इंदौर।
ओपी जायसवाल वैसे तो पुलिस फायर सर्विस में नौकरी करते हैं लेकिन भारतीय सेना, नौसेना, वायु सेना, एमपी पुलिस, अर्धसैनिक बलों, आरपीएफ में तैनात हजारों युवा उन्हें गुरु के रूप में दिल से उनका सम्मान करते हैं। ओपी जायसवाल एक मसीहा बनकर उनके जीवन में न आते तो अपने सपने को अंजाम पर पहुंचना उनके लिए शायद मुमकिन न होता।
ओपी जायसवाल इंदौर में एक फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर चलाते हैं जहां सेना, सुरक्षा बलों या पुलिस में भर्ती का सपना देखने वाले गरीब परिवारों के युवाओं को निःशुल्क फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं। पिछले 25 वर्षों में उनके फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर के दस हजार से अधिक युवा देश की सेनाओ, अर्धसैनिक बलों और स्टेट पुलिस, आरपीएफ समेत अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती हो चुके हैं। इंदौर के चीमनबाग के मैदान में रोज सुबह 5 बजे से ओपी जायसवाल सर की क्लास शुरू होती है जहां एक हजार बच्चे उनसे फिजिकल ट्रेनिंग लेते हैं। इसके बाद सुबह 8 बजे से 10 बजे तक उनकी दूसरी क्लास गांधी हॉल के ग्राउंड में लगती है। दोनों ही सेंटरों पर ओपी जायसवाल युवाओं को डिफेंस रनिंग, लांग जंप, हाई जंप, रोप क्लाइंबिंग, लैडर क्लाइंबिंग जैसे शारीरिक अभ्यास कराते हैं जो भर्ती के लिए बहुत जरूरी होते हैं। उनके सेंटर के सैकड़ों युवा हर साल विभिन्न फोर्सेज की भर्ती परीक्षा में सफल होते हैं। ओपी जायसवाल खुद भी इंटरनेशनल एथलीट हैं। बीएसएफ में रहने के दौरान उन्होंने शॉटपुट रिले में कई नेशनल मैडल जीते। उन्होंने 2016 में अमेरिका में शॉटपुट रिले का रिकार्ड बनाया था जो ‘गोल्डन बुक ऑफ रिकार्ड’ में आज भी दर्ज है। 42 किलोमीटर की मैराथन का पुलिस मीट रिकॉर्ड भी उनके ही नाम है।
ओपी जायसवाल ने शिवहरेवाणी से बातचीत में बताया कि उनके करियर की शुरुआत बीएसएफ से हुई थी, जहां उन्होंने 1998 तक सेवाएं दीं। 1999 में उन्होंने मध्य प्रदेश की पुलिस फायर सर्विस ज्वाइन कर ली जहां उनकी पहली पोस्टिंग इंदौर में हुई। इंदौर में रहते हुए उन्हें 24-25 साल हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि इंदौर में वह हर सुबह शारीरिक अभ्यास के लिए चीमनबाग पार्क जाते थे। उस दौर में भी वहां सैकड़ों युवा सेना में भर्ती के लिए शारीरिक अभ्यास और कसरत करते थे। लेकिन, उनका कोई ट्रेनर नहीं था और सही मार्गदर्शन के अभाव में उन्हें कामयाबी नहीं मिल रही थी। तब उन्होंने इन बच्चों को ट्रेनिंग देना शुरू किया। आज स्थिति यह है कि इंदौर ही नहीं, मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से भी युवा ओपी जायसवाल से फिजिकल फिटनेस की ट्रेनिंग लेने के लिए इंदौर आते हैं।
ओपी जायसवाल ने बताया कि वह अपने ट्रेनिंग सेंटर में केवल गरीब परिवारों के बच्चों को लेते हैं और उनसे कोई पैसा नहीं लेता। सभी व्यवस्थाएं अपने खर्चे करते हैं। यही नहीं, कोई बच्चा अच्छा जूता या किट खरीद पाने की हैसियत में नहीं है तो उसे अपने पैसे से खरीदकर देते हैं। इसी तरह उनकी हैल्दी डाइट का भी इंतजाम कराते हैं। कुल मिलाकर उनका आधा वेतन उनके फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर में ही चला जाता है। ट्रेनिंग सेंटर से कमाई करने का ख्याल तो उनके जेहन में दूर-दूर तक कभी आया ही नहीं। वह कहते हैं कि हर सुबह चीमन बाग मैदान में सैकड़ों बच्चे उनका इतजार करते मिलते हैं, बच्चों का यही प्यार और सम्मान उनकी सबसे बड़ी कमाई है। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने उन्हे आर्थिक सहायता की पेशकश की लेकिन उनकी शर्तें स्वीकार नहीं कर सकते थे। उनका कहना है कि जिसने भी उन्हें सहायता की पेशकश की, वह कहीं न कहीं उन्हें खरीदना चाहता था। वह कहते हैं कि ओपी जायसवाल फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर पर गरीब वंचित परिवारों के बच्चों का हक है, जिसे वह छिनने नहीं देंगे।
53 वर्षीय ओपी जायसवाल मूलतः सीधी के रहने वाले हैं और वहीं उनकी पढ़ाई लिखाई हुई। बीएसएफ में भर्ती होने के बाद सीधी छूट गया। फिर पुलिस फायर सर्विस की नौकरी में इंदौर पोस्टिंग मिली तो यहीं के होकर रह गए। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती ब्यूटन जायसवाल कुशल गृहणी हैं। बड़ा बेटा जयप्रकाश जायसवाल मध्य प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल है और वह भी इंदौर में पोस्टेड है। जबकि छोटा बेटा फिजिकल ट्रेनिंग सेंटर चलाने में पिता की मदद करता है।
ओपी जायसवाल का एक यूट्यूब चैनल भी है जो सेना में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए काफी उपयोगी साबित हो रहा है। बीते 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट और इंदौर के कलक्टर टी इलैया राजा ने सुरक्षा बलों में दस हजार बच्चों का सलेक्शन कराने के लिए उन्हें विशेष अवार्ड प्रदान किया था। इसके अलावा भी कई मंचों पर उन्हें प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं।
युवाओं के मसीहा ओपी जायसवाल; हजारों गरीब युवाओं को निःशुल्क फिटनेस ट्रेनिंग देकर सुरक्षा बलों में भर्ती कराया
