारकर एक ही रास्ता बचता था..बाजार जाकर खरीदारी करना। तब उन्हें लगा कि हमें एक ऐसा प्लेटफार्म तैयार करना चाहिए जहां अंग्रेजी न जानने वाले लोग भी जरूरत होने पर अपनी स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में संवाद कर आसानी से आर्डर दे सकें। यह बात 2014 की है।
आईआईटी खड़गपुर के 2011 के पासआउट सचिन ने अपने सहपाठियों केशव परवासी, नितिन बाबेल और शिशिर मोदी से संपर्क किया और ऐसा एक एप डेवलप करने में जुट गए। शुरुआत में रॉनी स्क्रूवाला और रतन टाटा ने इस प्रोजेक्ट की फंडिंग की। 2015 में Niki एप डेवलप हो गया, और उसी साल इसे लांच भी कर दिया गया। अब तक इस प्लेटफार्म पर चार भाषाएं उपलब्ध हैं-इंग्लिश, हिंदी, तमिल और बंगाली।
सचिन बताते हैं कि शुरू में उनकी टीम को अपने साफ्टवेयर में इन भाषाओं को शामिल करने और यूजर्स के लिए इसे आसान बनाने में खासी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। सचिन बताते हैं कि हमारे देश में कितने लोग कौन सी भाषा बोलते हैं, इसका डेटा तो विभिन्न प्लेटफार्म्स पर यह डेटा पहले से उपलब्ध था। असली चुनौती नेचुरल लेंग्वेज प्रोसेसिंग के साथ डायलॉग मैनेजमेंट इंजन को डेवलप करने की थी जिसकी हर स्टेप पर यूजर्स से संवाद करने में मुख्य भूमिका होती है। इसमें टीम को बहुत मेहनत करनी पड़ी और वक्त भी काफी लगा।
सचिन बताते हैं कि हमारी टीम ने इस बात का खास ध्यान रखा कि एप और यूजर्स के बीच होने वाला संवाद बहुत सहज लगें, और कहीं से भी ऐसा न लगे कि यह अंग्रेजी वाक्यों या शब्दों का महज अनुवाद भर हैं।
Niki ऐप को लांच करने के कुछ ही साल बाद, जब सचिन की टीम ने सर्वे किया तो महसूस हुआ कि अब एप में वॉयस फीचर भी जोड़ दिया जाना चाहिए। क्योंकि, अंग्रेजी में टाइप करना हर किसी के लिए आसान नहीं होता और ऐसे में वॉयस कमांड उनके लिए मददगार रहेगी। ऐसा किए जाने के बाद Niki एप ने अब ऑनलाइन लेनदेन और खरीदारी को हर किसी के लिए बहुत आसान बना दिया है।
सचिन बताते हैं कि टीयर 2 और टीयर 3 शहरों से उन्हें जबरदस्त रेस्पांस मिल रहा है। खासतौर पर लॉकडाउन के दौरान ऐप यूजर्स की संख्या में खासी वृद्धि हुई है। वर्तमान में इसके 20 लाख से अधिक यूजर्स हैं। इनमें से 95 फीसदी यूजर्स दूसरे और तीसरे श्रेणी के शहरों से हैं। उम्मीद है कि भारत के विभिन्न हिस्सों में भी इसे और विस्तार मिलेगा। सचिन बताते हैं कि हम इसमें 11 और भाषाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं जिनमें तेलगु, मलयालम, ओडीसा, कन्नड, मराठी भी शामिल हैं।
