शाबाश! उदयपुर की सोनल कलाल का ‘टीम इंडिया ए’ में सलेक्शन; अब टीम इंडिया ही लक्ष्य; माता-पिता को दुनिया की सैर पर ले जाने का सपना
उदयपुर।
राजस्थान में उदयपुर के ग्रामीण अंचल से निकली प्रतिभाशाली क्रिकेटर सोनल कलाल अपना सपना साकार करने के बहुत करीब पहुंच गई हैं। सोनल कलाल आने वाले दिनों में विजयवाड़ा में खेली जाने वाली ‘इंडियन सीनियर वुमन चैलेंजर ट्रॉफी’ में ‘टीम इंडिया-ए’ की टॉप इलेवन का हिस्सा होंगी। राजस्थान के कलवार, कलार, कलाल समाज ने स्वजातीय बेटी की इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उसके स्वर्णिम भविष्य की कामना की है।
खास बात यह है कि सोनल कलाल ने 2017 से यूनिवर्सिटी क्रिकेट से अपनी शुरुआत की थी। और महज पांच साल की मेहनत में उस मुकाम पर पहुंच गई हैं जहां वह कई स्टार खिलाड़ियों के साथ जलवा बिखेरती नजर आएंगी। उसका सपना है कि एक दिन वह भारतीय सीनियर टीम की स्टार खिलाड़ी बनकर देश दुनिया में नाम रोशन करे। लेफ्ट आर्म स्पिनर सोनल हाल ही में सीनियर वुमन क्रिकेट की इंडियन रैंक में टॉप-टू में शामिल होकर बेस्ट विकेट टेकर का खिताब हासिल कर चुकी है। सोनल की उपलब्धि इस मायने में भी खास है कि वह राजस्थान से बीसीसीआई के इस टूर्नामेंट में सेलेक्ट होने वाली इकलौती क्रिकेटर है।
सोनल का गांव परेड़ा, उदयपुर जिला मुख्यालय से सौ किलोमीटर और केसरियाजी (ऋषभदेव) से करीब 20 किलोमीटर दूर है। सोनम की उपलब्धि की चर्चा पूरे इलाके में हैं, यहां तक कि उसके गांव परेड़ा की नई पहृचान ‘क्रिकेट वाली लड़की का गांव’ के तौर पर हो गई है। सोनल के पिता शंकरलाल कलाल किसान हैं, और गांव में ही पुश्तैनी जमीन पर खेती करते हैं। घर में कुछ भैसें भी हैं। मां तारा देवी गृहणी हैं। चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर की सोनल की स्कूलिंग गांव के ही सरकारी स्कूल से हुई है। बचपन में सोनल जब भी भैंसों को चराने खेत-जंगल में जाती, टूटी-फूटी गेंदों से सड़कों पर कपड़े धोने वाले बल्ले से क्रिकेट खेलने लगती। जलाने वाली लकड़ी के स्टंप बनाती और खुद स्पिन गेंदबाजी से उन्हें उखाड़ने लगती। सोनम की क्रिकेट प्रतिभा को देख सभी भाई-बहनों ने उसे खेलने के लिए प्रेरित किया। माता-पिता ने भी कभी लड़की समझकर रोका नहीं। सोनल ने छठी से दसवीं तक की पढ़ाई केसरियाजी में की, इसके बाद 11 वी में पिता ने पढऩे के लिए उदयपुर रखा। यहां बड़ी बहन विनिषा के साथ रहकर उसने मीरा गर्ल्स कॉलेज में प्रवेश लिया जो सोनल के जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
बीए की पढ़ाई के दौरान सोनल को पहली बार मौका मिला 22 गज की पिच पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का। कॉलेज के स्पोर्ट्स विभाग ने सोनल की नैसर्गिक प्रतिभा को पहचाना और उसी वर्ष 2017 में उसे यूनीवर्सिटी की टीम में चुन लिया गया। इसके बाद सोनल मुंबई में असम के खिलाफ पहले ही मैच में 4 विकेट चटकाते हुए बेस्ट बॉलर बनी। फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सोनल ने शिवहरेवाणी से बातचीत में कहा कि अब टीम इंडिया ही उसका एकमात्र लक्ष्य है। उसका सपना है कि जिस दिन वह अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेले, उसकी मां स्टेडियम में मौजूद हों। वजह यह है कि मां को हरदम चिंता लगी रहती थी, कि लड़की को कहीं गेद न लग जाए, कोई चोट न आ जाए। सोनल को इस बात का भी फख्र है कि पिता ने तमाम पारंपरिक बंधनों को तोड़ते हुए क्रिकेट के लिए एक बेटी को पूरी तरह से खुला छोड़ दिया। स्टार खिलाड़ी बनने के बाद सोनल अपने माता-पिता को दुनिया की सैर कराना चाहती है। सोनल का कहना है कि गांव में शादी करवाने का लोग परिवार पर दबाव बनाते हैं, लेकिन परिवार वाले उसका पूरा सपोर्ट कर रहे है। समाज की हर लड़की के लिए सोनल का संदेश है, कि आगे बढ़ते समय कभी पीछे मुड़कर नहीं देखें। बीते दिनों सोनम के ‘टीम इंडिया ए’ में सलेक्शन का समाचार सामने आया तो वह गांव में अपने परिवार के साथ थीं। सभी ने मिलकर सोनम की इस उपलब्धि का जश्न मनाया। परिवार में माता-पिता के अलावा बड़े भाई नवीन जो मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव हैं, भाभी श्रीमती नेहा, बहन श्रीमती विनिषा, जीजाजी श्री नरेश पटेल (गांधीनगर), छोटा भाई मनीष हैं।
पत्रकार मदन कलाल ने सोनल के संघर्ष की कहानी को साझा करते हुए बताया कि तीन साल पहले सोनल जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम पर तेज दोपहरी में रनिंग करते दिखीं थी। तब 5 दिन का जयपुर में कैंप था। मदन कलाल ने बताया कि सोनल से परिचय हुआ तो पता चला हमारे गांव से कुछ ही दूरी पर इनका भी गांव है। बिना शेड्यूल रनिंग का कारण पूछा तो बोलीं, इंटरनेशनल स्टेडियम में मौका मिला है जीभर के दौड़ लेने दीजिए। पता नहीं जिंदगी में मौका मिलेगा या नहीं।
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