सिरसागंज। सिरसागंज के पूर्व चेयरमैन श्री संतकुमार ‘सोनी’ शिवहरे की ‘मोक्ष प्राप्ति’ के लिए सोमवार 18 दिसंबर को शांति हवन का आयोजन किया गया है। इटावा रोड स्थित उनके निवास ‘प्रताप कॉम्पलेक्स’ पर शांति हवन सुबह 9 बजे से शुरू हो जाएगा। इस दौरान परिवारीजनों और रिश्तेदारों समेत बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है।
बता दें कि 45 वर्षीय श्री संत कुमार ‘सोनी’ शिवहरे का निधन बीती 6 दिसंबर को गया था। रक्तचाप अचानक बहुत अधिक बढ़ जाने से उन्हें ब्रेन-हमरेज हो गया था। श्री सोनी शिवहरे के असमय चले जाने का समाचार हर उस शख्स को दुःखी कर गया, जो कभी न कभी किसी तरह उनके संपर्क में आया। 7 दिसंबर को उनकी अंत्येष्टि में हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी, और श्रद्धांजलि सभा में तो भीड़ का आलम इससे भी अधिक रहा। लगभग 20 वर्ष राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहे श्री सोनी शिवहरे के संक्षिप्त जीवन की यही ‘गाढ़ी’ कमाई थी।
श्री सोनी शिवहरे एक ऐसे नेकदिल इंसान थे, जो मौजूदा राजनीति में बिरले ही देखने को मिलते हैं। कोई भी आम व्यक्ति उनसे कभी भी मिल सकता था, और वह हमेशा सहायता के लिए तत्पर रहते थे। सियासत से पैसा बनाने वाले और शेखी बघारने वाले अहंकारी नेताओं की जमात में विनम्र लहजे का यह ‘सच्चा जनसेवक’ अलग ही नजर आता था। कोरोनाकाल के दौरान नगर पालिका चेयरमैन के रूप में जरूरतमंद लोगों की जो सहायता और सेवा श्री सोनी शिवहरे ने की, वैसी मिसालें भी कम ही हैं।
लगभग 3-4 साल पहले की बात है, जब आगरा का एक शिवहरे परिवार सिरसागंज में एक सड़क हादसे का शिकार हुआ था। हादसे की जानकारी मिलते ही श्री सोनी शिवहरे मौके पर पहुंचे और घायलों को खुद शिकोहाबाद अस्पताल पहुंचाया। हादसे में मारुति एस्टेट निवासी श्रीमती राजकुमारी शिवहरे की मौत हो गई थी। मृतका का नाम पता चलने पर वह पीड़ित परिवार के स्थानीय गार्जियन की भूमिका में आ गए। आगरा से पहुंचे शिवहरे समाजबंधुओं को सभी सहूलियतें मुहैया कराई। उनकी इस सह्रदयता, सदभावना और संवेदनशीलता को आगरा का वह पीड़ित परिवार कैसे भुला सकता है भला। यह केवल एक किस्सा नहीं है, ऐसे तमाम मामले हैं जिनमें श्री सोनी शिवहरे ने अपने व्यवहार और सेवाभाव की अमिट छाप छोड़ी। श्री सोनी शिवहरे हमेशा पीड़ित के साथ खड़े नजर आते थे, चाहे वह किसी भी समाज या वर्ग का हो। यही वजह है कि उनकी लोकप्रियता हर समाज और हर वर्ग में थी।
दो वर्ष पूर्व दिसंबर माह में ही श्री सोनी शिवहरे ने सिरसागंज में भागवत कथा का भव्य आयोजन कराया था, और आखिरी दिन एक लाख से अधिक लोगों का विशाल भंडारा किया था। सिरसागंज के आसपास के सैकड़ों गावों के लोग उस भंडारे में पहुंचे थे। दुर्भाग्यपूर्ण है कि श्री सोनी शिवहरे की यह नेकनामी और लोकप्रियता उनकी ही पार्टी भाजपा के अंदर उन कई वरिष्ठ नेताओं की आंखों की किरकिरी बन गई थी, जिन्हें वह हमेशा सम्मान और आदर देते रहे। और, शायद उन्हीं के असहयोग के चलते वह विधायकी के टिकट से वंचित भी रह गए।
इस बार सिरसागंज नगर पालिका अध्यक्ष का पद महिला आरक्षित होने के कारण श्री सोनी शिवहरे चुनाव नहीं लड़ पाए। लेकिन चेयरमैन न रहने के बावजूद नगर उनकी हैसियत चेयरमैन से कम नहीं थी। आम लोग अपनी समस्याएं लेकर लगभग रोज उनके पास पहुंचते थे। जीवन के अंतिम दिन 6 दिसंबर को भी उन्होंने अपने घर पर दो पक्षों के बीच पंचायत कराई थी। इसके बाद वह आंगन में टहल रहे थे, कि अचानक अचेत होकर गिर पड़े। परिवारीजन उन्हें फिरोजाबाद ट्रॉमा सेंटर ले गए जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सिरसागंजः श्री सोनी शिवहरे के निवास पर शांति हवन 18 दिसंबर को; बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना
