विदिशा।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि आत्मा अजर अमर है और शरीर नश्वर। फिर, नश्वर चीज़ों से कैसा मोह ! और, वह भी तब जब आत्मा अपना घर छोड़ चुकी हो! विदिशा के 78 वर्षीय श्री जुगल किशोर राय ने जीवन इस सत्य को जाना औऱ 7 साल पहले ही देहदान करने की घोषणा कर दी। बीते शुक्रवार (9दिसंबर, 2022) को उनकी मृत्यु के पश्चात उनकी छह बेटियों ने पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह शासकीय अटल बिहारी मेडिकल कालेज को सौंप दी।
पेशे से किसान रहे श्री जुगल किशोर राय ने जीत-जी मानव सेवा को ही अपना धर्म माना था और इसी उद्देश्य से उन्होंने मृत्यु के बाद अपनी पार्थिव देह को दान करने का निर्णय ले लिया था, ताकि उनके मरने के बाद यह मेडिकल स्टूडेंट्स के रिसर्च में काम आए। आमतौर पर तो मुक्तिधाम ही शवयात्राओं का मुकाम होता है, लेकिन शुक्रवार को श्री जुगल किशोर राय की अंतिम यात्रा का मुकाम शासकीय अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज था। अंतिम यात्रा में शामिल लोग हाथों में तख्तियां लेकर चल रहे थे, जिनमें “देहदानी जुगल दादा अमर रहें” के नारे लिखे थे। श्री जुगल किशोर राय का देहदान उनकी 6 बेटियों ने कराया, जो विवाहित हैं और अलग-अलग शहरों में रहती हैं। विदिशा में राजीव नगर निवासी श्री जुगल किशोर राय कुछ दिनों से बीमार चल थे और गुरुवार (8 दिसंबर) शाम 5 बजे उनकी मृत्यु हो गई। यह समाचार मिलते ही उनकी सभी बेटियां सुनीता राय, हेमलता, रजनी, मीना, शिवाली जायसवाल एवं योगिता राय अपने-अपने परिवारों के साथ पहुंचीं। बेटियों ने आपस में बातचीत कर तय किया कि पिताजी की इच्छा का सम्मान करते हुए उनकी पार्थिव देह मेडिकल कालेज को दान कर दी जाए। उन्होंने देहदान अभियान से जुड़े विकास पचौरी को इसकी जानकारी दी। बता दें कि विकास पचौरी के माध्यम से ही श्री जुगल किशोर राय ने देहदान किया था। विकास पचौरी ने देहदान की सभी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी करवा दीं थीं।
श्री जुगल किशोर राय की अंतिम यात्रा अगले दिन शुक्रवार की सुबह 10 बजे राजीव नगर स्थित उनके निवास से शुरू हुई, जिसमें देहदान एवं नेत्रदान का संकल्प लेने वाले सदस्यों के अलावा शहर के अनेक लोग ‘देहदानी जुगल दादा अमर रहें’ के नारे लगा रहे थे। रास्ते में उनकी शवयात्रा पर लोगों ने पुष्पवर्षा की। मेडिकल कालेज में डीन सुनील समेत सभी चिकित्सकों, स्टाफ और स्टूडेंट्स ने श्री जुगल किशोर राय को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बेटियां अपने आंसूं नहीं रोक सकीं।
श्री जुगल किशोर राय की छोटी बेटी श्रीमती योगिता राय ने शिवहरेवाणी को बताया कि उनके पिता ने संघर्षपूर्ण जीवन जिया, पहले ग्रामीण क्षेत्रीय समिति बैंक में काम करते थे। रिटायर होने के बाद पास के हासुआ गांव में खेती-बाड़ी करते थे। कोई बेटा नहीं था, सो बेटियों को ही बेटों की तरह पढ़ाया लिखाया और उनके विवाह किया। आठ वर्ष पहले पत्नी श्रीमती राधा राय के निधन के बाद श्री जुगल किशोर राय ने अपना जीवन धर्म-अध्यात्म और मानवसेवा के लिए पूरी तरह समर्पित कर दिया था। बता दें कि श्रीमती योगिता राय जानी-मानी गायिता सुश्री वैष्णवी राय जानी-मानी भजन गायिका हैं।
जब मेडिकल कालेज पहुंची शवयात्रा; छह बेटियों के पिता ने जीवन के इस सच को जानने के बाद किया देहदान; रिसर्च के काम आएगी पार्थिव देह
