आज बुधवार को नवरात्रि का पांचवा दिन स्कंदमाता को समर्पित है। स्कन्दमाता माता को पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनकी गोद में कार्तिकेय बैठे होते हैं, इसलिए इनकी पूजा करने से कार्तिकेय की पूजा अपने आप हो जाती है। इनकी पूजा-अर्चना से वंश आगे बढ़ता है और संतान संबधी दुख दूर होते हैं। घर-परिवार में शांति और खुशहाली रहती है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की जन्म कुंडली में बृहस्पति ग्रह कमजोर होता हैं, वे इस दिन स्कंदमाता की पूजा करते हैं तो उनकी कुंडली में बृहस्पति की अशुभता दूर होती है। बृहस्पति शिक्षा, उच्चपद और मान सम्मान का कारक है। वहीं स्कंदमाता की गोद में बैठे कार्तिकेय की पूजा से मंगल भी मजबूत होता है।

नवरात्र की पंचमी को पीले रंगे के कपड़े पहनकर माता की पूजा करें। उन्हें पीले फूल अर्पित करें। उन्हें मौसमी फल, केले, चने की दाल का भोग लगाए। इससे शुभ फल की प्रप्ति होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम एक राक्षस ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या करने लगा। प्रसन्न होकर ब्रह्माजी प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहा। तारकासुर ने अमर होने का वरदान मांगा। तब ब्रह्मा जी ने समझाया कि इस धरती पर जिसने भी जन्म लिया है, उसकी मृत्यु निश्चित है। निराश होकर तारकासुर ने ब्रह्मा जी कहा कि प्रभु ऐसा कर दें कि भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही उसकी मृत्यु हो।

दरअसल तारकासुर को लगता था कि भगवान शिव विवाह नहीं करेंगे, लिहाजा उनकी संतान भी नहीं होगी और इस तरह उसकी मृत्यु नहीं होगी। ब्रह्मा जी ने उसे वरदान दिया और अदृश्य हो गए। इसके बाद तारकासुर ने लोगों पर अत्याचार करना आरंभ कर दिया। परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव के पास पहुंचे और मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की। तब शिव जी ने पार्वती जी से विवाह किया और कार्तिकेय के पिता बनें। बड़े होने के बाद भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध किया। स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं।













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