वाराणसी।
जैसा कि लगभग तय था, भाजपा ने वाराणसी उत्तर सीट पर योगी सरकार के मंत्री रविंद्र जायसवाल को ही प्रत्याशी घोषित किया है। रविवार देर रात जारी भाजपा के 45 प्रत्याशियों की सूची में उनका नाम भी शामिल है। यदि रविंद्र जायसवाल चुनाव जीत जाते हैं तो विधायक के तौर पर यह उनकी हैट्रिक होगी।
रविंद्र जायसवाल के बारे में खास बात है कि उन्होंने विधायक के रूप में कभी सैलरी ली है, परिवार या स्वयं का खर्चा उनके डिग्री कालेज से ही चलता है। जबकि, विधायक निधि से अपने क्षेत्र में उन्होंने कई काम कराए हैं। वाराणसी में जन्मे रविंद्र जायसवाल ने बताया कि उनके पिता रामशंकर जायसवाल संघ (आरएसएस) के कार्यसेवक थे। उनका सपना था कि बेटा बिना राजनीति के समाज और जनता की सेवा दिन-रात करे। राजनीति में आने से पहले उन्होंवने वादा लिया था कि राजनीति का पैसा कभी घर मत लाना। इसलिए रविंद्र जायसवाल ने आज तक सैलरी का एक पैसा भी घर पर खर्च नहीं किया है।
वाराणसी में पले-बढ़े, स्नातकोत्तर रविंद्र जायसवाल ने 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता है, जिसके बाद 2017 में उन्होंने फिर अपनी जीत दोहराई। रविंद्र जायसवाल का संघ से पारिवारिक संबंध है। वह अपने क्षेत्र की जनता के बीट काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। विधायक के रूप मे उन्होंने अपनी विधायक निधि क्षेत्र में तमाम विकास कार्य कराए और कोविड काल में उन्होंने विधायक निधि से राजकीय आयुर्वेद कालेज की स्थापना कराई, एफएचएनसी मशीनें, ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदे ताकि क्षेत्र की जनता की मदद हो सके।
रविंद्र जायसवाल की पत्नी अंजू जयसवाल ने बताया, ये फख्र की बात है कि मेरे पति कभी अपनी सैलरी का एक भी पैसा घर नहीं लाए। डिग्री कॉलेज से परिवार चलता है। रविंद्र जायसवाल के दो बच्चे हैं-एक बेटा और एक बेटी। दोनों अभी पढ़ाई कर रहे हैं।
योगी के मंत्री रविंद्र जायसवाल के पास हैट्रिक का मौका; वाराणसी उत्तर से भाजपा ने फिर बनाया प्रत्याशी
