आगरा।
आगरा में शिवहरे समाज की धरोहर दाऊजी मंदिर के बाहरी स्वरूप के साथ गंभीर छेड़छाड़ पर शिवहरेवाणी के समाचारों का संज्ञान दाऊजी मंदिर समिति को अंततः लेना ही पड़ा। बीते रविवार समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने श्री संजय शिवहरे और श्री सर्वेश शिवहरे की दुकानों पर हुए निर्माण का निरीक्षण करने के बाद एकमत से इसे पूरी तरह ‘गलत, अवैध और अतिक्रमण’ करार दिया।
हालांकि इतने पर भी मीटिंग में अवैध निर्माण कराने वाले इन ‘शिवहरे बंधुओं ‘को तलब कर उनसे सवाल-जवाब करने की जहमत नहीं उठाई गई। मीटिंग में इस अवैध निर्माण को हटाने पर सैद्धांतिक सहमति तो बनी लेकिन इसे गिराने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। हालांकि, मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री बिजनेश शिवहरे से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने शिवहरेवाणी को आश्वस्त किया है कि यह अवैध निर्माण हर हाल में हटाया जाएगा।
दूसरी तरफ, यह अवैध निर्माण कराने में महासचिव आशीष शिवहरे (जिज्ञासा पैलेस) की अहम भूमिका और संलिप्तता भी मीटिंग में खुलकर सामने आ गई। वरिष्ठ सदस्य श्री मोतीलाल शिवहरे ने मीटिंग में अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने श्री आशीष शिवहरे को अपनी निगरानी में यह अवैध निर्माण कराते हुए देखा था, और तभी उनसे इस पर कड़ी आपत्ति भी की थी, लेकिन श्री आशीष शिवहरे ने उनकी एक नहीं सुनी। खास बात यह है कि श्री मोतीलाल शिवहरे की बात को मीटिंग में भी अनसुना कर दिया गया और वहां मौजूद श्री आशीष शिवहरे से इस पर कोई जवाब नहीं मांगा गया।
और तो और, इतनी बातें सामने आने के बाद भी मीटिंग में श्री आशीष शिवहरे की बेफिक्री काबिलेगौर थी। किसी प्रकार की सफाई देना तो छोड़ दीजिए, उल्टे उन्होंने मीटिंग में एक नया प्रस्ताव रखवा दिया जो धरोहर के मुख्य द्वार पर संरक्षित करने लायक अदभुत कलाकृतियों से बिल्कुल सटी दुकान की दीवार गिराने को लेकर है। बहाना उस दुकान की दीवार में आई एक दरार को बनाया, जिसे मामूली ट्रीटमेंट (पैचवर्क) से बिल्कुल दुरुस्त किया जा सकता है। वहां मौजूद समिति के पदाधिकारियों ने भी मौके का निरीक्षण करने के बाद दीवार तोड़ते के बजाय केवल पेचवर्क कराने सुझाव दिया, लेकिन सबकी दलीलों को दरकिनार कर आशीष शिवहरे ने जिस तेजी और तत्परता के साथ दुकानदार श्री राजकिशोर गुप्ता की ओर से एक आवेदन-पत्र समिति के सह-कोषाध्यक्ष श्री सुनील शिवहरे से लिखवाया, वह दाल में काला होने का गंभीर संदेह पैदा करता है।
श्री आशीष शिवहरे को मंदिर के अगले हिस्से में तोड़फौड़ शुरू करने की जल्दी मे क्यों है? तोड़ना क्यों चाहते हैं, इसके पीछे क्या ‘डील’ है? उनका अपना इंटरेस्ट क्या है, क्यों है? विश्वस्त सूत्रों की जानकारी में यह बात पहले से है कि श्री आशीष शिवहरे ने श्री राजकिशोर गुप्ता से भी उनकी दुकान को बड़ा करने की कोई डील कर रखी है, इतने बड़े काम के बदले केवल ‘शाम की पार्टी’ से काम चलने वाला नहीं। हालांकि इस बारे में जब समिति अध्यक्ष श्री बिजनेश शिवहरे से पूछा गया तो उन्होंने इससे इनकार कर दिया। खैर, शिवहरेवाणी अपने स्तर से इसकी पड़ताल कर सत्य को समाज के सामने लाने का प्रयास करेगी।
फिलहाल, दाऊजी मंदिर में नित पूजा करने वाले और इस धरोहर के साथ गहरा जुड़ाव रखने वाले समाजबंधु समिति की गतिविधियों को लेकर बहुत आशंकित, चिंतित और दुःखी हैं, और उन्हें इनके पीछे सबसे स्पष्ट और मुख्य भूमिका आशीष शिवहरे की नजर आती है। उनका मानना है कि आशीष शिवहरे जब तक दाऊजी मंदिर समिति के महासचिव पद पर बने रहेंगे, तब तक धरोहर के साथ अनर्गल औऱ अवांछित छेड़छाड़ को रोक पाना मुश्किल होगा। और, शिवहरे समाज की पहचान और शान की प्रतीक इस कलात्मक धरोहर के अस्तित्व पर खतरा बढ़ता जाएगा।
जागरूक और फिक्रमंद समाजबंधुओं का कहना है कि समिति को आशीष शिवहरे से इस्तीफा लेकर उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। उनकी गतिविधियों से हुए नुकसान का आकलन कर उनसे वसूली की जानी चाहिए। आशीष शिवहरे की शह औऱ संरक्षण में उनके रिश्तेदार अपनी दुकान में खुदाई कर धरोहर की नींव को खतरे में डाल चुके हैं, बाहरी हिस्से में अवैध निर्माण तो अब कराया है। यही नहीं, आशीष शिवहरे की ‘सरदारी’ में दाऊजी मंदिर के कोष को बड़ी हानि पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इन विषयों पर आगे चर्चा करेंगे।
क्रमशः
दाऊजी मंदिर समिति ने निर्माण को माना ‘अवैध और अतिक्रमण’; आशीष शिवहरे की भूमिका संदिग्ध, इस्तीफा लेकर निष्पक्ष जांच कराने की जरूरत; राजकिशोर गुप्ता की दुकान को लेकर ‘डील’ क्या है?
