आगरा।
ममता का भाव पर कंस का भय हावी था। बाल कृष्ण को पूतना से छिपाए रखने के जतन में मां यशोदा लाला की छठी करना ही भूल गईं थी। बाद में कन्हैया की छठी उनके जन्म के 364 दिन बाद और पहले जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले हो सकी। लेकिन, भगवान की तिथियां तो भक्तों की उंगलियों पर रहती हैं जिसमें भूल-चूक की गुंजाइश ही नहीं है। बुधवार को आगरा में शिवहरे समाज की प्रमुख धरोहर दाऊजी मंदिर में कान्हा की छठी परंपरागत तरीके से मनाई गई। समाज की एक अन्य धरोहर श्री राधाकृष्ण मंदिर, लोहामंडी में गुरुवार 25 अगस्त को सायं 6.30 बजे से मनाई जाएगी।
दाऊजी मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री बिजनेश शिवहरे और उनकी कार्यकारिणी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की उपस्थिति में कान्हा की छठी पूजकर उन्हें कढ़ी-चावल का भोग लगाया गया। इससे पूर्व शाम से ही मंदिर परिसर में छठ की बधाइयां गूंजने लगीं। मंदिर में नियमित रूप से पूजा अर्चना को आने वाली सर्वसमाज की महिलाओं ने छठ की बधाइयों का सामूहिक गायन किया। शाम सात बजे भगवान की आऱती की गई जिसके बाद मंदिर के पुजारी रामू पंडितजी ने भगवान श्रीकृष्ण की छठ की कहानी और उसके महात्म का बखान किया। भगवान को कढ़ी-चावल, बाजरा की खिचड़ी, गड्ड की सब्जी और पूड़ी का भोग लगाया गया। जिसके बाद भक्तों को कढ़ी-चावल का प्रसाद वितरित हुआ।
मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाजबंधुओं के लिए मंदिर मे ही बैठाकर खिलाने की व्यवस्था की गई थी। समारोह में वरिष्ठ उपाध्यक्ष धर्मेंद्र राज शिवहरे, महासचिव आशीष शिवहरे (जिज्ञासा पैलेस), कोषाध्यक्ष संतोष गुप्ता, उपाध्यक्ष नवनीत गुप्ता, सचिव वीरेंद्र गुप्ता एडवोकेट, उपकोषाध्यक्ष सुनील गुप्ता, वरिष्ठ सदस्य धर्मेश शिवहरे एडवोकेट, हरीश शिवहरे गुड़ियल, विजय शिवहरे (सिकंदरा), प्रमोद गुप्ता, महेशचंद्र शिवहरे, मोतीलाल शिवहरे, मनोज शिवहरे (मारुति एस्टेट) के अलावा धीरेंद्र शिवहरे, संजय शिवहरे समेत कई समाजबंधु उपस्थित रहे।
दाऊजी मंदिर में गूंजी कान्हा की छठ की बधाइयां; कढ़ी-चावल का प्रसाद पाकर निहाल हुए भक्त; राधाकृष्ण मंदिर में 25 को छठ महोत्सव
