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अदभुत…अद्वितीय…अविस्मरणीय! लोहामंडी के दुर्गा पंडाल में ‘शिवहरों की रामलीला’ ने दिल जीता; आधी रात तक जागती रही शिवहरे गली; आज देवी जागरण

आगरा।
अदभुत… अद्वितीय… अविस्मरणीय…। कौन सोच सकता था कि आलमगंज के घने मोहल्ले में रहने वाले आम शिवहरे परिवारों के साधारण से दिखने वाले बच्चे, युवा, घरेलू महिलाएं और यहां तक कि बुजुर्ग भी, मंच पर रामलीला करने उतरेंगे तो प्रोफेशनल एक्टर्स की तरह अभिनय के झंडे गाढ़ देंगे।
आलमगंज (लोहामंडी) की शिवहरे गली में सजे दुर्गा पंडाल के मंच पर दो-दो, तीन-तीन मिनट के लगभग 15 दृश्यों में सिमटी रामलीला का मंचन इस कदर प्रभावशाली रहा कि आधी रात तक दर्शक अपनी जगह से हिले तक नहीं। प्रस्तुति से अभिभूत राधाकृष्ण मंदिर के अध्यक्ष अरविंद गुप्ता औऱ महासचिव मुकुंद शिवहरे ने वादा किया कि वे बहुत जल्द शिवहरे समाज के किसी बड़े कार्यक्रम में इस रामलीला का मंचन कराएंगे, ताकि आगरा का हर शिवहरे स्वजन इसे देखे औऱ गौरवान्वित महसूस करे। उन्होंने रामलीला के सभी कलाकारों को बधाई दी और सुश्री दीपा गुप्ता का आभार जताया जिन्होंने न केवल रामलीला की परिकल्पना की, बल्कि निर्देशक के तौर पर साधारण स्वजनों के भीतर दबी-छिपी अभिनय प्रतिभा को बाहर निकालने का शानदार कारनामा किया।
यह काफी कुछ वैसा ही था, जैसा फिल्म डायरेक्टर मीरा नायर ने अपनी ऑस्कर नॉमीनेटेड फिल्म ‘सलाम बांबे’ में किया था। उन्होंने मुंबई के फुटपाथों और झुग्गियों में रहने वाले गरीब बच्चों से जीवंत अभिनय कराकर दुनियाभर में सराहना बटोरी थी। यह अलग बात है कि वह एक फिल्म थी जिसमें रिटेक होता है, और होता ही रहता है जब तक कि परफेक्ट शॉट न बन जाए। जबकि नाट्य मंच पर रिटेक की कोई सुविधा नहीं होती। मंच पर ‘शिवहरों की रामलीला’ की पहली ही प्रस्तुति का परफेक्शन बता रहा था कि पिछले 15 दिनों में इसके लिए सभी ने कितनी शिद्दत से मेहनत की होगी।
वह चाहे माता शबरी के रोल में 75 वर्ष की श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता हों, या फिर रावण की भूमिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर यश गुप्ता, हनुमान बने रोशन शिवहरे की बात करें या कुंभकरण व मेघनाद की दोहरी भूमिकाएं निभाने वाले कुश शिवहरे ‘कुश्शू’ की, शिवहरे स्वजनों ने मंच पर रामलीला के हर किरदार को अपने अभिनय से वैसे ही उकेरा, जैसा कि पौराणिक ग्रंथों में उनका वर्णन है और जो हमारी कल्पनाओं में बसा है। राम की भूमिका में कृष गुप्ता की सौम्यता, लक्ष्मण बने गगन शिवहरे का क्रोध, सीता बनीं सुश्री ताशी शिवहरे द्वारा राम से विरह-वेदना की अभिव्यक्ति देखते ही बनती थी। तुषार शिवहरे ने दशरथ के रोल में राम को वनवास भेजने के दुख और कशमकश को अपनी भाव-भंगिमाओं से उकेरा। रामलीला में हर छोटे-बड़े चरित्र को बच्चों ने बड़ी कुशलता से निभाया। यहां तक कि वानर सेना में शामिल 5 से 10 साल के छोटे-छोटे बच्चे भी मंच पर पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने मुंह फुलाए युद्ध करते नजर आए। डायरेक्टर सुश्री दीपा शिवहरे मंच के एक कोने में छिपकर अपने हाथों के इशारों से सभी कलाकारों को मंच पर उनकी पोजीशन, डायलॉग की भाव-भंगिमाओं को याद दिलाती जा रही थीं, ताकि कहीं कोई चूक न हो।
भगवान राम के जन्म से लेकर सीता-स्वयंवर, विवाह, राजतिलक, वनवास, सीता हरण, लंका दहन, युद्ध और रावण पर राम की विजय तक की रामकथा का वर्णन 15 सेट में किया गया। और अंत में सुश्री दीपा शिवहरे ने अपनी शानदार नृत्य से भगवान राम के चरित्र का वर्णन और उनकी आरती कर इस प्रस्तुति को पूर्णता प्रदान की। इस रामलीला की परिकल्पना रामानंद सागर के लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘रामायण’ पर आधारित थी और उसी सीरियल से 15 दोहों का चयन कर 15 सीन तैयार किए गए थे, डायलॉग भी रामायण सीरियल से लिए गए थे। कलाकार उन डॉयलॉग के अनुरूप होठ हिलाते हुए (लिपसिंग) अभिनय कर रहे थे। हर दृश्य के बाद पर्दा गिरता था तो सूत्रधार की भूमिका में सुश्री पलक शिवहरे, गौतम शिवहरे और सुश्री कृति शिवहरे माइक पर अगले दृश्य को समझाते और फिर पर्दा उठता।
रामलीला में जारा (मंथरा व शूर्पनखा), हनी गुप्ता (विभीषण व समुद्रदेव), आशीष गुप्ता (राजा जनक), पायल गुप्ता (रानी सुनयना), अमित गुप्ता ‘कालू’ (जामवंत), शिवम (विश्वामित्र व ब्रह्माजी), रिषभ (जटायु), नव्या (उर्मिला), पिहू (मांडवी), एंजल (श्रुतनीति), अथर्व गुप्ता (विष्णु देव), मिलान गुप्ता (भगवान शिव व नल), शुभ शिवहरे (ब्रह्माजी व नील), राशिका गुप्ता (धरती माता), कविश गुप्ता (इंद्रदेव), अथर्व गुप्ता (वैद्य सुषेण), आदि (अग्निदेव) के अलावा वानर सेना में रुद्र, लव्य, शुभ, विराट, मिलान और रावण सेना में वेद, अथर्व, कविश, देव, मोहन समेत का अभिनय बहुत प्रभावशाली और प्रशंसनीय रहा।
रामलीला को तैयार करने में सुश्री दीपा गुप्ता को उनके बड़े भाई श्री अमित गुप्ता ‘गोल्डी’ का बड़ा साथ मिला जिन्होंने पर्दे के पीछे से बहन के सहयोग, मार्गदर्शन और प्रोत्साहन में कोई कमी नहीं छोड़ी। रामकथा के विभिन्न पात्रों के लिए कलाकारों का चयन और उनके कास्ट्यूम के सलेक्शन में भी उनकी अहम भूमिका रही। ताशु गुप्ता, सिद्धांत, यश गुप्ता, गगन शिवहरे ने निर्देशन कार्य में दीपा गुप्ता का सहयोग किया है। अभिजीत गुपता, मयंक गुप्ता, मीनल गुप्ता और मानसी गुप्ता ने प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालते हुए हर सेट में छोटी से छोटी चीज का ख्याल रखा। नुपुर गुप्ता ने हर अध्याय को दोहों में विस्तार से लिखा है। युवा भाजपा नेता हर्ष गुप्ता और शिवहरे युवा कमेटी की पूरी टीम ने व्यवस्थाओं में समन्वय स्थापित किया।
दाऊजी मंदिर के सचिव वीरेंद्र गुप्ता एडवोकेट ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि इसका स्तर उम्मीद से कहीं अधिक रहा। वरिष्ठ समाजसेवी श्री विपिन शिवहरे ने कहा कि लोहामंडी का शिवहरे समाज शुरू से ही प्रतिभाशाली और कलाप्रिय रहा है। एक दौर ऐसा भी था, जब राधाकृष्ण मंदिर में समाजबंधु नाटकों का मंचन प्रस्तुत करते थे, बच्चों ने वो पुरानी यादें ताजा कर दीं।
शिवहरे युवा कमेटी के हर्ष शिवहरे ने बताया कि शनिवार, 27 सितंबर की रात मैय्या की आरती के बाद देवी जागरण शुरू होगा जो भोर तक चलेगा। जागरण में ऑरकेस्ट्रा पार्टी मैया की भेंटे प्रस्तुत करेगी, साथ ही समाज के बच्चे भी बीच-बीच में प्रस्तुतियां देंगे। उन्होंने शिवहरे युवा कमेटी की ओर से समाजबंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में आकर जागरण का आनंद लेने का आग्रह किया है।

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