हमीरपुर।
हमीरपुर जिले के चर्चित सपा नेता केशव बाबू शिवहरे ने अब अपने परिवार के साथ भाजपा का दामन थाम लिया है। डिप्टी सीएम बृजेश पाठक एवं भाजपा के पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष ने केशव बाबू शिवहरे के अलावा सपा से जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं उनकी बहू मधु शिवहरे और पुत्र दीपक शिवहरे को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
बता दें कि पुलिस ने हाल ही में केशव बाबू शिवहरे, उनके भाई विष्णु शिवहरे और पुत्र दीपक शिवहरे पर गैंगस्टर ऐक्ट में बड़ी कार्रवाई करते हुए 142 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति कुर्क की थी। ऐसे में केशव बाबू के भाजपा में जाने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ लोग यह भी मान रहे हैं कि केशव बाबू ने खुद को बचाने के लिए भाजपा का दामन थामा है। केशव बाबू के खिलाफ हमीरपुर सहित अन्य प्रदेशों में कुल 22 मामले दर्ज हैं, जिसमे गैंग बनाकर समाज में नशे का भारी मात्रा में व्यवसाय करना, वंचित-शोषितों को डरा-धमकाकर जबरन खनन संबंधी जमीनों की रजिस्ट्री कराने, मारपीट, गालीगलौज व जान से मारने की धमकी, हत्या, हत्या के प्रयास जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। वहीं उनके पुत्र दीपक शिवहरे के खिलाफ 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि भाई विष्णु शिवहरे पर नौ आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने बीते दिनों बड़ी कार्रवाई कर महोबा में केशव बाबू शिवहरे के पांच क्रेशर प्लांट, एक दर्जन बेशकीमती मकान, 42 वाहन, सैकड़ों बीघा खेत के लावा एक महाविद्यालय समेत तीन कालेज सीज किए थे। साथ ही तीनों के बैंक खाते भी सीज किए थे। खास बात यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई करने के बाद पुलिस ने पुलिस केशव बाबू शिवहरे समेत तीनों आरोपियों के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर ली थी। सपा के लोकसभा प्रभारी राजबहादुर पाल ने आरोप लगाया था कि यह कार्रवाई राजनैतिक षड़यंत्र के तहत भाजपा के इशारे पर हो रही है। ऐसे में यह देखना मजेदार होगा कि केशव बाबू शिवहरे के भाजपा जाने के बाद पुलिस का रुख क्या रहता है।

केशव बाबू शिवहरे बड़े व्यवसायी होने के साथ ही क्षेत्र की राजनीति में भी बड़ा नाम हैं। राजनीति में उनकी सक्रियता वर्ष 2004-05 से शुरू हुई। उन्होंने सबसे पहले अपने भाई की पत्नी मधु शिवहरे को सिसोलर क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जितवाया और उसके बाद सपा के टिकट से जिला पंचायत का अध्यक्ष भी बनावाया। बाद में 2007 में बसपा शासनकाल में मधु शिवहरे के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित हुआ था। वहीं केशव बाबू खुद वर्ष 2012 के आम विधानसभा चुनाव में राजनीति के मैदान में खुलकर आए और सदर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा। इसके बाद 2014 में उपचुनाव में भी कांग्रेस की ओऱ से खड़े हुए थे। लेकिन, दोनों बार उन्हें शिकस्त मिली। इसके बाद वह सपा में शामिल हो गए थे।
